
उत्तर प्रदेश में गन्ने का गिरता क्षेत्रफल कारण और समाधान Publish Date : 01/09/2026
उत्तर प्रदेश में गन्ने का गिरता क्षेत्रफल कारण और समाधान
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में दो साल से गन्ने का क्षेत्रफल लगातार गिरता जा रहा है, गन्ने का क्षेत्रफल और गन्ने के उत्पादन की लागत में भी वृद्वि हो रही है।
मेरे सम्मानित किसान भाईयों एवं दोस्तों, उत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक उत्पादक राज्य है, लेकिन प्रदेश में अब निरंतर कम होती गन्ने की पैदावार ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है, सम्भवतः यही कारण है कि पिछले दो वर्षों से गन्ने की बुवाई के क्षेत्रफल में लगातार कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण गन्ने में बढ़ते रोग और इस फसल की लागत का माना जा रहा है। गन्ने के विभिन्न रोगों और कीटनाशकों का प्रयोग करने के चलते प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता में भी कमी दर्ज की गई और इसके साथ ही गन्ने की मिठास भी कम हुई है। ऐसे में यही वह कारण है कि गन्ने में रिकवरी के कम होने के चलते चीनी के उत्पादन में भी तेजी से कमी दर्ज की जा रही है।
इस प्रकार कम हुआ गन्ने और चीनी उत्पादनः देश के कुल उत्पादन का लगभग 46 प्रतिशत भाग अपना उत्तर प्रदेश ही करता है। वहीं, महाराष्ट्र 22 प्रतिशत उत्पादन के साथ देश में दूसरे स्थान पर काबिज है। ऐसे में पिछले दो वर्षों में ही यूपी के गन्ना उत्पादन में 131.99 लाख टन उत्पादन की कमी दर्ज की गई है। इसकी वजह यह है कि गन्ने के क्षेत्रफल और प्रति हेक्टेयर उत्पादन, दोनों में ही कमी दर्ज की गई है। गन्ने की बुआई के क्षेत्रफल में यदि 1.05 लाख हेक्टेयर की कमी आई है तो वहीं, इसकी उत्पादकता में भी 0.85 टन प्रति हेक्टेयर तक की कमी दर्ज की गई है। इसी के साथ यदि चीनी के संदर्भ में बात करें तो इसमें भी 14.61 लाख टन तक का उत्पादन कम हो गया है।
क्यों कम हुआ चीनी का उत्पादन
चीनी उत्पादन में भारी कमी का एक महत्पूर्ण कारण एथेनॉल का बढ़ता उत्पादन भी है। प्रदेश में वर्ष 2016-17 में एथेनॉल का उत्पादन 42.70 करोड़ लीटर था जो कि अब करीब 225 करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक बताते हैं कि आज लगभग हर तीसरी चीनी मिल ऐथेनॉल बना रही है, जिसके चलते चीनी का उत्पादन कम हो रहा है। वहीं शुगर मिल मालिकों का कहना है कि गन्ने में रोग लगने और कीटनाशकों का अत्याधिक प्रयोग करने से भी चीनी की रिकवरी कम हो रही है।
सबसे अधिक उपजाऊ गन्ने की वैराइटी में लगा रोगः
गन्ने के उत्पादन में आई इस कमी के पीछे जानकार कई कारण बताते हैं। श्री धर्मेंद्र मलिक बताते हैं कि गन्ने की जो वैराइटी सबसे अधिक उत्पादन देती है, किसान सी की बुवाई सबसे अधिक करते हैं। पिछले कई वर्षों से गन्ने की वैराइटी 0238 को किसान सबसे अधिक बो रहे हैं, जिससे गन्ने के उत्पादन में तेजी से उछाल आया था। पिछले दो-तीन साल से इस वैराइटी में रोग लग चुका है। इसके कारण गन्ने के उत्पादन में यह गिरावट दर्ज की जा रही है और इसके साथ ही अत्याधिक कीटनाशकें का छिड़काव करने से गन्ने की फसल में लागत भी बढ़ी है। अभी तक इस वैराइटी के मुकाबले कोई नई वैराइटी अभी सामने नहीं आई है, जो कि गन्ने का अधिक उत्पादन दे सके।
गाज़ियाबाद के किसान दीपक त्यागी बताते एक प्रमुख कारण हैं। वहीं, गाजियाबाद क्षेत्र में लगातार बिल्डरों के बढ़ते प्रभाव से खेती भी खेती का क्षेत्रफल लगातार कम होता जा रहा है। भारतीय किसान संघ के पूर्व गन्ना संयोंजक श्याम वीर सिंह कहते हैं कि पिछले वर्ष अधिक मात्रा में पानी के भरने से भी गन्ने में रोग का प्रकोप बढ़ा था। किसान भाई गन्ने की जिस वैराइटी को बो रहे थे, अब वही रोग ग्रस्त हो चुकी है। हालांकि रेड रोट रोग के कारण गन्ने की फसल अधिक प्रभावित हो रही है। इसके अलावा टॉप बोरर कीट का प्रकोप भी अधिक देखा जा रहा है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
