किसानों की उत्तम आय के लिए आलू की उन्नत खेती      Publish Date : 19/11/2025

        किसानों की उत्तम आय के लिए आलू की उन्नत खेती

                                                                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

उत्तर प्रदेश में आलू की उन्नत खेती के लिए उचित समय (अक्टूबर-नवंबर) का महीना है। आलू की उन्नत किस्में (जैसे कुफरी बहार, कुफरी अलंकार), एयरोपोनिक तकनीक से रोग-मुक्त बीज का प्रयोग, वैज्ञानिक खाद-उर्वरक प्रबंधन और मिट्टी चढ़ाने जैसी तकनीकों का उपयोग करना काफी महत्वपूर्ण है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता में सुधार हो सके; सरकार गुणवत्तापूर्ण बीज और सब्सिडी के के माध्यम से किसानों की सहायता कर रही है।

सही समय और किस्म

आलू की बुवाई का उचित समयः 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक का समय बुवाई के लिए सबसे अच्छा है, जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो।

आलू की उन्नत किस्में: प्रदेश में कुफरी बहार, कुफरी अलंकार, कुफरी आनंद, कुफरी अरुण जैसी आलू की किस्में उगाई जाती हैं, जबकि लाल आलू (राजेंद्र वन) की भी अच्छी मांग है, इस किस्म में शुगर भी कम होता है।

उन्नत तकनीक और बीज

एयरोपोनिक तकनीकः प्रदेश के फरूखाबाद जैसे जिलों में एयरोपोनिक (मिट्टी-रहित) तकनीक से रोग-मुक्त बीज तैयार किए जा रहे हैं, जिससे लालू की पैदावार बढ़ती है और लागत कम आती है।

गुणवत्ता युक्त बीजः सरकार द्वारा शोधित और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up): पौधों के 15-20 सेमी ऊँचा होने पर जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाने से हवा, पानी और तापमान का संतुलन बना रहता है, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

                                                              

बुवाई के समयः नाइट्रोजन (3/4), फास्फोरस (पूरी मात्रा) और पोटाश (पूरी मात्रा) को खेत में डालें जबकि हल्की जमीन में नाइट्रोजन आधी डाली जानी चाहिए।

बुवाई बादः बुवाई के 30-40 दिन बाद बाकी बची हुई नाइट्रोजन (1/4) डालनी चाहिए। पानी में घुलनशील उर्वरक (जैसे 13:0:45 और मैग्नीशियम (EDTA) का छिड़काव करना भी लाभकारी सिद्व होता है।

सरकारी प्रयास

आलू विकास नीतिः गुणवत्ता-युक्त बीज का उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देना।

सब्सिडीः आलू बीज पर सब्सिडी जैसी सरकारी योजनाएं किसानों को लाभ पहुंचा रही हैं।

CIP केंद्रः आगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जो कि क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

लाभ

  • कम लागत में बंपर उत्पादन और अच्छी आय।
  • आलू आधारित उद्योग और निर्यात को बढ़ावा देना।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा, मेरठ, हाथरस, अलीगढ़ और मथुरा जैसे जिले आलू उत्पादन के गढ़ माने जाते हैं। आगरा से देश के अलग-अलग प्रदेशों के साथ ही अरब कंट्रीज में भी आलू एक्सपोर्ट किया जाता है। किसान इस समय आलू की बुआई की तैयारी करे रहे हैं। ऐसे में हमारे कृषि विशेषज्ञ डॉ0 आर. एस. सेंगर बता रहें हैं कि आलू की बंपर पैदावार के लिए आप आलू की खेती कैसे करें और कौन सी वैराइटी के बीज का चयन करने के दौरान प्राथमिकता दें।

जिला आगरा में प्रदेश का 27 प्रतिशत आलू की पैदावार करता है। गौरतलब है कि सब्जियों के राजा आलू का रकबा आगरा में 74-75 हजार हेक्टेयर रहता है। मंडल में सबसे अधिक आलू का उत्पादन वाला जिला भी आगरा ही है। आगरा में प्रदेश का 27 प्रतिशत आलू पैदा किया जाता है, जिसका प्रमुख कारण यहां की जलवायु और मिट्टी है।

आगरा के विकास खंड खंदौली, एत्मादपुर, शमसाबाद, फतेहाबाद, बिचपुरी और बरौली अहीर में आलू की सबसे अधिक खेती की जाती है। इसके अलावा मथुरा, एटा, फिरोजाबाद, अलीगढ, हाथरस, कासगंज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है।

                                                                  

आलू की खेती करने का सही तरीकाः सरदार वल्भभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर का कहना है कि आलू की बुवाई करने से पहले किसानों को कई सावधानियां बरतनी चाहिए। बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच जरूर कराएं, जिससे जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की सही जानकारी किसानों को मिल सके। मिट्टी की जांच के अनुसार ही आलू की बुवाई के दौरान खाद डालनी चाहिए। सबसे पहले आलू बीज अच्छी तरह से उपचारित करें, इसके बाद बुवाई करेंगे तो आलू की जमाव अच्छा होगा और रोगों से भी आलू की फसल का बचाव होगा। अक्टूबर में हुई बारिश से खेतों की मिट्टी में नमी अधिक होती है, इस नमी में आलू की फसल में जड़ गलन जैसे रोगों का खतरा अधिक रहता है। इसलिए थोड़ा रुक कर आलू बुआई करें। आलू बीज की कलम करके बुवाई ना करें।

आलू की कौन से प्रजाति अच्छीः उद्यान विभाग के सदस्य ने बताया कि शासन से जिले में तीन साइज में आलू का बीज आता है। पहला एफ-1, दूसरा एफ-2 और तीसरा ओवर साइज होता है। आलू की अधिकतर मात्रा एफ-1 और एफ-2 साइज की ही बुवाई की जाती है। प्रदेश में किसान भी सबसे अधिक एफ-1 और एफ-2 साइज के बीज की मांग करते हैं। हर साल की तरह इस बार भी आगरा के किसानों के लिए कुफरी बहार, ख्याति, मोहन, गंगा, पुखराज, नीलकंठ, सूर्या, गरिमा और चिप्सोना आदि आलू की प्रजातियों की अच्छी मांग है।

आलू की यह पांच वैरायटी देती हैं बंपर उत्पादनः आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला ने आलू की कई वैरायटी विकसित की है, जो बंपर पैदावार देती हैं। हमारे वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश सिंह सेंगर ने बताया कि अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से किसानों को आलू का बीज चुनना चाहिए। अधिक पैदावार वाली आलू की किस्मों की बात करें तो कुफरी बहार, कुफरी नीलकंठ, कुफरी गंगा, कुफरी ख्याति, कुफरी सूर्या आदि इस लिस्ट में शामिल हैं, जो पिछेती झुलसा के प्रति संवेदनशील, गर्मी और हॉपर की जलन के प्रति सहनशील और उपयुक्त शीघ्र रोपण वाली वैरायटी हैं।

आलू की बुवाई का सही समयः देश में जलवायु के हिसाब से हर प्रदेश में आलू की बुवाई अलग-अलग समय है। देश में आलू की दो अगेती और एक पिछेती की खेती की जाती है। आलू की अगेती बुवाई 15 सितंबर से 25 सितंबर तक की जाती है। इसके बाद आलू की बुवाई 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच की जाती है। देश के तमाम किसान 15 नवंबर से 25 दिसंबर के बीच भी आलू की पछेती बुवाई करते हैं।

बीज पर 800 रुपये प्रति कुंतल छूटः वहीं, इस साल प्रदेश सरकार आलू बीज पर किसानों को 800 रुपये प्रति कुंतल की छूट दे रही है। इस संबंध में उद्यान विभाग के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने आदेश जारी किया है। उद्यान विभाग ने सब्सिडी पर आलू की वैराइटियों का बीज देने के लिए हर जिले में जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से किसानों से आवेदन मांगे थे। आगरा में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष देवेंद्र रावत और किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने सरकार ने आलू बीज पर छूट देने की मांग पत्र अधिकारियों को दिया था।

प्रदेश सरकार के पास 41876 कुंतल आलू बीज उपलब्धः उद्यान विभाग के सदस्य ने बताया कि प्रदेश में विभाग के पास 41876 कुंतल आलू बीज स्टोर है। विभाग की ओर से आलू का यह बीज नकद मूल्य पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। आगरा किसानों को 4300 कुंतल आलू का बीज वितरित किया जाएगा। ऐसे ही जिलेवार विभाग ने आलू बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।