
मिट्टी में आयरन की कमी होने से इंसानों का खून भी हुआ कम Publish Date : 14/09/2026
मिट्टी में आयरन की कमी होने से इंसानों का खून भी हुआ कम
प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चोधरी एवं गरिमा शर्मा
गंगा के मैदानी इलाकों की मिट्टी में आयरन, फॉलिक एसिड, बोरान, जिंक और फास्फोरस की कमी लगातार सामने आ रही है। इससे लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। खून की कमी का रोग एनीमिया के बढ़ने का एक यह भी कारण है। मिट्टी की खराब सेहत का दुष्प्रभाव सब्जियों, अनाज, कीट संसार, पशुओं के साथ मानव के स्वास्थ्य पर हो रहा है। लोगों में खून की कमी हो रही है। उन्हें फूड सप्लीमेंट लेना पड़ रहा है। मानव की न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी एक नया मुद्दा बनकर उभरा है।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान में हाल ही में आयोजित की गई राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस पल्सेस-2026 में न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी को लेकर विज्ञानियों ने गहन मंथन किया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक और केंद्रीय शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के पूर्व सचिव मंगला राय ने बताया कि देश की मिट्टी में जिंक 50 प्रतिशत, बोरान 33 प्रतिशत, आयरन 13 प्रतिशत कम हो गया है। मिट्टी में इन तत्वों की कमी होने से सब्जियों, अनाज आदि में भी इन पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी सब्जियां, अनाज खाने से मानव में ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि खाने में आयरन की कमी होने से एनीमिया के मामले काफी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। इससे लोगों को फूड सप्लीमेंट की जरूरत बढ़ गई है। इन तत्वों की कमी पूरा करने के लिए उन्हें अलग से टैबलेट लेनी पड़ती है। मिट्टी में सल्फर की भी मात्रा घटी है। इससे कीट संसार, पशु और मानव सभी प्रभावित हो रहे हैं। मिट्टी में पौष्टिकता की कमी का कारण रासायनिक खादों का बढ़ता इस्तेमाल है। मिट्टी के 10 पौष्टिक तत्व कम हुए हैं।
गंगा का मैदानी इलाका इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो रहा है। कॉन्फ्रेंस में आए अन्य विज्ञानियों ने सलाह दी कि दालों की पैदावार बढ़ाने से मिट्टी में पौष्टिक तत्व बढ़ेंगे।
70 लाख टन दालों की कमी पड़ रही- डॉ. मंगला राय ने बताया कि दालों की पैदावार देश में 270 लाख टन हो गई है। फिर भी 70 लाख टन की कमी है। चना ऑस्ट्रेलिया, अरहर कीनिया और कनाडा से मंगानी पड़ रही है। कभी कीनिया में दाल नहीं होती थी। इसके अलावा दूसरे अफ्रीकी देशों और म्यांमार से दालों का आयात किया जा रहा है।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।
