ईमानदारी से पाएं कामयाबी की राह      Publish Date : 19/04/2026

     ईमानदारी से पाएं कामयाबी की राह

                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

एक गांव में एक किसान रहता था, जो हलवाई को रोजाना एक किलोधाम मक्खन बेचा करता था। एक दिन हलवाई ने मक्खन का चमन करने की सोची। जम हलवाई ने मक्खन तोला तो यह वजन से कम निकला। हलवाई ने कोत कोल से किसान की शिकायत कर दी। कोतवाल के यहां दोनों को हाजिरी लगरी। कोतवाल ने किसान से पूछा कि वह हलवाई की मक्खन तोलकर देता है या नहीं।

इस पर किसान ने जवाब दिया, 'मेरे पास माप का अच्छा इंतजाम नहीं है। इस पर कोतवाल ने पूछा तो फिर तुम मक्खन का वजन कैसे लेते हो ? इस पर किसान ने जवाब दिया, 'जब से हलवाई ने मुझसे मक्खन खरीदना शुरू किया है, उससे पहले से मैं इससे यही खरीद रहा हूं। मेरे पास एक तराजू है। रोकडलयाई मुझे जितने वजन का दही देता है, मैं उसे उतने ही पनन का मक्खन दे देता हूं, इसलिए अगर कोई गलते है ती वह हलवाई है।' कहानी का मजमून यह है कि हम जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं, हमें भी बदले में वैसा ही मिलता है।

गौर करें

वर्कप्लेस में लोग बेईमानी और झूठ के सहारे दूसरों की सवि खराब करने और अपने नंबर बढ़ाने कर प्रयास करते है, लेकिन देर-सवेर सच सबके सामने आ ही जाता है। इसलिए ऐसे शॉर्टकट छोड़े। अच्छाई और ईमानदारी की राह पर चलकर आप न सिर्फ अपनी अमित की आप छोड़ सकते हैं कि दूसरों के लिए भी एक अच्छा उद्याहरण पेश कर सकते हैं।

                                 

ईमानदानी की राह पर चलते हुए आप आत्मविश्वा से भरे होंगे और सकाशाक माहौल में करेंगे। व्यर्थ की शंकाएं भी मन में नहीं आएगी। साथ ही सहकर्मियों के साथ अच्वहार करेंगे तो ऑफिस में आपकी छवि एक जिम्मेद्या और भरोसेमंद कर्मी की होगी। आपकी प्रोफेशनल कामका यह एक महत्वपूर्ण पहलू है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।