कृषि विश्वविद्यालय में उन्नत भू-स्थानिक तकनीकों पर दस दिवसीय समर स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ      Publish Date : 15/09/2026

कृषि विश्वविद्यालय में उन्नत भू-स्थानिक तकनीकों पर दस दिवसीय समर स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसवीपीयूएटी), मेरठ के कृषि महाविद्यालय में मृदा विज्ञान विभाग एवं मृदा जल संरक्षण अभियांत्रिकी विभाग द्वारा UPCAR के वित्तीय सहयोग से “कार्बन लेखांकन एवं डिजिटल मृदा मानचित्रण हेतु उन्नत भू-स्थानिक तकनीकें” (एडवांस जिओस्पेसियल टेक्नोलॉजी फॉर कार्बन एकाउंटिंग एंड डिजिटल साइल मैप) विषय पर आयोजित दस दिवसीय समर स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रातः 10:30 बजे डीन समिति कक्ष में हुआ।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. त्रिवेणी दत्त अपने प्रेषित सन्देश में आशीर्वचन एवं शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता की कामना की तथा प्रतिभागियों से इस प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षक एवं मृदा विज्ञान विभाग के शोधार्थी छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक एवं मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप शाही ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

प्रो. शाही ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, सतत कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए मृदा कार्बन का वैज्ञानिक आकलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्नत भू-स्थानिक तकनीकों के माध्यम से बड़े क्षेत्रों में मृदा के विभिन्न गुणों तथा कार्बन भंडारण का अधिक सटीक, तीव्र एवं प्रभावी आकलन किया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान GIS, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मृदा मानचित्रण, जियोस्टैटिस्टिक्स, मृदा कार्बन आकलन एवं आधुनिक डेटा-आधारित तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ व्यावहारिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ रामजी सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के उपयोग में दक्ष बनाना तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि, मृदा कार्बन प्रबंधन एवं डिजिटल मृदा सूचना प्रणाली के क्षेत्र में क्षमता निर्माण करना है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने हेतु उन्होंने माननीय कुलपति जी का आभार व्यक्त किया।

अधिष्ठाता तकनिकी महाविद्यालय डॉ जयवीर सिंह ने अपने स्वागत उद्बोधन में रिमोट सेंसिंग व् जिओस्पेसियल तकनीकों के महत्त्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ आर एस सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी, डॉ पंकज कुमार अधिष्ठाता गन्ना विज्ञान एवं तकनिकी, डॉ जेनिथा, डॉ डीके सिंह सहित सभी अधिष्ठाता एवं विभागाद्यक्ष उपस्तित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 से 24 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

UPCAR के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम मृदा विज्ञान एवं कृषि अनुसंधान में आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।