प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानकारी एवं बचाव का सही तरीका      Publish Date : 11/09/2026

प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानकारी एवं बचाव का सही तरीका

                                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

प्रोटेस्ट कैंसर की समस्या और इसकी पहचान

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और इसके इलाज से जुड़े कुछ मिथक समय पर जांच और उपचार में अवरोध भी पैदा कर सकते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि प्रोस्टेट की गंभीर होती समस्या को लेकर हर स्तर पर इसके प्रति जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए। प्रोस्टेट कैंसर भारतीय पुरुषों में तीसरा सबसे बड़ा और आम कैंसर है। आमतौर इसका पता 65 साल की उम्र के आसपास ही चल पाता है। एक अनुमान के अनुसार हर 125 पुरुषों में से एक को इस कैंसर के होने की आशंका बनी रहती है।

प्रोस्टेट कैंसर पर अक्सर खुलकर चर्चा नहीं की जाती है। कुछ लोग मानते हैं कि जब तक दर्द या इसके कुछ अन्य स्पष्ट लक्षण सामने न आए, तब तक चिंता की जरूरत नहीं है। इस मिथक के चलते इसके इलाज में देरी हो सकती है और समस्या गम्भीर रूप धारण कर सकती है। ऐसे में हमारे आज के इस लेख में आपको ऐसे ही कुछ मिथकों की जानकारी प्रदान की जा रही ताकि आप इनसे बचकर समय से अपना उपचार शुरू कर सकें और ण्क स्वस्थ जीवन जी सकें।

मिथक 1: अगर में अपने आपको स्वस्थ महसूस करता हूं तो मुझे प्रोस्टेट कैंसर नहीं हो सकता।

सच्चाईः प्रोटेस्ट कैंसर के लक्षण अक्सर तब दिखाई देते हैं जब यह बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी होती है। नियमित स्क्रीनिंग के अभाव में यह बीमारी को अधिक गंभीर बनाती है। इसके लिए 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को डाक्टर से सलाह लेकर अपनी नियमित जांच करानी चाहिए ताकि समय से ही इस बीमारी का इलाज संभव हो सके।

मिथक 2: प्रोस्टेट कैंसर होने पर इसका उपचार दर्दनाक होता है-

सच्चाईः आज के समय में प्रोटेस्ट कैंसर का इलाज काफी बेहतर और पर्सनलाइज्ड हो चुका है। ऐसे में हर मरीज को एक जैसे इलाज की जरूरत नहीं होती। यह उम्र, बीमारी की स्टेज, सामान्य स्वास्थ्य और मरीज की प्राथमिकताओं के आधार पर तय किया जाता है। यहां तक कि उन्नत (मेटास्टेटिक) स्टेज में भी कई मामलों में हार्माेनल थेरेपी और नई लक्षित (टार्गेटेड) दवाओं से इस बीमारी का इलाज संभव हो पाता है, जिसमें कीमोथेरेपी की जरूरत भी नहीं पड़ती।

मिथक 3 अगर कैंसर फैल गया तो फिर इसके बाद कुछ नहीं किया जा सकता-

सच्चाईः प्रोटेस्ट कैंसर का एडवांस स्टेज जीवन का अंत नहीं है। जब प्रोस्टेट कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है, तब भी इलाज के विभिन्न विकल्प उपलब्ध होते हैं। नई और आधुनिक थेरेपी बीमारी की गति को धीमा कर सकती हैं, लक्षणों को कम कर सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं। वर्तमान समय में कई मरीजों के लिए एडवांस प्रोस्टेट कैंसर एक दीर्घकालिक (क्रानिक) बीमारी की तरह मैनेज किया जा रहा है, जिसमें समय-समय पर इलाज को मरीज को जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है।

प्रोटेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण

प्रोस्टेट कैंसर की बीमारी अक्सर चुपके से पनपती है। प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में पेशाब करने में दिक्कत, पेल्विक हिस्से में दर्द, पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब आना, या पेशाब का बहाव शुरू करने या उसे बनाए रखने में कठिनाई आदि की समस्या शामिल हो सकती है।

डाक्टर से मिलने का समय

50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को नियमित रूप से प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग करवाने और अपने डाक्टर से परामर्श करते रहना चाहिए क्योंकि विशेष रूप से जब कभी भी आपके पेशाब में खून दिखाई दे, क्योंकि यह प्रोस्टेट कैंसर का एक सबसे आम आम लक्षण है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।