भारत की चेतना का जागरण      Publish Date : 19/04/2026

           भारत की चेतना का जागरण

                                                                                                            प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत अपनी संपूर्ण स्वतंत्रता के लिए सदैव प्रयासरत रहा है। श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, महर्षि अरविंद, बाल गंगाधर तिलक और डॉक्टर हेडगेवार के प्रयास केवल राजनीतिक स्वाधीनता के ही नहीं थे बल्कि भारत को उसके मूल स्वरूप में स्थापित करने के थे।

1916 में महान राष्ट्रभक्त क्रांतिकारी और राजनेता पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। जिसका उद्देश्य हिंदू शास्त्रों का संरक्षण और अध्ययन जो पूरे संसार के लिए उपयोगी होगा, स्वदेशी उद्योगों को बढ़ाने तथा धर्म और नैतिकता से युक्त युवकों को तैयार करने वाले विद्यापीठ के रूप में प्रतिस्थापित होना था । 1926 में गोरखपुर में प्रारंभ हुआ गीता प्रेस जो प्रारंभ में स्वतंत्रता सेनानियों के विचार के प्रवाह का माध्यम बना लेकिन आगे चलकर भारत के शाश्वत विचारों को संरक्षित करने वाला संस्थान बन गया।

                             

1925 में प्रारंभ होने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू विचारों से पोषित आदर्श मनुष्य समाज बनाने की दिशा में प्रयासरत है। उपरोक्त सभी में एक बात साझी है वह यह कि सभी महापुरुषों के प्रयास भारत को शक्तिशाली संगठित और स्वाभिमानी बनाने के लिए हिंदू विचारों को ही आधार बनाया गया है। आज भी भारत को संगठित और शक्तिशाली देखने की आकांक्षा रखने वाले लोग वही हैं जो स्वयं को भारत की हिंदू परंपरा और हिन्दू दर्शन का संवाहक मानते हैं।

भारत के वैभव की पुनर्स्थापना के लिए अपने स्वधर्म अपनी संस्कृति का गौरवगान करने वाला समाज बनाना होगा और वह समाज हिंदू चेतना से युक्त होगा। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।