
गन्ने में रेड रॉट या गन्ने की लाल सड़न रोग से फसल को बचाने के उपाय Publish Date : 31/08/2026
गन्ने में रेड रॉट या गन्ने की लाल सड़न रोग से फसल को बचाने के उपाय
प्रो0 आर. एस. सेंगर डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ने में रेड रॉट से बचाव के लिए सबसे पहले स्वस्थ और रोग-मुक्त बीज गन्ने का चुनाव करें। अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त रोग-सहिष्णु किस्म लगाएं, बुवाई से पहले उचित बीज उपचार करें, खेत में जलभराव न होने दें और संदिग्ध पौधों की नियमित जांच करें।
गन्ने की फसल में रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग किसानों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। बीमारी बढ़ने पर गन्ने के अंदर का हिस्सा लाल पड़ने लगता है और पौधे की बढ़वार व उपज पर असर पड़ सकता है। इसलिए बीमारी दिखने के बाद उपाय करने से बेहतर है कि बुवाई से पहले ही स्वस्थ बीज और सही बीज उपचार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
गन्ने में रेड रॉट की पहचान कैसे करें?
रेड रॉट एक फफूंदजनित रोग है। शुरुआत में खेत में कुछ पौधे कमजोर या असामान्य दिखाई दे सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर गन्ने को बीच से काटने पर अंदर का हिस्सा लाल या लाल-भूरे रंग का दिखाई दे सकता है। कई बार लाल हिस्से में हल्की या सफेद धारियां भी नजर आती हैं।
अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो पौधे को सामान्य मानकर खेत में छोड़ने के बजाय उसकी जांच कराएं। समय पर पहचान होने से बीमारी के प्रबंधन की योजना बनाना आसान होता है।
सबसे पहले स्वस्थ बीज गन्ने का चुनाव करें
रेड रॉट से बचाव की शुरुआत बीज गन्ने के चुनाव से होती है। जिस खेत में पहले रोग दिखाई दे चुका हो, वहां से बीज गन्ना लेकर अगली फसल लगाना जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए किसान ऐसे खेत से ही बीज लें जहां फसल स्वस्थ रही हो। ICAR भी गन्ने के लिए रोग-मुक्त और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री पर जोर देता है।
अगर आपके इलाके में रेड रॉट की समस्या ज्यादा है तो स्थानीय रूप से अनुशंसित रोग-सहिष्णु या रोगरोधी किस्म चुनने के लिए कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या चीनी मिल के कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। हर क्षेत्र के लिए एक ही किस्म उपयुक्त नहीं होती।
बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें
गन्ने के टुकड़ों को बिना उपचार किए सीधे खेत में लगाने के बजाय बीज उपचार करना बेहतर रहता है। इससे बीज के साथ रोग के खेत में पहुंचने का जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
कार्बेंडाजिम और थायोफेनेट मिथाइल जैसे फफूंदनाशकों का उपयोग गन्ने के बीज उपचार में किया जाता है। हालांकि, दवा की मात्रा और उपचार का समय उत्पाद के लेबल तथा स्थानीय कृषि सिफारिश के अनुसार ही रखें। बिना सलाह के मात्रा बढ़ाना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
ICAR–IISR ने रेड रॉट के प्रबंधन में स्वस्थ रोपण सामग्री के साथ गर्म पानी या थायोफेनेट मिथाइल से सेट उपचार जैसी विधियों की उपयोगिता पर भी जोर दिया है।
गर्म पानी से बीज उपचार भी उपयोगी तरीका
कुछ मामलों में रोग का कारक बीज गन्ने के अंदर मौजूद हो सकता है। ऐसे में गर्म पानी से बीज उपचार रोग प्रबंधन का एक वैज्ञानिक तरीका है।
अलग-अलग सिफारिशों में तापमान और उपचार की अवधि अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, कुछ कृषि सिफारिशों में 52°C पर 30 मिनट उपचार बताया गया है, जबकि शोध में अन्य तापमान-अवधियों के संयोजन भी इस्तेमाल किए गए हैं।
इसलिए किसान सिर्फ तापमान देखकर खुद से उपचार न करें। तापमान और समय दोनों सही रखना जरूरी है, क्योंकि गलत तापमान या ज्यादा देर तक उपचार करने से बीज की अंकुरण क्षमता प्रभावित हो सकती है।
खेत में जलभराव न होने दें
रेड रॉट के प्रबंधन में खेत की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। जहां पानी लंबे समय तक जमा रहता है, वहां रोग प्रबंधन और फसल की सेहत दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए खेत में अच्छी जल निकासी रखें और जहां बार-बार पानी भरता है वहां निकासी की व्यवस्था में करें।
बीमारी दिखे तो प्रभावित पौधे को नजरअंदाज न करें
अगर खेत में कुछ पौधे बाकी गन्ने की तुलना में कमजोर दिखाई दे रहे हैं तो उन्हें ध्यान से देखें। संदिग्ध पौधे को काटकर अंदर का हिस्सा जांचा जा सकता है।
अगर अंदर लाल-भूरे रंग की सड़न जैसे लक्षण दिखाई दें तो प्रभावित पौधों को खेत में यूं ही छोड़ना ठीक नहीं है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर संक्रमित पौधों को हटाने और नष्ट करने की व्यवस्था करें।
रेड रॉट वाले खेत में अगली फसल के लिए भी सावधानी जरूरी है। संक्रमित फसल की रैटून फसल लेने से बचने और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी जाती है।
लगातार एक ही किस्म पर निर्भर न रहें
अगर किसी क्षेत्र में किसी खास गन्ने की किस्म में रेड रॉट का खतरा ज्यादा देखा जा रहा है तो किसान को वैकल्पिक अनुशंसित किस्मों की जानकारी लेनी चाहिए।
ICAR ने भी गन्ने की कुछ लोकप्रिय किस्मों में रेड रॉट की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई है और बेहतर विकल्प विकसित करने की जरूरत बताई है।
इसलिए केवल ज्यादा उपज वाली किस्म देखकर बीज न चुनें। उपज के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता और आपके क्षेत्र की अनुकूलता भी देखें।
रेड रॉट से बचाव के लिए किसान ये काम जरूर करें
बुवाई से पहले:
- स्वस्थ और रोग-मुक्त खेत से बीज गन्ना लें।
- रेड रॉट वाले खेत से बीज न लें।
- अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म चुनें।
- बीज गन्ने का उचित उपचार करें।
- गर्म पानी उपचार विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
- खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखें।
फसल के दौरान:
- खेत की नियमित निगरानी करें।
- संदिग्ध पौधों को तुरंत जांच करें।
- संक्रमित पौधों को खेत में न छोड़ें।
- रेड रॉट प्रभावित फसल की रैटून लेने से बचें।
- जरूरत के अनुसार फसल चक्र अपनाएं।
किसान के लिए सीधी बात
रेड रॉट का इंतजार करके इलाज करने के बजाय शुरुआत से ही बचाव करना ज्यादा समझदारी है।
स्वस्थ बीज गन्ना, सही किस्म, उचित बीज उपचार, अच्छी जल निकासी और खेत की नियमित निगरानीक आदि यह सभी कदम मिलकर गन्ने में रेड रॉट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसान भाई, किसी भी फफूंदनाशक की मात्रा या गर्म पानी उपचार की विधि अपने आप तय न करें। अपने क्षेत्र की कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के निर्देश के अनुसार ही उपचार करें।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
