कई बार नाकाफी होता है परंपराओं को दोहराना      Publish Date : 15/04/2026

कई बार नाकाफी होता है परंपराओं को दोहराना

                                                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

सही समय पर सही निर्णय लेना ही एक कामयाब लीडर की सबसे बड़ी पहचान है। अगर आप न केवल अपने कार्यक्षेत्र, बल्कि अपने जीवन में हमेशा सही निर्णय लेना चाहते हैं, तो उसका आधार यह होना चाहिए कि आप उस विषय के बारे में क्या सोचते हैं। निर्णय लेने का सबसे सही फॉर्मूला है कि यह हमेशा अपने नैतिक मूल्यों के आधार पर लिया जाना चाहिए। जिस पर आप भरोसा करते हैं, अगर उस आधार पर आप निर्णय लेंगे, तो आप बेहतर रिश्ते बना पाएंगे, अपने काम से ज्यादा संतुष्टि पा सकेंगे और जिंदगी को ज्यादा अर्थपूर्ण बना सकेंगे।

अपने मूल्यों को पहचानें

                              

सही निर्णय के लिए खुद से मूल्यांकन करना बेहद जरूरी है। आप क्या हैं और किन चीजों पर भरोसा करते हैं, इसकी गहरी समझ आपको होनी चाहिए। इसे जानने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप एक अनिश्चित स्थिति की कल्पना करें और फिर सोचें कि आप उस स्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया करना चाहते हैं। यह अभ्यास आपकी मूल्य आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगा।

भविष्य की सोचें

जब आपको भविष्य से संबंधित कोई निर्णय लेना हो, तो यह नहीं पूछना चाहिए कि इससे क्या होगा? इसके बजाय यह पूछना चाहिए कि जब यह होगा, तो मैं क्या महसूस कर रहा होऊंगा। जब आप इस सोच के साथ भविष्य के निर्णय लेंगे, तो अवश्य ही आपके निर्णयों में कुछ संवेदनशीलता होगी। आपकी सेवाओं से ग्राहक भी संतुष्ट होंगे और उनको सेवाएं देते हुए आप भी संतुष्टि का एहसास करेंगे।

आलोचनाओं को अन्यथा न लें

आपके कुछ निर्णय लोगों को पसंद आ सकते हैं, तो कुछ लोगों को नहीं भी। मैं कभी आलोचनाओं को व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेता। आलोचनाएं निजी तौर पर ली जाने के लिए होती भी नहीं हैं। आलोचना के रूप में जो बात आप से कही जा रही है, उसको खुद से गुजर जाने देना चाहिए। जरूरी नहीं कि हर आलोचना पर परेशान हुआ जाए या बेवजह प्रतिक्रिया दी जाए।

खुद के नियम लिखें

                              

सही ढंग से लिए गए निर्णय ही लीडर को लीडर बनाते हैं। परंपराएं निर्णय लेने का आधार हो सकती हैं। ऐसा नहीं है कि परंपराएं हमेशा गलत हों। लेकिन परंपराओं को दोहराना कई बार नाकाफी होता है। कई बार, आपको नई तरह से सोचने की जरूरत होती है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में यह नेतृत्व व निर्णय लेने की कला का सबसे महत्वपूर्ण सबक बन गया है। अगर आप वाकई एक लीडर के तौर पर उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको अपने नियम स्वयं लिखने होंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।