
अपनी कल्पना को साकार करने का हो हुनर तो बनें मूर्तिकार Publish Date : 25/09/2026
अपनी कल्पना को साकार करने का हो हुनर तो बनें मूर्तिकार
प्रो0 आर. एस. सेंगर
मूर्तिकला में कॅरियर की एक प्राचीन विधा है जिसमें मूर्तिकार अपनी कल्पना को साकार रूप देकर एक सुंदर कृति का निर्माण करता है। भारत में कला की एक समृद्ध परम्परा और विरासत देखने को मिलती है। यहां कला के क्षेत्र में कई प्रतिभावान कलाकारों ने अपना महत्यपूर्ण योगदान दिया है। जो छात्र रचनात्मक कार्य करने में दिलचस्पी रखते हैं उनके लिए मूर्तिकारी में कॅरियर बनाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इसके विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी के कई अवसर मौजूद हैं।
जैसा आपको बताया जा चुका है कि मूर्ति तराशना एक कला है और अगर आप इसमें अपना कैरियर बनाना चाहते है तो इसका प्रशिक्षण लेना उतना ही जरुरी है जितना और किसी विषय का प्रशिक्षण लेना होता है। इस प्रशिक्षण से आपको मूर्तिकार बनाने के लिए जरुरी बाते और तरीकों के बारे में सिखाया जाता है।
एक मूर्तिकार होना अपने आप में एक तकनीकी और रचनात्मक कार्य है। कला का शौक और सीखने का जज्बा रखने वाले छात्र ट्रेनिंग लेकर खुद को रोजगार योग्य बना सकते हैं।
आवश्यक योग्यता
- अगर आप मूर्तिकार बनने में दिलचस्पी रखते तो 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इस वर्ष में दाखिला ले सकते हैं। दाखिले के लिए यह न्यूनतम योग्यता है।
- मूर्तिकार के पास यूनिवर्सिटी या कॉलेज के चार वर्षीय पाठ्यक्रम बीएफए (बैचलर ऑफफाइन आर्ट्स) में स्नातक डिग्री होनी चाहिए। डिग्री कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती हैं, जिसमें उम्मीदवारों के कौशल को जांचा जाता है।
- इसके अलावा अगर आप फाइन आर्ट्स में पेशेवर अध्ययन करना चाहते हैं तो इसके लिए मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम (एमएफए) कर सकते हैं। बीएफए डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम भी कर सकते हैं।
स्वरोजगार भी कमाई का अच्छा जरिया
मूर्तिकला स्वरोजगार का अच्छा जरिया बन सकता है। भारतीयों द्वारा निर्मित मूर्तियों की मांग भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी है। जहां तक मिट्टी की मूर्तियों का सवाल है तो सस्ती होने के कारण इसकी काफी मांग है। यही कारण है कि आज इस क्षेत्र में संभावनाओं का विस्तार हुआ है। इसमें कमीशन वर्क यानी ऑर्डर के हिसाब से काम मिल जाता है। इसके अलावा प्रदर्शनियों में भाग लेकर भी आपके 5 काम की डिमांड बढ़ेगी। इस क्षेत्र में अगर आप मेहनत कर लें तो आसानी से कॅरियर बना सकते हैं।
इस काम को करने के लिए आपको अपने काम के लिए उपयुक्त जगह का चुनाव, उपकरण और मशीने तथा अन्य जरुरी चीजों की आवश्यकता होती है। इस काम की शुरुआत कम पूंजी से भी की जा सकती है।
मूर्तियों के प्रति बढ़ रहा मोह
मूर्ति निर्माण प्राचीनतम कलाओं में से है, लेकिन यह आज भी युवाओं के लिए रोजगार का प्रमुख साधन है। अपने घरो में सजावट के लिए ही सही, लोगों में मूर्तियों के प्रति मोह बढ़ रहा है, जिसने विभिन्न तरह की मूर्तियों की मांग में काफी इजाफा किया है। अगर आपकी रुचि भी मूर्तियों में है तो यह आपके लिए रोजगार का साधन बन सकता है। आजकल सीमेंट-क्रांकीट, सफेद तांबा, प्लास्टर ऑफ पेरिस व मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती हैं। रेत पर भी सुंदर कृतियों उकेरी जाती है जिसे सेंड आर्ट कहते हैं।
प्रमुख संस्थान
- कला भवन (इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स), शांतिनिकेतन।
- फैकल्टी ऑफ म्यूजिक ऐंड फाइन आर्ट्स, दिल्ली विश्वविद्यालय।
- सर जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स, मुंबई।
- फैकल्टी ऑफ विजुअल आदर्स, बनारस हिंदू विवि, वाराणसी।
- कॉलेज ऑफ आर्ट्स, दिल्ली।
- एलएस रहेजा ऑफ आर्ट, मुबई।
- भारती विद्यापीठ कला महाविद्यालय कॉलेज ऑफ फाइन आदर्स, पुणे।
- डिपार्टमेंट ऑफ फाइन आर्ट्स, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय।
- यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर, मैसूर।
- डिपार्टमेंट ऑफ फाइन आर्ट्स, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़।
विशेषताएं
- रचनात्मक और कल्पनात्मक हो।
- कार्य के प्रति समर्पण।
- रंगों का बेहतरीन प्रयोग करने की दक्षता।
- मूल विचारों को विकसित करने के लिए रचनात्मकता।
- आत्मविश्वास।
- इंटरप्रेट आर्ट, कनेक्ट आर्ट व बियोरी की जानकारी।
- लगन व दृढ़ता।
पाठ्यक्रम
- बीए स्कल्यवर
- बीएफए इन स्कल्यवर
- डिप्लोमा इन स्कल्पचर
- यूजी डिप्लोमा कोर्स इन स्कल्पचर
- यूजी डिप्लोमा कोर्स इन फाइन आर्ट्स
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।
