
आम के कोयलिया (Black Tip) रोग का नियंत्रण Publish Date : 10/04/2026
आम के कोयलिया (Black Tip) रोग का नियंत्रण
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
रोग का कारण:
आम का यह रोग मुख्य रूप से ईंट भट्ठों के आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है। भट्ठों से निकलने वाली विषैली गैसें जैसे सल्फर डाईऑक्साइड (SO₂) और इथाइलीन गैस इस रोग के प्रमुख कारण होती हैं।
रोग के प्रमुख लक्षण (Symptoms):

- रोग से प्रभावित फलों का निचला भाग (टिप) काला पड़ जाता है।
- बाद में यह भाग भूरे रंग का हो जाता है।
- कम प्रभावित फल नीचे की ओर से नुकीले (चोंचदार) हो जाते हैं।
रोग नियंत्रण के उपाय (Management Tips):
रोग का रासायनिक नियंत्रणः
बोरेक्स (सुहागा): 6-10 ग्राम का प्रयोग करें।
कपड़ा धोने का सोडाः 6 ग्राम का घोल प्रयोग करें।
पानीः 1 लीटर में इनका घोल बनाकर आम के पेड़ पर छिड़काव करें।
स्प्रे करने का समयः
घोल का पहला छिड़कावः जब फल कांच की गोली (Marble Stage) के बराबर हो
घोल का दूसरा छिड़कावः इस घोल का दूसरा छिड़काव पहला छिड़काव करने के 15 दिन बाद करना चाहिए।
अतिरिक्त सुझावः
- ईंट भट्ठों से कम से कम 1-2 किमी की दूरी पर बाग लगाएं।
- बाग की नियमित निगरानी करते रहें।
- समय पर पोषण और सिंचाई आदि का प्रबन्धन करें।
- रोग/कीट दिखते ही तुरंत बाद नियंत्रण करने के उपाय करें।
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लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
