दुनिया की पहली भाषा का जन्म हुआ कैसे      Publish Date : 06/10/2026

   दुनिया की पहली भाषा का जन्म हुआ कैसे

                                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

क्या आपने कभी सोचा है कि इंसानों ने सबसे पहले बोलना कब और कैसे शुरू किया होगा? पैलियोलिथिक पुरातत्वविद अप्रैल नॉवेल के अनुसार, भाषा संकेतों पर आधारित एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी शब्द और उसके अर्थ का स्वाभाविक संबंध नहीं होता।

उदाहरण के लिए, अंग्रेजी का 'डॉग' और फ्रेंच का 'शिया', दोनों एक ही जानवर के नाम हैं, पर उनकी बोलियां अलग-अलग हैं। भाषा की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके जरिये हम अतीत को याद कर सकते हैं, भविष्य की कल्पना कर सकते हैं और अनगिनत नए वाक्य बनाकर अपने विचार साझा कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह क्षमता अब तक केवल इंसानों में ही देखी गई है।

भाषा की शुरुआत को समझने के लिए वैज्ञानिक हमारे सबसे करीबी प्राइमेट्स, जैसे चिंपैंजी, वानरों और बंदरों के संचार के तरीकों का अध्ययन करते हैं। उदाहरण के तौर पर, वर्वेट बंदर अलग-अलग खतरों के लिए अलग-अलग चेतावनी वाली आवाजें निकालते और पूरा समूह उनका अर्थ समझ लेता। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी संकेतात्मक आवाजें धीरे-धीरे शब्दों का रूप लेने लगीं।

                                  

करीब चार लाख वर्ष पहले के निएंड्रथल भी इस यात्रा की अहम कड़ी माने जाते हैं। वे प्रतीकात्मक और अनुकरणात्मक, दोनों तरह के शब्दों का उपयोग कर सकते थे। वैज्ञानिक इसकी जांच जैविक और पुरातात्विक, दोनों तरह के प्रमाणों से करते हैं। अध्ययन से संकेत मिले हैं कि निएंड्रथल का मस्तिष्क भाषा से जुड़ी क्षमताओं के लिए काफी विकसित था।

वहीं, उनके गले की एक खास हड्डी (हायॉइड बोन) आधुनिक इंसानों जैसी पाई गई, जबकि चिंपैंजी में यह अलग होती है। इससे अनुमान लगाया गया कि वे इंसानों जैसी आवाजें निकालने और सुनने में सक्षम थे। पुरातात्विक खोजें भी इस धारणा को मजबूती देती हैं। निएंड्रथल द्वारा बनाए गए पत्थर के औजार और गुफाओं में मिले प्रतीक बताते हैं कि वे किसी न किसी रूप में भाषा का इस्तेमाल करते रहे होंगे।

अधिकांश निएंड्रथल के दाएं हाथ से काम करने के प्रमाण मिले हैं, जिसे मस्तिष्क के बाएं हिस्से, जहां भाषा का प्रसंस्करण होता है, के विकास से जोड़ा जाता है।

आगे चलकर लगभग 10 हजार वर्ष पहले चीन में कछुए के खोल पर उकेरे गए कुछ चिह्न मिले, जो आज की चीनी लिपि के अक्षरों से मिलते-जुलते हैं। इन्हें लिखित भाषा के शुरुआती प्रमाणों में गिना जाता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।