
फोबिया कितने प्रकार के होते हैं? क्या हर डर का इलाज संभव है? Publish Date : 23/08/2026
फोबिया कितने प्रकार के होते हैं? क्या हर डर का इलाज संभव है?
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
हममें से कोई ऊंचाई से डरता है तो कोई पानी से, इसके अलावा भी ऐसे ही और भी कई तरह के डर होते हैं जो व्यक्ति के दिमाग में बैठे होते हैं। तो आइए आज हम आपको अपनी इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अलग-अलग प्रकार के फोबिया के बारे में तमाम जानकारी प्रदान करते हैं।
बचपन से ही बच्चे के मन में कुछ चीजों को लेकर डर बिठाया जाता है, जिसका सिर्फ एक मकसद होता है और वह है बच्चे को गलत काम करने से रोकना। जैसे माताओं का कहना कि पुलिस पकड़कर ले जाएगी या फिर पानी में मत जाओ वरना डूब जाओगे आदि-आदि। डर से हमारी पहली मुलाकात बहुत छोटी उम्र में ही हो जाती है, जब हमें इसके बारे में कुछ भी नहीं पता होता है। अंधेरा, तेज आवाज, किसी का अचानक सामने आ जाना- शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। यह सामान्य है, और जरूरी भी।
साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि हर डर सामान्य नहीं होता है। कई बार लोग मुझे कहते हैं ‘डॉक्टर, मुझे पता है कि इसमें डरने जैसा कुछ नहीं है, लेकिन फिर भी मैं रुक जाता/जाती हूं। यहीं से बात थोड़ी बदल जाती है।’ ऐसा एक नहीं बल्कि कई केस आते हैं जो किसी ने कभी सोचे भी नहीं होंगे। आइए आपको हम इस विषय पर विस्तार से बताते हैं।
असलियत में क्या है फोबिया?
फोबिया को आप ऐसे समझ सकते हैं कि यह डर का ऐसा रूप् होता है, जो किसी तर्क से नहीं चलता। यानी कि आप जानते हैं कि यह चीज सुरक्षित है, फिर भी शरीर मानने को तैयार नहीं होता। ऐसी स्थिति में दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांसों की गति बदल जाती है और मन एक ही काम करता है- और वह उस स्थिति से दूर भागना चाहता है। समस्या डर में नहीं है। समस्या यह है कि वह आपको जीने से रोकने लगती है।
फोबिया कितने प्रकार के होते हैं?
डॉक्टर कहते हैं कि अगर बहुत सीधा जवाब दें, तो इसे तीन तरह से समझा जा सकता है- लेकिन यह सिर्फ समझने के लिए है, असल जिंदगी इससे कहीं अधिक मिश्रित होती है।
1. किसी खास चीज या स्थिति से डर लगना
हर किसी को किसी खास चीज या स्थिति से डर लग सकता है। जैसे ऊंचाई, पानी, जानवर, खून, उड़ान या बंद जगह। कई बार इसके पीछे कोई पुराना अनुभव होता है, कई बार सिर्फ दिमाग का बना हुआ डर।
2. लोगों के बीच होने का डर
यह सिर्फ शर्मीलापन नहीं है। यह वह स्थिति है जब व्यक्ति लगातार सोचता रहता है- ‘मैं गलत लगूंगा/लगूंगा’, ‘लोग मुझे जज करेंगे।’ धीरे-धीरे वह मौके छोड़ने लगता है।
3. ऐसी जगहों का डर जहां से निकलना मुश्किल लगे
भीड़, बाजार, या अकेले बाहर जाना। यहाँ डर “जगह” से कम और “अगर कुछ हुआ तो?” वाली सोच से ज्यादा जुड़ा होता है।
क्या हर डर का इलाज संभव है?
इसका जवाब सीधा है- ज्यादातर मामलों में हां, लेकिन यह समय लेता है। इलाज का मतलब यह नहीं कि डर पूरी तरह गायब हो जाएगा। बल्कि यह कि डर अब आपके फैसले नहीं करेगा।
फोबिया का इलाज कैसे होता है?
फोबिया या किसी भी डर को ठीक करने के लिए व्यक्ति को दो तरह की थेरेपी दी जाती है। पहली थेरेपी में यह समझना होता है कि डर कहां से आ रहा है। वहीं दूसरी थेरेपी में धीरे-धीरे उससे भागना बंद करना आता है। व्यक्ति को उस चीज का सामना कराया जाता है जिससे वह डरता है- एकदम नहीं, धीरे-धीरे।
जैसे कभी सिर्फ सोच में, कभी तस्वीर के जरिए और फिर कभी असल में। और हर बार दिमाग को नया अनुभव मिलता है- कि हर बार खतरा उतना बड़ा नहीं है जितना वह मान रहा था।
साइकोलॉजिस्ट ने शेयर की फोबिया से जुड़ी जरूरी बात
फोबिया में सबसे बड़ा नुकसान डर नहीं करता, बल्कि उससे बचना करता है। आप जितना अधिक इससे बचते हैं, आपका डर भी उतना ही मजबूत होता जाता है। यानी कि जब हमारा डर हमारे सामने होता है तो उससे बचने के लिए हर वो तरीका अपनाते हैं जो कि उस समय संभव हो पाता है। इस दौरान हम खुद को व सामने वालों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कब मदद लेनी चाहिए?
अक्सर लोग अपने डर से अकेले ही लड़ते हैं, लेकिन किसी से भी मदद नहीं लेते हैं। लेकिन जब आपके मन में आए कि आपको अपने इस पुराने डर से बाहर निकलना है और बगैर डरे जीना है तो किसी से मदद लेने का फैसला करें। जब आपके मन में यह बिल्कुल न आए कि ‘डर लगेगा’, तब यह संकेत है कि डर को समझने की कोशिश कर रहे है।
निष्कर्ष
सबसे पहले यह समझें कि किसी चीज से डर होना समस्या नहीं है, लेकिन जब यह आपके जीवन को प्रभावित करने लगे तो परेशानी वाली बात बन जाती है। डर के कारण जीवन छोटा हो जाना समस्या है और अच्छी बात यह है इसे बदला जा सकता है, धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से, और यह अपने आपमें सत्य है।
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
