कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ ने विकसित की अपनी प्रथम गेहूँ की प्रजाति      Publish Date : 23/08/2026

कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ ने विकसित की अपनी प्रथम गेहूँ की प्रजाति

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ की गेहूँ की वैरायटी एसबीडब्लू 2202 (सरदार समृद्धि) को वैरायटल आइडिंटीफिकेशन कमेटी (वी0आई0सी0) द्वारा सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी (सी0वी0आर0सी0) से रिलीज (विमोचन) हेतु आइडेंटिफाई (चिंहित) किया गया है। इस वैरायटी का आईडेंटिफिकेशन वैरायटल आइडिंटीफिकेशन कमेटी (वी0आई0सी0) द्वारा 65वीं अखिल भारतीय गेहूँ एवं जौ शोधकर्त्ताओं की वार्षिक कार्यशाला जो दिनाँक 18-20 अगस्त, 2026 को आचार्य श्री नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के जयपुर, राजस्थान के परिसर में हुआ है। यह विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एवं रिलीज होने वाली गेहूँ की प्रथम प्रजाति होगी। माननीय कुलपति डॉ0 त्रिवेणी दत्त जी के मार्ग निर्देशन में विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के अंतर्गत संचालित गेहूँ अनुसंधान कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि है।

इस प्रजाति का विकास डॉ0 लोकेश कुमार गंगवार, प्राध्यापक आनुवंशिकी एवं प्रादप प्रजनन विभाग द्वारा किया गया है। इस उपलब्धि के लिये माननीय कुलपति डॉ0 त्रिवेणी दत्त, डॉ0 कमल खिलाड़ी, निदेशक शोध एवं कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, समस्त अधिष्ठाताओं, निदेशकों, समस्त शिक्षकों एवं शिक्षेणत्तर स्टाफ द्वारा हर्ष व्यक्त करते हुए डॉ0 लोकेश कुमार गंगवार को बधाई दी गयी। विष्वविद्यालय में माननीय कुलपति महोदय के निर्देशन में शोध निदेशालय के अंतर्गत जी0पी0बी0 विभाग द्वारा गेहूँ व अन्य फसलों पर शोध कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं।

इस प्रजाति का वर्ष 2023-24 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ एवं जौ अनुसंधान परियोजना (एक्रिप) के अंतर्गत विभिन्न शोध केन्द्रों पर आयोजित वैरायटल परीक्षण में मानक प्रजातियों की तुलना में उपज, प्रमुख रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोधक क्षमता तथा गुणवत्ता के आधार पर वैरायटल आईडेंटिफिकेशन कमेटी के द्वारा विमोचन (रिलीज) किये जाने हेतु आईडेंटिफिकेशन किया गया है। माननीय कुलपति डॉ0 त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के द्वारा शिक्षा, शोध एवं प्रसार के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन नये-नये आयामों को स्थापित किया जा रहा है।

यह प्रजाति उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में सिंचित दशा में विलम्ब से बुवाई हेतु रिलीज होगी। इस प्रजाति की प्रमुख विशेषता यह है कि उच्च उपज के साथ इसमें भूरे एवं पीले रतुआ रोगों के लिये उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता है साथ ही उच्च गुणवत्ता भी है। इसकी औसत उपज 45.0 कुन्तल प्रति हैक्टेयर तथा अधिकतम उपज क्षमता  64.8 कुन्तल प्रति हैक्टेयर होगी। इसके पौधों की औसत ऊँचाई 100 सें.मी., परिपक्वता अवधि 109 दिन एवं इसकी बाली का रंग भूरा है।

यह प्रजाति चपाती एवं बिस्किट दोनों के लिये ही उपयुक्त है इसके साथ ही इस प्रजाति में प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा एवं इसके दाने आकर्षक हैं। इसमें अधिक उपज के साथ प्रमुख रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोधकता, आकर्षक दाना गुणवत्ता एवं बेहतर प्रसंस्करण गुणों वाली यह प्रजाति उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिये एक बेहतर एवं लाभकारी विकल्प होगी। उक्त प्रजाति के रिलीज एवं नोटिफिकेशन के बाद इसका बीज किसानों को आगामी सीजन रबी 2027-28 से उपलब्ध होना प्रारम्भ हो जायेगा।