गाजर की किस्म पूसा रुधिर बम्पर उपज और बेहतर मुनाफा      Publish Date : 24/09/2025

       गाजर की किस्म पूसा रुधिर बम्पर उपज और बेहतर मुनाफा

                                                                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

किसी भी फसल से बंपर पैदावार और मुनाफे का आधार बीज ही होता है। आज हम अपनी इस ब्लॉग पोस्ट में आपको गाजर की बंपर उत्पादन देने वाली किस्म पूसा रुधिर के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं। किसान भाई सितंबर से अक्तूबर के महीने के दौरान इस किस्म की बुवाई कर अच्छी कमाई प्राप्त कर सकते हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के द्वारा गाजर की पूसा रुधिर किस्म का विकास किया है। इस किस्म ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के सूदना गांव को गाजर गांव के रूप में पहचान देने का काम किया है। आज पश्चिमी यूपी समेत दिल्ली-एनसीआर के खेतों में इस किस्म ने अपनी जगह बनाई है।

किस्म की विशेषता

                                                               

इस किस्म की विशेषता को जानने के लिए वर्ष 2011-12 में देखना होगा। इस साल संस्थान ने सूदना गांव में रहने वाले सीमांत किसान चरण सिंह के 1.75 एकड़ खेत में पूसा रुधिर का प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के नतीजे काफी अच्छे रहे। चरण सिंह को इस किस्म के माध्यम से 393.75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की जबरदस्त उपज मिली। यह उपज उस समय की प्रचलित किस्म से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अधिक थी। इससे उन्हें 2 लाख 64 हजार 286 रुपये प्रति हेक्टेयर का शुद्ध लाभ हुआ था।

पूसा रुधिर की बाजार में अच्छी मांग

पूसा रुधिर किस्म उत्पादन के साथ अपने बेहतरीन गुणों के लिए भी जानी जाती है। इस किस्म के गाजर लंबे, एक समान आकार और आकर्षक चटक लाल रंग के होते हैं। इस किस्म में मिठास भी काफी अच्छी होती है।

कैसे करें पूसा रूधिर की खेती

  • किसान इस किस्म की गाजर की बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह से समतल कर लें।
  • अब खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह से जुताई करें।
  • खेत को तैयार करने के लिए किसान गोबर की खाद का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • अगर आपकी एक हेक्टेयर में बुवाई करने की योजना है, तो इस किस्म का 6 किलोग्राम बीज ही पर्याप्त रहता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।