
शरीर को प्राकृतिक शीतलता प्रदान करता है घड़े का पानी Publish Date : 14/04/2026
शरीर को प्राकृतिक शीतलता प्रदान करता है घड़े का पानी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं सरिता सेंगर
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अत्याधिक ठंड़ा पानी हमारे शरीर की पाचन शक्ति को करता है कमजोर
गर्मियों की चिलचिलाती हुई धूप और बढ़ते तापमान के बीच फ्रिज का ठंड़ा पानी राहत तो अवश्य ही प्रदान करता है, लेकिन यह पानी आपके शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकता है। इसके विपरीत मिट्टी से बने घड़े में रखा गया पानी एक ऐसा विकल्प है, जो हमारे शरीर को धीरे-धीरे ठंड़ा करता है और शरीर के अंदरूनी सिस्टम को बिना किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाए राहत प्रदान करता है।

विज्ञान के अनुसार, जब हम बहुत अधिक ठंड़ा पानी सेवन करते हैं तो इससे हमारे शरीर के तापमान को अचानक ही झटका लगता है। इससे हमारे गले की नसें सिकुड़ सकती हैं और पाचन तंत्र भी मन्द पड़ जाता है। कई बार तो अधिक ठंड़ा पानी पीने से गले में खराश, खाँसी अथवा पाचन से सम्बन्धित परेशानियाँ भी देखने को मिल सकती हैं। वहीं आयुर्वेद का मानना है कि अत्याधिक ठंड़ा पानी पीने से हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके चलते भोजन ठीक से नहीं पच पाता है और ऐसा होने से गैस और एसिडिटी के जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इसके विपरीत मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से शीतल होता है। इस पानी के ठंड़ा होने की प्रक्रिया एक विशेष तरीके से घड़े का पानी धीरे-धीरे वायु के सम्पर्क में आकर वाष्पित होता है। इस पूरी प्रक्रिया से ही घड़े का पानी ठंड़ा होता है और पानी की यह शीतलता हमारे शरीर भी संतुलित होती है।
हमारे प्राचीन ग्रन्थ आयुर्वेद में भी मिट्टी से बने बर्तनों के महत्व की व्याख्या अच्छे तरीके से की गई है। माना जाता है कि मिट्टी में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जो कि पानी के पी.एच. स्तर को संतुलित बनाए रखने में सहायता प्रदान करते हैं। घड़े का पानी हमारे पेट को भी शीतलता प्रदान करता है, जिससे एसिडिटी और जलन आदि के जैसी समस्याएं भी कम हो सकती हैं।
इसके अतिरिक्त, घड़े का पानी हमारे शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में भी सहायता प्रदान करता है। यह हमारे शरीर से अनचाहे तत्वों को भी बाहर निकालने में मदद करता है। जब हमारे शरीर का तापमान संतुलित रहता है, तो हमारा रक्त प्रवाह भी उचित बना रहता है और हमारी त्वचा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
मिट्टी के घड़े का चुनाव करते समय कुछ आवश्यक सावधानियाँ

एक्सपर्ट्स के अनुसार, हमें पानी रखने के लिए ऐसे घड़े का चुनाव करना चाहिए जो कि पूरी तरह से ही प्राकृतिक मिट्टी से बना हुआ हो और इस पर किसी भी प्रकार का कैमिकल अथवा रंग न मिलाया गया हो। यदि घड़ से कोई अजीब सी गंध आती है या आपके हाथ में रंग लग जाता है तो ऐसे घड़े को पानी रखने के लिए उपयोग में नहीं लाया जाना चाहिए। अच्छा घड़े से मिट्टी की हल्की खुशबु आती है और उसका अंरूनी भाग भी कुछ खुरदरापन लिए हुए होता है।
घड़े की मोटाई की भी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि मोटा घड़ा पानी को अधिक समय समय तक ठंड़ा रखने में सक्षम होता है और यह जल्दी से टूटता भी नहीं है। इसके साथ ही, घड़े को खरदने से पूर्व उसमें पानी भरकर देख लेना चाहिए, कि कहीं कोई रिसाव आदि तो नहीं है। सही आकार के घड़े का चुनाव करना भी बहुत जरूरी है, जिससे कि उसका उपयोग घर में आसानी के साथ किया जा सके।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
