
एक करोड़ टन कम हो सकता है धान का उत्पादन Publish Date : 15/10/2026
एक करोड़ टन कम हो सकता है धान का उत्पादन
मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही इस बार धान का उत्पादन कम होने की आशंका बढ़ गई है। पहले वर्षा की कमी के चलते धान का रकबा कम हुआ और अब फसल तैयार होने के समय नमी की कमी से प्रति हेक्टेयर पैदावार प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इसी बीच अल-नीनो भी आने वाले महीनों में मौसम को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
पिछले वर्ष देश में रिकार्ड 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था, जिसमें इस बार एक करोड़ टन की कमी आ सकती है। कृषि मंत्रालय का अनुमान लगभग 14.4 करोड़ टन चावल उत्पादन का है। यह पिछले एक दशक के दौरान चावल उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट होगी। ऐसे में नई फसल में कमी से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और निर्यात भी महंगा हो सकता है। सितंबर तक राज्यों के पास चावल का कुल सरकारी भंडार करीब 5.96 करोड़ टन था, जो जरूरत से अधिक है।
भारत में एक जून से अब तक मानसूनी वर्षा सामान्य से करीब 15% कम रही है। कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में कमी 42 प्रतिशत तक पहुंची है। कृषि मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, धान की खेती के क्षेत्रफल में गिरावट 3.73 प्रतिशत की है। मूंग का रकबा भी कम हुआ है। हालांकि अरहर और उड़द में वृद्धि हुई है।
देश के 320 जिलों में वर्षा की कमी 20 से 59 प्रतिशत
- देश के 792 जिलों में से 327 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है। इनमें 320 जिले ऐसे हैं जहां कमी 20 से 59 प्रतिशत के बीच है। सात जिलों में वर्षा की कमी 60 प्रतिशत से भी अधिक है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के जिले इससे प्रभावित हैं।
- कमजोर मानसून से खरीफ फसलों का कम हुआ रकबा, धान का क्षेत्र 3.73 प्रतिशत कम हुआ।
- कम वर्षा और अल-नीनो से धान उत्पादन पर दोहरी मार, सामान्य से 15% कम हुई वर्षा।
533.1 मिमी बारिश हुई
पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक जून से 30 अगस्त तक, जो सामान्य औसत से 14 प्रतिशत कम है। 544.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई पूरे प्रदेश में एक जून से 30 अगस्त तक, जो सामान्य औसत से सात प्रतिशत कम है।