आज पूरा विश्व है युद्ध की चपेट में      Publish Date : 08/09/2026

        आज पूरा विश्व है युद्ध की चपेट में

                                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर

मनुष्यों द्वारा विकसित किए गए आधुनिक विज्ञान और पश्चिम की हवाओं में बहने वाले विचार ने विश्व को मानवता का विनाश करने वाले हथियारों से भर रखा है। ऐसी स्थिति में किस देश के पास कितने हथियार हैं, इसका अंदाजा लगाना संभव नहीं हो पा रहा है, इसी कारण से विश्व के भौगोलिक, आर्थिक और जनसंख्या के मानचित्र पर छोटे दिखने वाले देशों को समाप्त करने की इन्हीं मानचित्रों के विशाल देशों की चेष्टा पूरी नहीं हो पा रही है। यदि यह युद्ध मनुष्यों का होता तो जिस देश के लोग अधिक संख्या में, अधिक बलशाली और अधिक युद्ध कौशल से युक्त होते वह दूसरे देश को परास्त कर देता है, लेकिन आज युद्ध मनुष्यों के द्वारा नहीं बल्कि यह केवल मशीनों द्वारा ही लड़े जा रहे हैं, जिसमें मशीन ही मशीन को मार रही है। कितना अच्छा होता कि यह युद्ध ऐसे ही चलता लेकिन निर्जन स्थानों पर चलता जहां मरने और मारने वाले हथियार मशीनें ही होतीं तो कम से कम मानव समाज को हताहत नहीं होना पड़ता।

मानवों की  आवश्यक आपूर्तियां बाधित नहीं होतीं। आज हमें महाभारत का युद्ध याद आता है जहां युद्ध प्रारंभ करने से पहले युद्ध क्षेत्र का चयन किया गया था। इसीलिए हिंसक होते हुए भी वह एक धर्म युद्ध ही था। कभी कभी युद्ध अंतिम विकल्प होने पर आवश्यक हो सकता है, लेकिन उस युद्ध की भी कुछ मर्यादाएं निर्धारित होनी चाहिए। वैसे युद्ध किसी भी काल में रहा हो वह हमेशा से ही केवल विध्वंसक ही रहा है जिसका प्रभाव युद्धरत लोग, समाज और उसके आस पास के लोगों पर होता ही है, लेकिन मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार करने पर लगता है कि जिसका युद्ध से कोई लेना देना नहीं उस पर इसका असर क्यों पड़ना चाहिए।

धर्म युद्ध में जो लोग युद्ध का हिस्सा नहीं है उन लोगों पर उसका प्रभाव न्यूनतम होता है। आज विश्व में कुछ देश आपसे में युद्ध कर रहे हैं, कहने को तो रूस-यूक्रेन, इजरायल - फिलिस्तीन, अमेरिका- ईरान ही युद्ध में सम्मिलित हैं लेकिन वर्तमान समय में इस युद्व की चपेट में पूरा विश्व आ गया है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।