
उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता Publish Date : 11/04/2026
उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
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उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में इफ्को की बड़ी तैयारी
देश में पारंपरिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और कृषि को और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए इफ्को ने बड़ा कदम उठाया है। खाड़ी देशों में जारी तनाव के बीच इसी दिशा में संस्था ने नैनो उर्वरक जागरूकता महाभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक उर्वरक तकनीक से जोड़ना और खेती की लागत को कम करना है।
नई दिल्ली में इस अभियान की शुरुआत करते हुए इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने इस कदम को कृषि क्षेत्र में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक के माध्यम से न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण संरक्षण भी संभव है।

यह अभियान आत्मनिर्भर भारत और सहकार से समृद्धि के लक्ष्य के अनुसार तैयार किया गया है। इस अभियान के तहत देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3477 तहसीलों में जाकर किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और अन्य नैनो उत्पादों के सही उपयोग मात्रा और लाभ के बारे में बताया जाएगा। विशेष रूप से स्प्रे के माध्यम से उपयोग करने पर जोर रहेगा। इफ्को का मानना है कि पारंपरिक उर्वरकों के अत्याधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और किसान की लागत भी बढ़ रही है।

इसकी अपेक्षा, नैनो उर्वरक कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित होते हैं। उदाहरण के तौर पर नैनो यूरिया प्लस की 500 एमएल की एक बोतल एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर पोषक तत्व दक्षता प्रदान करती है, जिससे उर्वरक की मूल खपत घट सकती है। अब तक 218 लाख से अधिक नैनो यूरिया प्लस और 64 लाख से अधिक नैनो डीएपी की बोतलें बेची जा चुकी हैं। नैनो यूरिया की 208 लाख से अधिक बोतलें पारंपरिक यूरिया के करीब 9.37 लाख टन के बराबर है, जबकि नैनो डीएपी की 57 लाख से अधिक बोतलें लगभग 2.89 लाख टन डीएपी के समकक्ष होती हैं।
इससे आयात लागत, लॉजिस्टिक्स एवं ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय बचत हुई है। अभियान का एक खास पहलू किसानों के बीच व्यवहार परिवर्तन लाना भी है क्योंकि अभी भी बड़ी संख्या में किसान नैनो उर्वरक के सही उपयोग से अनजान हैं या भ्रम की स्थिति में है, इसलिए किसानों के बीच जाकर उनको नैनो यूरिया की उपयोगिता और उसके महत्व के बारे में बताया जाएगा, जिससे उर्वरक के क्षेत्र में एक नया रिवॉल्यूशन लाया जा सके।
