
‘प्रकृति ही सर्वोपरि धर्म’ संदेश के साथ साइकिल यात्रा शुरू Publish Date : 18/10/2026
‘प्रकृति ही सर्वोपरि धर्म’ संदेश के साथ साइकिल यात्रा शुरू
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पद्मभूषण अनिल जोशी गांधी जयंती पर नेपाल से शुरू करेंगे यात्रा-
वरिष्ठ पर्यावरणविद् पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि मनुष्य का चारित्रिक पतन ही प्रकृति के विनाश का मुख्य कारण है। लोग घरों में प्रभु का पूजन तो करते हैं, लेकिन प्रकृति का हास करने से हिचकते भी नहीं हैं। प्रभु और प्रकृति एक ही समान हैं। प्रकृति ही सर्वाेपरि धर्म है, इसी संदेश के साथ वह जनकपुर (नेपाल) से दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर साइकिल यात्रा आरंभ कर चुके हैं और लगभग तीन हजार किमी का सफर तय कर 20 नवंबर को मेरठ में यात्रा का समापन करेंगे। 2295 किलोमीटर के इस सफर में 51 दिनों तक वह प्रतिदिन 50-60 किमी साइकिल से यात्रा करेंगे।

गुरुवार को मेरठ पहुंचे अनिल प्रकाश जोशी ने बताया कि नेपाल के बाद बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और एनसीआर में साइकिल यात्रा पहुंचेगी। माता सीता के मायके जनकपुर से साइकिल यात्रा का आरंभ इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि माता सीता धैर्य की प्रतिमूर्ति हैं। वह जननी हैं। शुभ कार्य के लिए मां का आशीर्वाद होना चाहिए और नेपाल में हुई त्रासदी को देखते हुए यात्रा आरंभ करने का स्थान चयनित किया। मेरठ को रावण की ससुराल कहा जाता है। आज हमारी दृष्टि में वे सभी रावण हैं, जो प्रकृति को नष्ट करने पर तुले हैं। नदियों का दम घोंट रहे हैं, वाहनों से प्रदूषण फैला रहे हैं। साइकिल यात्रा के दौरान उन चुनौतियों पर चर्चा करेंगे, जो भविष्य की दहलीज पर खड़ी हैं। प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण में गंभीरता लानी होगी। पौधारोपण से ज्यादा जरूरी नदी और जल संरक्षण है। वहीं कार्बन फुटप्रिंट साइकिल यात्रा को लेकर स्कूल परिसर में बैठक आयोजित की गई। प्रोफेसर डॉ. देवेश शर्मा, गिरिश शुक्ला, प्रोफेसर डॉ. विवेक त्यागी, प्रोफेसर डॉ. श्याम वर्मा, शिक्षक अरविंद गौरव उपस्थित रहे। संचालन पवनेंद्र गौड़ ने किया।
ऐसी होगी यात्रा
दो अक्टूबर को यात्रा जनकपुर से शुरू हो चुकी है। उसके बाद मधुबनी, दरभंगा, दलसिंहसराय, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, बराहाट, बांका, देवघर, जमुई, बाढ़, पटना, आरा, बक्सर, देवरिया, गोरखपुर, अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ, कानपुर, इटावा, ग्वालियर, धौलपुर, आगरा, मथुरा, पलवल, फरीदाबाद, दिल्ली होते हुए 20 नवंबर को मेरठ में समाप्त होगी।