पारंपरिक कृषि विकास से होगा शुद्ध खाद्य उत्पाद      Publish Date : 06/08/2026

पारंपरिक कृषि विकास से होगा शुद्ध खाद्य उत्पाद

पारंपरिक कृषि विकास से होग शुद्ध खाद्य उत्पाद - प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धति से अनाज, फल सब्जियों को मनुष्य के आहार में शामिल करने के साथ-साथ इन उत्पादों को भी शामिल करना चाहिए। संभावित संभावनाओं को तलाशने के लिए एवं जैविक प्राकृतिक खेती में हमें सामूहिक काम करना होगा। यह बात है कृषि विशेषज्ञ एवं सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रो0 आर. एस. सेंगर ने कही है।

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत कार्यशाला का आयोजन किया जाता रहता है। इस योजना में प्रदेश में मोटर साइकिल सवारों को शामिल किया गया है। इन सार्जेंट में निजी संस्थाएं (सर्विस प्रोवाइडर) विभाग के साथ मिलकर संचालित कर रही है। वर्कशॉप एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से प्रेजेंटेशन यूनाइटेड बिल्डर्स एग्रीकल्चरल इंजीनियर श्री शिव कुमार सिंह, उप-अध्यक्ष कृषि श्री विजय बजाज धार, श्री नगीन सिंह रावत, श्री शिव सिंह राजपूत, श्री साकेत मोदी, श्री आर एल जामरे, श्री सचिन जैन, श्री नितेश कुमार यादव, श्री कैलाश, श्री अश्विनी झा, श्री रविकांत मांझी, श्री अनंत नारायण, श्री मोहन रेड्डी, सहायक विक्रेता कृषि में श्री विशाल पाठक रॉयटर्स, डॉ. एल. के. मोहनिया, श्री गोपेश पाठक, श्री पी एस कोरिया, श्री शांतिलाल अख्तर, श्री संतोष मौर्य, श्री विलाश पाटिल, क्रिप्स के श्री सचिन मठ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।