
सिर्फ फीडबैक लेना ही काफी नहीं Publish Date : 09/04/2026
सिर्फ फीडबैक लेना ही काफी नहीं
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“जब कोई आपको सलाह, राय या सुझाव देता है, तो आप उसे सिर्फ सुनें ही नहीं, बल्कि समझें, उसका विश्लेषण करें और लागू करें”-
नेतृत्व में सुधार सिर्फ लिखित या औपचारिक फीडबैक से ही नहीं होता है। रिपोर्ट या सर्वे से सामान्य सुझाव मिलते हैं, लेकिन लोगों की वास्तविक भावनाएं खुलकर सामने नहीं आ ला पातीं है। कार्यस्थल पर स्थायी बदलाव तब आता है, जब लीडर अपनी टीम से सीधे और खुलकर और भरोसे के साथ बातचीत करता है। बात सिर्फ कमियों की नहीं है, बल्कि ऐसी बातचीत से आपकी ताकत, व्यवहार और निर्णय लेने के तरीके के बारे में भी काफी कुछ पता चलता है। इससे आपको अपने नेतृत्व को दूसरों की नजर से देखने का मौका मिलता है। ऐसी खुली बातचीत भरोसा बढ़ाती है और छोटे, लेकिन प्रभावी बदलावों के जरिये नेतृत्व को अधिक मजबूत और संवेदनशील बनाती है।
आभार से शुरुआत करें

सबसे पहले उन लोगों को धन्यवाद दें, जिन्होंने आपको फीडबैक देने के लिए समय निकाला, ताकि उन्हें यह महसूस हो कि उनका नजरिया आपके लिए वास्तव में महत्वपूर्ण है और आप उसका सम्मान करते हैं। फीडबैक मिलने के बाद यह भी स्पष्ट करें कि आप उस पर गंभीरता से सोच-विचार करेंगे और फिर उनसे विस्तार से चर्चा करेंगे। जैसे- आप उनसे कह सकते हैं कि मैं इस पर विचार करूंगा और फिर कुछ खास बिंदुओं पर आपसे दोबारा बात करना चाहूंगा। इससे आगे होने वाली गहरी बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनता है।
बातचीत को सोच-समझकर व्यवस्थित करें
अपने सहकर्मियों और बॉस के साथ बैठकें तय करें और पहले से स्पष्ट कर दें कि किन विषयों पर चर्चा होगी, ताकि वे तैयारी कर सकें। बैठक की शुरुआत अपने निष्कर्ष साझा करके करें, जैसे कि ये वे बातें हैं, जिन्हें लोग वास्तव में सराहते हैं और ये वे पहलू हैं, जिनमें मुझे अधिक प्रभावी होने के लिए बदलाव करने की जरूरत है। इससे आपका आत्म-चिंतन दिखता है और यह स्पष्ट होता है कि आप सीखने के लिए तैयार हैं।
सही तरीके से पूछें सवाल
ऐसे सवाल पूछें, जो सामने वाले को खुलकर बोलने के लिए प्रेरित करें, जैसे कि क्या आप मुझे कोई उदाहरण दे सकते हैं? या क्या यह स्थिति अक्सर होती है? इस तरह के प्रश्न बचाव की भावना पैदा करने के बजाय आपकी जिज्ञासा और सीखने की इच्छा को दिखाते हैं, जिससे सामने वाला सहज होकर अपना अनुभव साझा करता है। इसके साथ ही उनसे यह भी पूछें कि इस व्यवहार का क्या प्रभाव पड़ता है, ताकि आप अपने कार्यों के वास्तविक असर को बेहतर ढंग से समझ सकें।
सुधार से पहले समझ जरूरी

आपका उद्देश्य केवल डाटा एकत्र करना है। आपको अभी यह साबित नहीं करना है कि आप हर समस्या का समाधान कर देंगे। आप यह कह सकते हैं कि मैं खोजबीन कर रहा हूं और अधिक जानने की कोशिश कर रहा हूं। मैं उन जरूरी बदलावों के बारे में सोच लेने के बाद आपसे संपर्क करूंगा। इससे दोनों पक्षों पर दबाव कम होता है, और सामने वाला भी ईमानदारी से अपनी बात रख पाता है और आपको यह समझने का समय मिलता है क़ि किन क्षेत्रों में बदलाव करना आपके लिए जरूरी है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
