बीपी की समस्या से बचाव      Publish Date : 14/09/2026

             बीपी की समस्या से बचाव

                                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

हृदय से जुड़ी समस्या अब हर उम्र में हो रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार, भारत में 15 से 54 वर्ष के आयुवर्ग में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन है। क्या आप जानते हैं कि बढ़ता तापमान न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है, बल्कि यह चुपके से हृदय के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है? इसलिए आने वाले दिनों में पारा बढ़ने पर कैसी होनी चाहिए आपकी तैयारी, यही समय है कि हम यह अच्छी तरह समझ लें। हालांकि हमारा शरीर मौसम के अनुकूल स्वयं ही बदलाव करने में माहिर होता है, पर उचित सावधानी न रखी जाए तो बड़ी मुसीबत भी बन सकती है।

़वास्तव में पारा बढ़ने पर हमारी रक्त वाहिकाएं शरीर को ठंडा यानी सामान्य तापमान में लाने के प्रयास में जुट जाती हैं। इस प्रक्रिया में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव होता है और शरीर से पसीना भी अधिक निकलता है। यही वह चीज है, जिसका गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ध्यान रखना चाहिए। दरअसल, पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, जिससे हमें बचना है अन्यथा रक्तचाप सामान्य से बहुत कम होने से नसों में थक्के जमने की आशंका रहती है। हृदय को रक्त पंप करने में समस्या आती है, उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो आपातकाल की स्थिति यानी हार्ट अटैक या स्ट्रोक की स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है।

एसी के विना रहने की आदत

गर्मी शुरू होते ही घर से लेकर दफ्तर तक सब जगह एसी चलाया जाने लगता है। कुछ लोग एसी का तापमान बहुत कम रखना पसंद करते हैं। अगर रक्तचाप की समस्या है तो ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर लंबे समय तक एयरकंडीशनर में कामकाज करना पड़े तो प्रयास करें कि इसे एक सामान्य तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर ही सेट करें। बता दें कि अधिक कूलिंग रखने से आपको प्यास कम लग सकती है। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। शरीर का पसीना बाहर नहीं निकलने से शरीर में सोडियम यानी नमक बना रहता है। यह हृदयरोगियों के लिए काफी जोखिम भरा हो सकता है।

एसी में निरंतर रहने के आदी होने से आप शारीरिक गतिविधि भी कम करने लगते हैं या इससे बचना चाहते हैं। साथ ही यह गर्मी सहने की क्षमता को कम करने के साथ हृदय की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन

सामान्य रक्तचाप 120/80 होना चाहिए, पर हाइपरटेंशन है तो यह 140/90 के आसपास रहता है। एक रीडिंग में उच्च रक्तचाप है तो यह हाइपरटेंशन हो आंवश्यक नहीं। सात दिन लगातार मापने के बाद यदि तीन दिन या इससे अधिक समय तक उच्च रक्तचाप रहे तो आप इसकी चपेट में हो सकते हैं। हाइपरटेंशन है छिपा हुआ खतरा विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल रिपोर्ट आन हाइपरटेंशन 2025 के अनुसार, वैश्विक आबादी का तकरीबन 34 प्रतिशत हिस्सा हाइपरटेंशन से पीड़ित है। भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। इनमें से 17 करोड़ का रक्तचाप अनियंत्रित रहता है।

रक्तचाप की जांच बचाव का बेहतर उपाय

इससे कई तरह की दिक्कत होती है। इसमें सर्दी में हृदय रोगियों को सावधानी बरतनी होती है तो गर्मी में भी अलग सबसे आम है रक्तचाप का कम होना। इसके लिए आपको पानी खूब पीना चाहिए। शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। नियमित रक्तचाप जांच कराएं ताकि उसे नियंत्रण में रखने में आसानी हो। यदि हाइपरटेंशन है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक छुपा हुआ जोखिम है, जो लापरवाही से आपको गंभीर हृदय रोग की स्थिति में भी पहुंचा सकता है।

Docter की सलाह से ही दवाइयां कम करें

गर्मी में ऐसी जगहों पर जाने से परहेज करें जहां अधिक गर्मी और घुटन हो या पसीना आने के साथ लंबे समय तक खड़े रहना पड़े। अक्सर देखा गया है कि ऐसे में बीपी लो हो जाता है और लोग बेहोश हो जाते हैं। वहीं, यदि आप हृदयरोग से जुड़ी समस्याओं की दवाइयां ले रहे हैं तो यह भी रक्तचाप को कम कर सकती है। दरअसल, इन दवाइयों का काम ही होता है आपके शरीर के अतिरिक्त द्रव को निकालना या रक्तचाप कम करना, लेकिन स्वयं से दवाइयां कम न करें। चिकित्सक से ही पता चलेगा कि आपकी वास्तविक स्थिति क्या है और कौन सी व कितनी दवा कम करनी है।

खानपान में रखें ध्यान

  • संतुलन और कोशिकाओं के सोडियम की मात्रा, अम्ल और क्षार का सामान्य कार्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता रक्तचाप बढ़ा सकती है।
  • फलों व सब्जियों में पोटेशियम पर्याप्त होता है, हृदय की सेहत के लिए यह जरूरी है।
  • ताजे फल व सब्जियों का सेवन करें। साबुत अनाज और फलियों का सेवन अच्छा है।
  • मोटे अनाज जो इस मौसम के अनुकूल हैं, जैसे जौ, रागी आदि का भरपूर सेवन करें।

डिहाइड्रेशन से बचें

शरीर के तापमान को स्थिर बनाने के लिए पानी जरूरी है। इससे हार्ट को काम करने में आसानी होती है। गर्मी के दिनों में खूब पसीना निकलता है। इसे संतुलित रखने के लिए नींबू पानी, पुदीने और खीरे के पानी का उपयोग भी कर सकते हैं। ओआरएस का घोल भी ले सकते हैं।

  • जंक फूड व मसालेदार खाने को ना कहे। डिब्बाबंद खाना भी आपके लिए सही नहीं है।
  • अधिक ठंडे खाद्य पदार्थ के सेवन से परेशानी महसूस कर सकते हैं, अतः खाने से पहले उसे सामान्य करें।
  • घी, सरसों तेल अच्छे माने गए हैं, पर इनका सेवन भी सीमित करना चाहिए।
  • वजन कम करने के लिए खाना छोड़ने जैसे अचानक बदलाव घातक प्रभाव डाल सकते हैं।

इनका भी रहे ध्यान

  • अत्यधिक गर्मी या बढ़े हुए तापमान में बाहर जाने से बचें।
  • सूती व आरामदायक वस्त्र का चयन करें ताकि शरीर को ठंडा रहने में मदद मिले।
  • कसरत व शारीरिक गतिविधि करते रहें।
  • स्वस्थ तनाव प्रबंधन के तरीके जाने। धूमपान, अल्कोहल इसके लिए सही नहीं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।