स्वाधीनता की कीमत      Publish Date : 31/08/2026

                स्वाधीनता की कीमत

                                                                                                                      प्रो0 आर. एस. सेंगर

स्वतंत्रता दिवस का दिन उन हुतात्माओं को केवल स्मरण करने मात्र का ही नहीं होता है जिनके बलिदान के बाद हमने स्वाधीनता पाई है, बल्कि यह समझने का भी है कि आखिर उनके मन में क्या था? क्यों उन्होंने अपना स्वयं का प्राणोत्सर्ग कर दिया जबकि सामान्यतः मनुष्य अपने स्वार्थ में लगा दिखाई देता है। भारत माता उनके लिए आराध्य देवी थी, जिसकी पूजा में उन्होंने स्वयं को अर्पित कर दिया था।

राष्ट्र का सुख ही उनके जीवन का एक मात्र सुख बन गया। यह संघर्ष कुछ दिनों या कुछ वर्षों का ही नहीं था बल्कि कई पीढ़ियों संघर्ष का था। शताब्दियों तक चलने वाले इस महायज्ञ में अपनी आहुति देने की केवल एक ही शर्त थी वह थी राष्ट्रभक्ति, फिर चाहे वह किसी आयु का हो या जाति पंथ या सम्प्रदाय का और इस बात का कोई फर्क भी नहीं पड़ा। बड़े राज घराने का वारिश या गांव के किसान का बेटा सभी के मन में केवल एक ही इच्छा और तड़पन थी कि हमारी मातृभूमि विदेशी दासता की कंटीली बेड़ियों में जकड़ी हुई है।

यह सोच कर उनका मन व्यथित होता था कि इन बेड़ियों के सभी काँटे विदेशी नहीं थे बल्कि स्वार्थ में लिप्त भारतीय समाज के ही कुछ लोग थे जो अंग्रेजों के एक इशारे पर अपने ही लोगों पर कोड़ों से लेकर बंदूक की गोलियों तक की वर्षा करने में अपनी शान समझते थे।

दीर्घ काल तक कठोर संघर्ष लाखों बलिदान और मातृभूमि के विभाजन के बाद स्वाधीनता प्राप्त हुई है अर्थात बहुत बड़ी कीमत दे कर हमें यह स्वाधीनता मिली है। लाखों लोगों को अपने घर अपनी संपत्ति छोड़ कर सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने को सुरक्षित रखने तथा अपने भविष्य को ढूंढने के लिए पलायन करना पड़ा। अब स्वाधीनता प्राप्ति की चार पीढ़ियां निकल गई हैं, राष्ट्र वैभव के मार्ग पर गतिमान है, अपनी सेनाएँ देश की सीमाओं को अभेद्य बना रही हैं और वैज्ञानिक नित अंतरिक्ष में नए कीर्तिमान लिख रहे हैं।

15 अगस्त 1947 से भारत का स्वर्णिम भविष्य लिखा जाना प्रारंभ हुआ, ईश्वर हमें इतनी सामर्थ्य दे कि हम भी इसमें अपनी भूमिका निभाने का प्रयास मन से कर सकें। ऐसी प्रार्थना के साथ आप सभी देशवासियों को  हमारे चैनल की ओर से स्वाधीनता दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।