
मानसून में रोगी पशु की देखभाल का तरीका और बरते जाने वाली जरूरी सावधानियां Publish Date : 12/07/2026
मानसून में रोगी पशु की देखभाल का तरीका और बरते जाने वाली जरूरी सावधानियां
प्रोफेसर डी. के. सिंह एवं अन्य
अक्सर कहा जाता है कि इलाज से बेहतर बचाव के उपाय अपनाना होता है और यह बात केवल इंसान पर ही नहीं, बल्कि अन्य जीवों पर भी उतनी ही लागू होती है। इंसान तो फिर भी अपनी समझ के अनुसार रोग से बचाव और इलाज दोनों ही करा लेता हैं। लेकिन हमारे पशु ऐसा करने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में इस बात की पूरी जिम्मेदारी पशुपालकों के सिर पर होती है। वहीं जब मौसम बदलता है तो पशु के रोग की चपेट में आने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
ऐसे में अगर आपका कोई पशु किसी रोग की चपेट में आ गया है, तो पशु की देखभाल करने के लिए कुछ जरूरी उपाय करने अनिवार्य हो जाते हैं। आज हम अपने इस लेख के माध्मय से अपने पशुपालक भाइयों को इसी दुविधा का अंत करने के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करने वाले हैं। आज हम अपने इस लेख के माध्यम से आपको हम बताएंगे कि एक रोगी पशु की देखभाल में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अगर आप इस तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें और इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ें इसका आपको काफी लाभ प्राप्त होगा और आपके पशु स्वस्थ बने रहेंगे।
मानसून में पशु को होने वाले प्रमुख रोग

मानसून के दौरान पशुओं को अक्सर खुरपका मुहंपका, लंगड़ा बुखार, थनैला, दाद खाज खुजली जैसे कई रोगों से संक्रमित हो जाते हैं। ऐसे में रोगी पशु की देखभाल कैसे करनी चाहिए और इस दौरान किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए। यह सब बातें आपको आवश्यक रूप से पता होनी चाहिए।
मानसून में रोगी पशु की देखभाल का तरीका
- मानसून में अगर आपका कोई पशु किसी भी रोग की चपेट में आ जाता है तो ऐसे में सबसे पहले पशुपालकों को पशु के स्वस्थ पशुओं से दूर बांधना चाहिए और रोगी पशु के खानपान की व्यवस्था भी अलग से ही करनी चाहिए।
- इसके अलावा पशु को कौन सा रोग हुआ है या वह किस तरह की जीवाणुओं से संक्रमित है। इसके बारे में भी आपको तुरंत ही पता करना चाहिए।
- ऐसा करने के लिए पशुपालक भाई किसी डॉक्टर या जानकार की सलाह ले सकते हैं।
- एक बार पता चल जाए कि पशु को कौन सा रोग हुआ है तो पशुपालक भाई को इससे संबंधित उपचार प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
- इसके अलावा पशुपालक भाई चाहे तो उपचार प्रक्रिया के साथ सहायक घरेलू उपायों को भी आजमा सकते हैं।
- मानसून के दौरान अगर आपका कोई पशु किसी रोग की गिरफ्त में आ गया है तो पशुपालक भाइयों आपको कुछ अन्य काम भी करने होते हैं।
- इसमें सबसे पहला काम यह है कि आप अपने पशु को बारिश से बचाए रखने के लिए उसे एक सही शेड में रखें।
- साथ ही पशु के आस पास गीला या गंदगी बिल्कुल भी न रहने देना चाहिए।
- बीमार पशु को सही समय और सही मात्रा में हरा चारा और सूखा चारा देते रहना चाहिए।
- पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो जाए इसके लिए आप उसे प्रोटीन, विटामिन सी, जिंक युक्त आहार खिलाएं।
- इसके साथ ही आप अपने बीमार पशु को समय - समय पर डॉक्टर को दिखाते रहें।
- बीमार पशु को पीने का पानी आवश्यकता के अनुसार समय - समय पर देते रहना चाहिए।
- मानसून के दौरान पशु को नीम के पानी से नहलाना चाहिए।
- पशु को थनैला जैसा रोग होने पर उसके दूध का उपयोग नहीं करना चाहिए।
मानसून के दौरान कुछ अन्य बातों का ध्यान जरूर रखें-
- स्वस्थ पशु को रोगी पशु के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए।
- रोगी पशु का झूठा आहार या पानी आदि कुछ भी स्वस्थ पशु को नहीं देना चाहिए।
- पशुओं को इस दौरान खुले में चरने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।
- पशुओं का मानसून से पहले टीकाकरण आवश्यक रूप से करवा लेना चाहिए।
- मानसून से पहले पशुशाला की मरम्मत करा लेनी चाहिए।
- बारिश का पानी और अन्य कचरा पशुओं के आस पास एकत्रित न हो इसके एक पूरी व्यवस्था को बनाकर रखा जाना चाहिए।
- अगर पशु को रोग किसी चोट के चलते हुआ है तो पशु के घाव का इलाज भी तुरंत ही कराया जाना आवश्यक है।
हमें आशा है कि आपको हमारा यह लेख जरूर पसंद आया होगा। अगर पशु पालक भाई चाहें तो वह अपने नजदीकी पशु चिकित्सक अथवा कृषि केन्द्र या कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा महाविद्यालय में भी अपने पशु के स्वास्थ्य के लिए मिल सकते हैं।
लेखकः डॉ0 डी. के. सिंह, पशु चिकित्सा महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ।
