थायराइड का प्रभावी निदान दवा लेने की नहीं होगी बाध्यता      Publish Date : 25/09/2026

थायराइड का प्रभावी निदान दवा लेने की नहीं होगी बाध्यता

                                                                                                  डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

थायराइड विकार होने पर लगातार दवाओं पर निर्भर होना पड़ता है, लेकिन एसजीपीजीआई लखनऊ में हुए एक शोध ने बड़ी उम्मीद जताई है, जिससे इस विकार को जड़ से खत्म किया जा सकता है-

थायराइड की सर्जरी के बाद जीवनभर हार्मोन और कई मरीजों में कैल्शियम की दवा लेने की मजबूरी अब कम हो सकती है। संजय गांधी पीजीआई के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन (डामा) नामक नई हाइब्रिड तकनीक विकसित की गई है। इसका उद्देश्य थायराइड का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रखना है, ताकि मरीज की प्राकृतिक थायराइड कार्यक्षमता बनी रहे और उसे हार्मोन रिप्लेसमेंट और कैल्शियम लेने की जरूरत से यथासंभव बचाया जा सके।

यह तकनीक उन मरीजों के लिए कारगर है, जिनके थायराइड के दोनों हिस्सों में सौम्य (बेनाइन) गांठें होती हैं। अब तक सात मरीजों पर इसका सफल उपयोग किया गया है। सभी ऑपरेशन सफल रहे। ऑपरेशन के बाद सभी मरीजों की थायराइड कार्यक्षमता सामान्य रही और उपचारित गांठों के आकार में शुरुआती कमी भी दर्ज की गई।

पहले ऐसे मरीजों में अक्सर पूरा थायराइड निकालना पड़ता था। इससे रोग तो ठीक हो जाता था, लेकिन जीवनभर थायराइड हार्मोन की दवा लेनी पड़ती थी। कई मामलों में पैराथायराइड ग्रंथियां प्रभावित होने से कैल्शियम की दवा भी लेनी पड़ती थी। आवाज की नस को नुकसान होने और अन्य शल्य जटिलताओं का खतरा भी बना रहता था।

क्या है थायराइड ग्रंथि

थायराइड महत्वपूर्ण अंतःस्रावी (एंडोक्राइन) ग्रंथि है, जो हार्मोन बनाकर शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदयगति, तापमान व मेटाबालिज्म नियंत्रित करती है। जब यह कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो थायराइड विकार हो जाता है।

प्रमुख कारण

ऑटोइम्यून बीमारी: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड पर हमला करने लगती है। इससे हाइपोथायराइडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म हो सकता है।

आयोडीन असंतुलन: आयोडीन की कमी से थायराइड हार्मोन कम बनते हैं, जबकि अधिक आयोडीन भी समस्या पैदा कर सकता है।

आनुवंशिक कारण: इससे जोखिम बढ़ जाता है।

  • थायराइड में गांठ (नोड्यूल) या सूजन (थायराइडाइटिस)।
  • कुछ दवाएं, जैसे लिथियम या एमीयोडेरोन।
  • रेडिएशन थेरेपी या विकिरण।
  • गर्भावस्था और प्रसव के बाद हार्मोनल बदलाव। बढ़ती उम्र, विशेषकर महिलाओं में।

बचाव के लिए जरूरी उपाय

  • संतुलित आहार लें और आयोडीन युक्त नमक का उचित मात्रा में सेवन करें।
  • सेलेनियम, जिंक, आयरन और विटामिन-डी जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा लें।
  • नियमित योग, ध्यान और पर्याप्त नींद लें।
  • धूम्रपान और तंबाकू से बचें।

उम्मीद जगाती है तकनीक

डामा तकनीक में जिस हिस्से में बड़ी या ऑपरेशन योग्य गांठ होती है, उसे सर्जरी से हटाया जाता है, जबकि दूसरी ओर की सौम्य गांठ को उसी दौरान माइक्रोवेव एब्लेशन से नष्ट कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में थायराइड तक सीधी पहुंच मिलने से माइक्रोवेव प्रोब को अत्यंत सटीक स्थान पर लगाया जा सकता है। इससे आवाज की नस, श्वासनली, आहारनली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं हालांकि, इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए मरीजों का नियमित फॉलो-अप जारी है।

इनकी भी रही भूमिका

डामा तकनीक के विकास में सहायक प्रोफेसर डा. रजनी के. साह, डा. जगन्नाथ संदना तथा रेजिडेंट डा. नम्रता मस्कारा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।