कृषि वैज्ञानिक डॉ॰ आर. एस. सेंगर ने हिन्दी को दी नई उड़ान      Publish Date : 14/09/2026

कृषि वैज्ञानिक डॉ॰ आर. एस. सेंगर ने हिन्दी को दी नई उड़ान

                                                                                                                   प्रो0 आर. एस. सेंगर

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्याय में हाल ही में अधिष्ठाता जैव प्रोद्योगिकी महाविद्यलय का पदभार सम्भालने वाले प्रसिद्व कृषि वैज्ञानिक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रो0 आर. एस. सेंगर ने आमजन की भाषा हिन्दी को सदैव ही प्राथमिकता प्रदान की है। हिन्दी देश में करोड़ों लोगों के लिए ज्ञान हासिल करने के विषय के साथ ही संवाद का सहज माध्यम भी है। ऐसे में तकनीकी और विशेषज्ञता वाले विषयों को सरल हिंदी में उपलब्ध कराने से ज्ञान की पहुंच उन लोगों तक भी बढ़ सकती है जिनके लिए अंग्रेजी बाधा बनती है। इसी सोच के साथ किताबों, डिजिटल मंचों और आधुनिक तकनीकों में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर नित नए प्रयोग किए और हिंदी को आमजन तक पहुंचाने के लिए डॉ॰ आर एस सेंगर, अधिष्ठाता, बायोटेक्नोलॉजी सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ ने सराहनीय  कार्य किए हैं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी जैसे कठिन विषय को भी हिंदी में आमजन तक पहुंचाने के लिए हिन्दी की 8 पुस्तकें लिखी है जो कि बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण से संबंधित हैं। उनका सदैव ही यह प्रयास रहा है कि  जैव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान को सरल भाषा में आम जनता तक पहुंचाया जाए।

प्रोफेसर आर एस सेंगर हिन्दी माध्यम से आए विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा में हिन्दी शब्दावली का प्रयोग करते हुए सरल भाषा में साहित्य तैयार किया जिसका लाभ छात्रों एवं किसानों को भी मिल सके।

डॉ॰ आर एस सेंगर ने बताया कि कई विद्यार्थी अंग्रेजी की किताबों और नोट्स का हिंदी में अनुवाद कर अपनी नोटबुक तैयार करते थे, जिससे उनका काफी समय बर्बाद हो जाता था। उनको लगा कि जब विद्यार्थी का इतना समय भाषा समझने में ही चला जाएगा तो वह विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय की मूल अवधारणाओं पर कब ध्यान देगा, उनके अनुसार लगभग 50 से 55 प्रतिशत विद्यार्थियों की पढ़ाई भाषा की समस्या से प्रभावित होती है। यहीं से हिंदी में किताबें लिखने का विचार उनके मन में आया और उन्होंने छात्रों की मदद के लिए हिंदी में साहित्य तैयार किया, जिसका लाभ छात्रों के साथ साथ अन्य लोगों को भी मिल रहा है।

डॉ॰ आर एस सेंगर ने बताया कि उन्होंने टेली, एग्रीकल्चर की देश में वर्ष 2020 में शुरुआत की और टेली एग्रीकल्चर में हिंदी से संबंधित लेख और तकनीकी ज्ञान किसानों तक भेजने का  कार्य किया, जिसका परिणाम है कि उनकी वेबसाइट किसान जागरण डॉट कॉम से लाखों किसान जुड़े हुए हैं और नई तकनीक का ज्ञान लैब से लैंड तक भेजने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जब सभी कुछ रुका हुआ था, स्कूल बंद थे, तब उनके मन में विचार आया कि तकनीकी ज्ञान और साहित्य को टेली एग्रीकल्चर के माध्यम से किसानों, छात्र छात्राओं तक पहुंचाया जाए जिससे उनको इसका लाभ मिल सकें। उसी का परिणाम था कि टेली एग्रीकल्चर की शुरुआत की गई और आज लाखों लोग उसका लाभ ले रहे हैं। पहले ज्यादातर सामग्री ई-लर्निंग में दी जाती थी। वो अंग्रेजी में थी जिससे ग्रामीण प्रवेश के बच्चे ई-लर्निंग से कट रहे थे क्योंकि सारी सामग्री अंग्रेजी में होने के कारण उनको समझने में दिक्कत आती थी, इसलिए हिंदी माध्यम के बच्चों के लिए अपनी भाषा में कोई मंच नहीं था। इस समस्या ने समाधान तलाशने को प्रेरित किया और उसके बाद टेली एग्रीकल्चर तथा किसान जागरण डॉट कॉम की शुरुआत की गई।

डॉ॰ आर एस सेंगर ने बताया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और हिंदी का बाज़ार अब लगातार बढ़ रहा है और इसको लगातार मजबूती दी जा रही है। देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 900000000 को पार कर चुकी है। इसमें से 80 प्रतिशत से अधिक गैर अंग्रेजी मुख्य रूप से हिंदी भाषा में सामग्री का उपयोग करते हैं। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, आज साठ करोड़ वक्ता के साथ दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोलने वाली भाषा हिंदी है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।