चोटी बेधक कीट के सम्बन्ध में किसान भाईयों को महत्वपूर्ण जानकारी      Publish Date : 18/04/2026

चोटी बेधक कीट के सम्बन्ध में किसान भाईयों को महत्वपूर्ण जानकारी

                                                                                                               प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

सम्मानित किसान बन्धुओं, जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि इस समय चोटी बेधक कीट की प्रथम पीढ़ी की लार्वा अवस्था चल रही है। इस वर्ष चोटी बेधक कीट का आपतन कुछ अधिक दिखाई दे रहा है। वर्तमान समय में इस कीट का आपतन मुख्य रूप से पेड़ी फसल एवं शरदकालीन गन्ने की फसल पर अधिकता से दिखाई दे रहा है। अतः आप से अपील है कि आप इस कीटन की पहचान कर शीघ्र ही इसका निदान अवश्य करें, नही तो आपकी फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

प्रभावित पौधों की पहचानः

                               

कीट से ग्रसित पौधों पत्ती की मध्य शिरा पर लाल रंग की धारी बन जाती है और मुख्य गोफ की पत्ती में छर्रे जैसे छिद्र और साथ ही बढ़वार बिन्दुओं का झुलस जाना आदि पहचान के प्रमुख लक्षण होते हैं।

अतः किसान भाईयों से अपील है कि वह अपनी पेड़ी फसल और शरदकालीन बुवाई किए गए खेतों का अच्छी तरह से निरिक्षण करें और यदि खेत में किसी भी स्थान पर उपरोक्त लक्षण दिखाई देते हैं तो प्रभावित किल्लों को जमीन की सतह से काटर खेत से बाहर निकालकर उन्हें नष्ट कर दें।

कीट की पहचान

                                 

अंड़े (एगमास) की पहचानः इस कीट की एक मादा 250 से 400 तक अंड़े देती है और यह अंड़े बालों के नारंगी रंग के गुच्छो से ढके हुए रहते हैं, जो कि पत्तियों की निचली सतह पर मध्य शिरा के समीप पाए जाते हैं। 7 से 10 दिन के बाद इनसे छोटी-छोटी सूंडियाँ (लार्वा) पत्ती की मध्य शिरा में घुसकर सुरंग बनाते हुए गन्ने की गोफ में प्रवेश कर जाते हैं।

तितली की पहचानः इस कीट की तितली (एडल्ट) चांदी की तरह सफेद रंग की होती है और मादा तितली के पीछे के भाग पर बादामी रंग के बाल होते हैं।

किसान भाईयों इसके अतिरिक्त हमारे खेतों की रक्षा के लिए प्रकृति ने इस कीट के परजीवी की व्यवस्था भी की हुई है और इप परजीवियों का मुख्य भोजन इस कीट के अण्डे ही होते हैं जिससे इस कीट की संख्या का स्वतः ही क्षय हो जाता है।

वैसे इस समस्या से निपटने के लिए एक काम और भी कर सकते हैं। इसके लिए आप अपनी ट्यूबवैल की होदियों (हौज) पानी भरने के बाद उसके ऊपर एक बल्ब थोड़ी सी ऊँचाई पर लटका दें और इस बल्ब रात भर के लिए जलाकर रखें। इसके साथ हौद में थोड़ा सा डीजल या मिट्टी तेल भी डालकर रखें।

बल्ब की रोशनी से आकर्षित होकर वहां इस कीट की तितलियाँ मंडराएंगी और हौद में गिर जाएंगी और डीजल या मिट्टी के तेल के कारण जल्दी ही मर जाएंगी और इनका प्रभाव भी कम हो जाएगा। ऐसा करने से आप अनावश्यक रसायनों का प्रयोग करने और दनके ऊपर होने वाले व्यय से भी बच जाते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।