
वंदे मातरम के 150 वर्ष Publish Date : 16/04/2026
वंदे मातरम के 150 वर्ष
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
वंदे मातरम के 150 वर्ष होने पर संसद से मीडिया की दुनिया में इसकी बहुत चर्चा हो रही है। कांग्रेस की एक नेता ने कहा है कि वन्देमातरम तो सभी भारतीयों के दिलों में है, लेकिन वास्तविकता क्या है? क्या स्वयं उनके या उनके जैसे लोगों के दिलों में भी वन्देमातरम मातृभूमि के लिए हिलोरें मारता हुआ दिखाई देता है? अपने देश में अनेक शहरों में नगर निगम/नगर पालिकाओं में वंदेमातरम को गाने का विरोध होना बड़ी सामान्य घटना है। वन्देमातरम का नारा लगाने और सुनने में न जाने कितने राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को आज भी बहुत परेशान करता है, यहां तक कि वे उसे बंद करवा देते हैं। तुष्टिकरण का प्रयास आज से नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई के समय जब कांग्रेस के अधिवेशन में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने वन्देमातरम गाने से मना कर दिया जिसका कांग्रेस ने केवल इस लिए विरोध नहीं किया क्योंकि मुसलमान नाराज न हो जाएं।

यहीं से वन्देमातरम के प्रति दो धाराएं बननी शुरू हो गईं एक जिन्हें वंदे मातरम भारतमाता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा देने वाला बना और दूसरा जिन्हें उनकी की सांप्रदायिक भावना को चोट पहुंचाने वाला बना। यह दोनों धाराएं आज तक चल रही हैं आगे कब तक चलेंगी पता नहीं?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
