
जायफल के फायदे, नुकसान व उपयोग Publish Date : 23/08/2026
जायफल के फायदे, नुकसान व उपयोग
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
पुरुषों को जायफल के बारे में शायद अधिक जानकारी ना हो, लेकिन महिलाएं जायफल के बारे में जरूर जानती होंगी। जायफल का इस्तेमाल अनेक अवसर पर किया जाता है। कभी मसाले के रूप में तो कभी बच्चों की मालिश करने के लिए। जायफल के तेल का उपयोग साबुन बनाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में जायफल के फायदे से संबंधित बहुत सारी जानकारी दी गई है।
पतंजलि के अनुसार, जायफल का प्रयोग शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। रोगी जायफल का इस्तेमाल कर अपनी बीमारी की रोकथाम कर सकता है। कई बीमारियों का उपचार कर सकता है। इसके अलावा बच्चों के लिए भी जायफल के अनेक फायदे बताए गए हैं। आइए जायफल से होने वाले सभी लाभ के बारे में जानकारी लेते हैं।
जायफल क्या है?
जायफल एक प्रकार की जड़ी-बूटी है, जिसका प्रयोग मसाले के रूप में होता है। इसकी दो प्रजातियां होती हैं:-
जंगली जायफल
जायफल का वृक्ष हमेशा हरा रहने वाला और सुगन्धित होता है। वृक्ष के तने शयामले रंग के होते हैं, जिसमें बाहर छिद्र होता है। अन्दर लाल रंग के द्रव्य होते हैं। इसके पत्ते लम्बे और भालाकार होते हैं। इसके फूल छोटे-छोटे, सुगंधित और पीले-सफेद रंग के होते हैं। यह गोलाकार, अण्डाकार लाल और पीला रंग का होता है। फल पकने पर दो भागों में फट जाता है, जिसमें से जायफल निकलता है।
जायफल को चारों ओर से घेरे हुए लाल रंग का कड़ा मांसल कवच होता है, जिसे जावित्री‘ कहते हैं। यह सूखने पर अलग हो जाता है। इसी जावित्री के अन्दर जायफल होता है। यह अण्डाकार, गोल और बाहर से शमायला रंग का सिकुड़ा हुआ और तीव्र गन्धयुक्त होता है।
जायफल से प्राप्त लाभ
जायफल के औषधीय प्रयोग का तरीका, मात्रा एवं विधियां-
बाल रोग में उपयोगी जायफल का सेवन
जायफल और मायाफल के बराबर-बराबर चूर्ण को धीमी आग पर भून लें। इसमें बारह भाग मिश्री मिला लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह दूध के साथ बच्चों को सेवन कराएं। इससे बच्चों के बल की वृद्धि होती है। बच्चों के रोगों ठीक होते हैं।
स्तनपान बंद (बच्चों को दूध पीना छुड़ाने) करने के लिए जायफल का प्रयोग
ऐसा प्रायः देखा जाता है कि माताएं जब छोटे बच्चों को दूध पीना छुड़ाना चाहती हैं तो बच्चे आसानी से दूध नहीं छोड़ते हैं। ऐसी स्थिति में जायफल आपके काम आ सकता है। बच्चों को दूध पीना छुड़ाने के लिए जायफल का प्रयोग करना चाहिए। यह लाभ देता है। उपयोग के बारे में किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर पूछ लें।
सेक्सुअल पॉवर (पुरुषत्व या मर्दाना ताकत) बढ़ाने में जायफल के लाभ
कई लोगों को सेक्सुअल पॉवर की कमी होने की शिकायत रहती है। ऐसे लोग पुरुषत्व (मर्दाना ताकत) को बढ़ाने के लिए जायफल का इस्तेमाल कर सकते हैं। जायफल, अकरकरा, जायफल, जावित्री, इलायची, कस्तूरी और केसर को दूध में पका लें। इस दूध में मिश्री मिलाकर पिएं। इससे पौरुष शक्ति (पुरुषत्व) की वृद्धि होती है।
मुंह के छाले की समस्या में जायफल का उपयोग
मुंह के छाले को ठीक करने के लिए ताजे जायफल के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
चेहरे के दाग-धब्बों (झाईयां) में जायफल के लाभ
जायफल को पीसकर शहद मिला लें। इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग और धब्बे मिट जाते हैं। जावित्री और जायफल के बारीक चूर्ण को पानी में घोलकर लेप करने से चेहरे की झाईयाँ मिट जाती हैं।
बिवाई (हाथ-पैर की त्वचा के फटने) में जायफल से लाभ
प्रायः सर्दी के मौसम में हाथों और पैरों की त्वचा फट जाया करती है। इसमें जायफल को जल में घिसकर पैरों में लेप करें। इससे बिवाइयां ठीक हो जाती हैं।
त्वचा रोग में जायफल से लाभ
जायफल के तेल की मालिश करने से त्वचा संबंधित रोग दूर होता है। आप बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जायफल के उपयोग की जानकारी ले सकते हैं।
मुंह से बदबू आने पर जायफल से लाभ
बराबर-बराबर भाग में कूठ, कमल, जावित्री और जायफल के चूर्ण बना लें। इसकी 500 मिग्रा की गोली बनाकर चूसें। इससे मुंह से दुर्गंध आने की परेशानी ठीक हो जाती है।
दांत दर्द में फायदेमंद जायफल का उपयोग
जायफल के तेल में भिगोयी हुई रूई के फाहे को दांतों में रखें। आपको दांत में दबाकर रखना है। इससे दांत के दर्द से आराम मिलता है।
माइग्रेन (आधासीसी) में जायफल का उपयोग लाभदायक
जायफल के छिलके को वनफ्सा के तेल में पीस लें। इसे 1-2 बूंद नाक में डालने से आधासीसी (अधकपारी) के दर्द में आराम मिलता है।
सिर दर्द में जायफल के औषधीय गुण से लाभ
जायफल का उपयोग सिरदर्द में भी बहुत ही फायदेमद होता है। जायफल को पानी में घिसकर सिर पर लगाएं। इससे सिर दर्द ठीक होता है।
कान के रोग में जायफल के औधषीय गुण से फायदे
जायफल को पीसकर कान के पीछे उसका लेप करने से कान का दर्द और सूजन ठीक होता है। जायफल को तेल में उबालकर छान लें। इसे 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालने से कान की बीमारी ठीक होती है।
खांसी में जायफल प्राप्त लाभ
खांसी का इलाज करने के लिए 500 मिग्रा जातिफलादि चूर्ण में मधु (शहद) मिलाकर सेवन करें। इससे खांसी, साँस का फूलना, भूख ना लगना, टीबी की बीमारी, और वात-कफ विकार के कारण होने वाली सर्दी-जुकाम में फायदा होता है।
अधिक प्यास लगने की परेशानी में जायफल का उपयोग
जायफल को रात भर ठंडे पानी में डूबो कर रखें। सुबह 5-10 मिली मात्रा में इस पानी को पिलाने से अत्यधिक प्यास लगने की समस्या ठीक होती है।
भूख बढ़ाने के लिए जायफल का प्रयोग
बराबर-बराबर भाग में कंकोल, देवदार, दालचीनी, सेंधा नमक, बेल, मरिच, जायफल, जीरक-द्वय और जावित्री लें। इनका बारीक चूर्ण कर लें। इसमें मातुलुंग नींबू का रस मिलाकर 250 मिग्रा की गोलियाँ बना लें। इसका सेवन करने से अरुचि (भूख का बढ़ना) और दस्त की परेशानी ठीक होती है। जायफल को पानी में घिसकर पिलाने से जी मिचलाने की समस्या से साहत मिलती है।
पाचनतंत्र विकार में जायफल से लाभ
500 मिग्रा जायफल के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है। बराबर-बराबर भाग में जायफल, जौ, नागरमोथा और बेल के चूर्ण (1-3 ग्राम) को छाछ के साथ सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, और ग्रहणी रोग में लाभ होता है।
पेट के रोग में जायफल के फायदे
पेट की बीमारी में 1-2 जातिफलादि वटी का सुबह और शाम सेवन करें। इससे पेट की बीमारी में लाभ होता है। पेट दर्द की परेशानी में 1-2 बूंद जायफल तेल को बताशे में डालकर खिलाएं। इससे पेट दर्द से आराम मिलता है।
दस्त पर रोक लगाने के लिए जायफल का उपयोग
बराबर-बराबर भाग में जायफल और सोंठ (500 मिग्रा) लें। इसे जल में घिसकर सेवन करने से दस्त ठीक हो जाता है। इस दौरान स्वस्थ भोजन करना जरूरी है। दस्त पर रोक लगाने के लिए जायफल को घिसकर नाभि में लेप करें। इससे दस्त की गंभीर बीमारी भी तुरंत ठीक हो जाती है। दस्त को ठीक करने के लिए जायफल, लौंग, सफेद जीरा और सुहागा के 1 ग्राम चूर्ण में मधु और मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे दस्त की गंभीर बीमारी ठीक हो जाती है।
इसी तरह 1-2 जातीफलादि वटी को सुबह और शाम छाछ के साथ सेवन करने से सभी तरह के दस्त ठीक हो जाते हैं। 500 मिग्रा जायफल चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से पेट की गैस और दस्त की समस्या से आराम मिलता है। उल्टी और दस्त की बीमारी में 500 मिग्रा जायफल के चूर्ण में घी और खांड मिलाकर चाटें, इससे लाभ प्राप्त होता है।
लकवा (पक्षाघात) में जायफल के लाभ
लकवे की बीमारी में भी जायफल का फायदा लिया जा सकता है। जायफल को मुंह में रखकर चूसने से लकवा रोग में लाभ होता है।
जायफल का प्रयोग कर गठिया का उपचार
जायफल या जावित्री तेल को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ों के दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे जकड़न, मोच, गठिया, लकवा में लाभ होता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
