सर्पगंधा की खेती करने के वैज्ञानिक तरीके      Publish Date : 13/05/2026

         सर्पगंधा की खेती करने के वैज्ञानिक तरीके

                                                                                                        प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॅ0 रेशु चौधरी  

सर्पगंधा एक ऐसी फसल है जिसमें मेहनत कम लगती है, इसे पानी भी कम मात्रा में चाहिए और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में हमारे कृषि वैज्ञानिक डॉ0 राकेश सिंह सेंगर आपको जानकारी दे रहे हैं इसकी खेती का वैज्ञानिक तरीका-

आज के समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान से उतना मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। इसी के चलते किसान भी अब वैकल्पिक और लाभ प्रदान करने वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। इन्हीं फसलों में से एक फसल है सर्पगंधा की खेती है, जो एक औषधीय पौधा है और अब धीरे-धीरे यह किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। सर्पगंधा एक ऐसी फसल है जिसमें मेहनत कम लगती है, पानी भी कम चाहिए और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। यही कारण है कि कई किसान इसे कम लागत, और अधिक लाभ देने वाली फसल मान रहे हैं। ऐसे में आइए अब अपने कृषि वैज्ञानिक से जानते हैं कि अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सर्पगंधा की खेती कैसे करें।

सर्पगंधा क्या है?

                                 

सर्पगंधा एक औषधीय पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Rauvolfia serpentina है। इसकी सबसे जरूरी चीज इसकी जड़ें होती हैं, जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाइयां बनाने के लिए की जाती हैं। इसका यूज मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशन (BP), तनाव और चिंता, अनिद्रा और मानसिक कमजोरी जैसी समस्याओं में किया जाता है। दवा कंपनियों में सदैव ही इसकी बहुत मांग रहती है, इसलिए इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

सर्पगंधा की खेती कैसे करें?

सर्पगंधा की खेती के लिए बहुत ज्यादा गर्मी या सर्दी ठीक नहीं होती है। इसकी खेती के लिए हल्का गर्म और नम मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। यह पौधा हल्की छाया में बेहतर तरीके से बढ़ता है। बहुत तेज धूप में इसकी ग्रोथ कम हो जाती है, जिन क्षेत्रों में 1000 से 1800 मिमी तक वर्षा होती है, वहां इसकी खेती अच्छे तरीके से की जा सकती है।

सर्पगंधा की खेती के लिए कैसी मिट्टी होनी चाहिए?

सर्पगंधा की खेती के लिए मिट्टी का उचित चयन करना बहुत जरूरी है। इसके लिए हल्की या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। वहीं रेतीली दोमट मिट्टी भी ठीक रहती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। साथ ही मिट्टी का पीएच लगभग 6 से 7.5 के बीच हो तो इसका बेहतर उत्पादन मिलता है।

खेती की शुरुआत कैसे करें?

                                      

सर्पगंधा की खेती दो तरीकों से की जा सकती है। जिसमें पहला तरीका बीज से नर्सरी तैयार करना है। इस विधि में सर्पगंधा के बीज को 24 घंटे पानी में भिगोकर बोया जाता है। इसके बाद जून-जुलाई में नर्सरी तैयार की जाती है और 45 से 60 दिनों में पौधे मुख्य खेत में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। वहीं दूसरा तरीका पौधों की रोपाई का होता है। इस विधि में एक हेक्टेयर में लगभग 40,000 से 50,000 पौधे लगाए जाते हैं और पौधों के बीच 45 से 60 सेमी की दूरी बनाकर रखी जाती है।

सिंचाई और देखभाल कैसे करें?

सर्पगंधा की फसल ज्यादा पानी नहीं मांगती है। इसके लिए बारिश के मौसम में अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। गर्मियों में 15-20 दिन के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि खेत में पानी का ठहराव नहीं चाहिए। वहीं शुरुआती 3 महीनों में 2-3 बार निराई-गुड़ाई करना भी जरूरी है। इसके अलावा कीट लगने पर नीम तेल या जैविक घोल का प्रयोग करना उचित रहता है।

फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?

सर्पगंधा की फसल तैयार होने में लगभग 18 से 24 महीने (1.5 से 2 साल) का समय लगता है। जब पौधे की जड़ें मोटी और मजबूत हो जाएं, तब इसकी खुदाई की जाती है। इसके पौधों को जड़ों सहित उखाड़ लिया जाता है। जड़ों को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है और फिर इन्हें छांव में सुखा लिया जाता है। सूखने के बाद इन्हें बाजार में बेचा जाता है या कंपनियों को दिया जाता है।

उत्पादन और कमाई कितनी हो सकती है?

इसके एक हेक्टेयर में लगभग 8 से 30 क्विंटल सूखी जड़ मिल सकती है। वहीं बाजार में इसकी कीमत लगभग 450 से 700 प्रति किलो तक रहती है। ऐसे में एक हेक्टेयर से लगभग 4 लाख से 6 लाख रुपये या उससे ज्यादा की कमाई हो सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।