आप सभी को खुश नहीं कर सकते      Publish Date : 10/04/2026

         आप सभी को खुश नहीं कर सकते

                                                                                                                 प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

कोई भी व्यक्ति चाहे अपने काम में कितना ही दक्ष और अनुशासित क्यों न हो, परन्तु वह कभी भी सभी लोगों को संतुष्ट कर सकेगा, ऐसा संभव नहीं है।

कार्यस्थल पर कई ऐसे लोग होते हैं, जो अपने काम और जिम्मेदारियों में बहुत अनुशासित और समर्पित रहते हैं। उनके इसी गुण के कारण लोग उन पर अधिक भरोसा भी करते हैं। लेकिन इसका एक नकारात्मक पहलू भी होता है। अक्सर ऐसे लोगों पर बेवजह की अन्य जिम्मेदारियाँ भी लाद दी जाती है। हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसे मेहनती लोग काम की अधिकता के कारण बर्नआउट का शिकार भी होने लगते हैं। कई बार लगातार काम करने की समस्या के चलते उनके निजी जीवन व रिश्तों को भी प्रभावित होने लगते है।

ऐसे में अगर आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं, तो निम्नलिखित उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं, इन्हें आजमाकर देखें-

हरपल ’हांकहने से बचें:

                               

भले ही आत्म-नियंत्रण आपकी ताकत हो, आप दबाव में भी शांत रहते हों, और कठिन परिस्थितियों को संतुलित ढंग से संभालते हों। फिर भी आपका यही गुण कई बार आपके लिए चुनौती बन जाता है। इसका नकारात्मक प्रभाव आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप हर काम के लिए तुरंत ’हां’न कहें और खुले संवाद को महत्व दें, ताकि ज़िम्मेदारियों और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बना रहे।

अपने रिश्तों को भी समय दें:

लगातार बढ़ता मानसिक बोझ और हर समय खुद को नियंत्रित रखने की कोशिश व्यक्ति की भावनात्मक ऊर्जा को धीरे-धीरे कम कर देती है। जब दिमाग लगातार काम, जिम्मेदारियों के बोझ और अपेक्षाओं में उलझा रहता है, तो व्यक्ति शारीरिक रूप से मौजूद होते हुए भी भावनात्मक रूप से अपनों के बीच में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाता। इसलिए जरूरी है कि काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय की जाएं ताकि रोजमर्रा की भागदौड़ में भी रिश्तों को समय दे सकें।

अपनी थकान को भी व्यक्त करें

ऐसे लोग बाहर से हमेशा शांत, संतुलित और सक्षम दिखाई देते हैं। उनकी कार्यकुशलता के कारण लोग उनकी थकान को समझ नहीं पाते और उनसे लगातार ऊंची अपेक्षाएं बनाए रखते हैं। समस्या तब बढ़ती है, जब व्यक्ति खुद भी अपनी थकान को व्यक्त नहीं करता और सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश करता रहता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते अपनी वास्तविक स्थिति और काम के बोझ के बारे में खुलकर बात की जाए और जरूरत पड़ने पर विराम लेने में जरा भी संकोच न करें, ताकि संतुलन बना रहे।

ऊर्जा के स्तर को बनाए रखें

                           

जब आप पर काम का बोझ अधिक होता है और हर काम को अच्छे ढंग से करने की कोशिश में आप अपनी सीमाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, तब शुरुआत में यह समर्पण जैसा लगता है, लेकिन समय के साथ यही आदत थकावट और चिड़चिड़ापन का कारण भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे लक्ष्य तय करें, जो कि वास्तविक और आपके लिए संभव हों, और यह समझें कि हर जिम्मेदारी अकेले उठाना जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर काम बांटना और सहायता लेना कमजोरी नहीं, बल्कि कामों को प्रबंधित करने की आपकी कला को दर्शाता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।