तना छेदक कीट: गन्ने की फसल के लिए अत्यंत हानिकारक      Publish Date : 16/04/2026

तना छेदक कीट: गन्ने की फसल के लिए अत्यंत हानिकारक

                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गन्ने की फसल के लिए तना छेदक कीट अत्यंत हानिकारक है, विशेषकर इसकी लार्वा (इल्ली) अवस्था में यह तने के अंदर घुसकर पौधे को अंदर से खोखला कर देता है, जिससे “डेड हार्ट”(सूखा केंद्र) बन जाता है और उपज में भारी कमी आती है।

कीट की पहचान के मुख्य लक्षण:

                                 

* पौधे का बीच का भाग सूख जाना (Dead Heart)।

* तने में छेद और अंदर सुरंग बनना।

* पौधे का कमजोर होकर गिरना।

* नई बढ़वार रुक जाना।

तना छेदक से बचाव के प्रभावी उपाय:

                               

1. सांस्कृतिक (Cultural) उपाय:

* संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करें।

* खेत में जल निकासी अच्छी रखें।

* समय पर निराई-गुड़ाई करें।

* संतुलित उर्वरक (NPK) का उपयोग करें।

2. रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control):

  • कार्बोफ्यूरान 3% CG।

13 किग्रा/एकड़, मिट्टी में बुरकाव कर सिंचाई करें।

* थियामेथोक्सम 12.6% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 9.5% ZC

80–100 मिली/एकड़ छिड़काव।

* इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG

100 ग्राम/एकड़ छिड़काव।

* लैम्ब्डा-साइहलोथ्रिन 4.9% CS

100–120 मिली/एकड़ छिड़काव।

* क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी

मात्रा (Dose) - 150 ml प्रति एकड़।

3. जैविक नियंत्रण (Biological Control)

* ट्राइकोग्रामा (Trichogramma) कार्ड का प्रयोग (अंडों को नष्ट करता है)।

* नीम आधारित कीटनाशक (Azadirachtin) का छिड़काव

महत्वपूर्ण सलाह:

* छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।

* दवाओं का बदलाव (Rotation) करें ताकि प्रतिरोध न बने।

* खेत की नियमित निगरानी (Monitoring) करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।