
धान में दाने भरते समय नहीं होनी चाहिए जिंक की कमी Publish Date : 31/08/2026
धान में दाने भरते समय नहीं होनी चाहिए जिंक की कमी
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
धान में ज़िंक का प्रयोग केवल उस समय ही करना चाहिए जब फसल या मिट्टी में इसकी कमी हो। ज़िंक की कमी से पौधे की ग्रोथ ठीक से नहीं हो पाती और नई फसलों पर पीले या भूरे धब्बे पड़ जाते हैं। कमी कन्फर्म होने पर, लोकल खेती की सलाह और प्रोडक्ट के निर्देशों के अनुसार ज़िंक का प्रयोग करना चाहिए।
धान में बालियां निकलने और दाने बनने के समय फसल की सही देखभाल बहुत जरूरी होती है। अगर मिट्टी में जिंक की कमी है, तो इसका असर पौधों की बढ़वार, कल्ले और दानों के विकास पर पड़ सकता है। जानें धान में जिंक कब डालें, कौन-से लक्षण पहचानें और स्प्रे करते समय किन बातों का ध्यान रखें। धान की खेती में किसान शुरुआत से ही खाद, पानी और कीट-रोग प्रबंधन पर ध्यान देते हैं। लेकिन फसल जब बालियां निकालने और दाने भरने की अवस्था में पहुंचती है, तब भी खेत की निगरानी कम नहीं करनी चाहिए।
इस समय पौधे को संतुलित पोषण मिलना जरूरी है। खासकर जहां मिट्टी में जिंक की कमी हो, वहां फसल की बढ़वार और उत्पादन पर असर दिखाई दे सकता है। शोध और कृषि विशेषज्ञों की सलाह में भी धान में जिंक प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया गया है। हालांकि एक बात किसान जरूर याद रखें, धान के दाने चमकीले करने के लिए बिना वजह जिंक या कोई दूसरा स्प्रे करना सही तरीका नहीं है। पहले कमी की पहचान करें, फिर आवश्यकता के अनुसार उपचार करें।
धान में जिंक की कमी कैसे पहचानें?
अगर धान की फसल में जिंक की कमी है, तो शुरुआत में पौधों की बढ़वार कमजोर दिखाई दे सकती है। कल्ले कम निकल सकते हैं और नई पत्तियों के आधार के पास पीलापन या भूरे-जंग जैसे धब्बे दिखाई दे सकते हैं। गंभीर कमी की स्थिति में पौधों की ऊंचाई और दानों के विकास पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए खेत में केवल दानों को देखकर फैसला न लें। पौधे की पूरी स्थिति देखें।
किसान खेत में ये बातें जरूर देखें:
- पौधों की बढ़वार कैसी है?
- कल्ले पर्याप्त निकल रहे हैं या नहीं?
- नई पत्तियों पर पीलापन या धब्बे हैं या नहीं?
- पौधे सामान्य से छोटे तो नहीं रह गए?
- खेत में पानी लंबे समय से जमा तो नहीं है?
- मिट्टी में जिंक की कमी की संभावना है या नहीं?
- धान में जिंक का छिड़काव कब करें?
धान में जिंक का इस्तेमाल फसल की अवस्था और कमी के आधार पर करना चाहिए। केवल यह सोचकर स्प्रे न करें कि इससे दाने अपने आप ज्यादा चमकदार हो जाएंगे।
अगर जिंक की कमी की पुष्टि होती है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जिंक सल्फेट या उपयुक्त जिंक उत्पाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ कृषि सिफारिशों में पत्तियों पर 0.5% जिंक सल्फेट के छिड़काव का उल्लेख मिलता है, लेकिन मात्रा और समय स्थानीय सिफारिश तथा इस्तेमाल किए जा रहे उत्पाद के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।
क्या जिंक के स्प्रे से चावल के दाने चमकीले हो जाएंगे?
जिंक कोई ऐसा जादुई स्प्रे नहीं है जो हर खेत में चावल के दानों की चमक बढ़ा दे। इसका फायदा मुख्य रूप से तब होता है जब फसल में जिंक की कमी हो। धान को अच्छी गुणवत्ता तक पहुंचाने में किस्म, मिट्टी, संतुलित पोषण, पानी का प्रबंधन, मौसम और कीट-रोग नियंत्रण जैसे कई कारकों की भूमिका होती है। इसलिए सिर्फ एक स्प्रे पर निर्भर रहने के बजाय पूरी फसल की देखभाल करें।
बालियां निकलने के समय फसल पर रखें खास नजर
- जब धान में बालियां निकलने लगती हैं और दाने बनना शुरू होते हैं, तब किसान को खेत की निगरानी बढ़ा देनी चाहिए।
- इस समय देखें कि पौधों को पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं और कहीं कीट या रोग के लक्षण तो नहीं दिखाई दे रहे हैं।
- अगर किसी पोषक तत्व की कमी का संदेह हो तो बिना सोचे खाद या स्प्रे डालने के बजाय पहले समस्या की पहचान करें।
- सही कारण पता होने पर ही सही उपचार किया जा सकता है।
स्प्रे करते समय मौसम का भी रखें ध्यान
धान में किसी भी पोषक तत्व का छिड़काव करते समय मौसम को नजरअंदाज न करें। तेज धूप में छिड़काव करने से बचें। अगर बारिश की संभावना है तो भी स्प्रे को टालना बेहतर रहता है, क्योंकि बारिश होने पर छिड़काव का असर कम हो सकता है। सुबह या शाम का समय कई परिस्थितियों में बेहतर हो सकता है, लेकिन स्थानीय मौसम और उत्पाद के निर्देशों को जरूर देखें।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
