
भेड़-बकरियों में ‘‘फुट रॉट’’ का प्रकोप Publish Date : 11/11/2025
भेड़-बकरियों में ‘‘फुट रॉट’’ का प्रकोप
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 डी. के. सिंह
पशु के पेट में दर्द, लंगड़ापन, दूध अथवा ऊन के उत्पादन में गिरावट दिखाई दे तो अविलम्ब कराएं उपचार
रोग के लक्षण दिखाई देने पर दवा का घोल बनाकर नियमित रूप से खुरों की करें सफाई।
आजकल हरियाणा राज्य के कई जनपदों में भेड़-बकरियों में फुट रॉट (पैर सड़न) नामक संक्रामक रोग काफी तेजी से फैल रहा है। यह रोग मुख्य रूप से डिकेलोबैक्टर नोडोसम और फ्यूजोबैक्टीरियम नेक्रोफोरम नामक जीवाणुओं के संक्रमण से होता है, जो कि पशुओं के खुरों को प्रभावित करता है। इस रोग का यदि समय पर उपचार नहीं कराया जाए तो इस रोग से संक्रमित पशुओं में लंगड़ापन और तेज दर्द होता है।
इस रोग के कारण पशुओं के दुध और ऊन उत्पादन में गिरावट भी आ सकती है। फिलहाल यह रोग विशेष रूप से हरियाणा के हिसा, भिवानी, जींद और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों चुरू और हनुमानगढ़ आदि में व्यापक रूप से देखा जा रहा है।

रोग के प्रमुख लक्षणः इस रोग में पशुओं को चलने में परेशानी होने लगती है, पशुओं के खुर एवं उसके आसपास के क्षेत्र में सूजन और लालिमा, दुर्गन्ध युक्त सड़न, खुर की ऊपरी सतह का अलग होना और कभी-कभी पशु को बुखार और बैचेनी भी होने लगती है।
रोग से बचाव के उपायः
- पशुओं को साफ-सुथरे एवं सूखे स्थानों पर ही रखें।
- प्रतिदिन 10 प्रतिशत जिंक सल्फेट, 4 प्रतिशत फार्मेलिन या 0.5 प्रतिशत लाल दवा के घोल से रोगग्रस्त पशु के खुरों की सफाई करें।
- खुरों की नियमित रूप से सफाई करते रहें और घावों को मक्खियों आदि से सुरक्षित रखें।
- पशु में रोग के लक्षण दिखाई देते ही पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें।
- संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए कुछ आवश्यक उपायः
लम्पी स्किन डिजीज नामक बीमारी के आरम्भ में पशु को तेज बुखार और लसीका ग्रन्थियों में सूजन आती है और पशु की त्वचा पर गांठे दिखाई देने लगती हैं। आपके किसी पशु में भी जब इस प्रकार के लक्षण दिखाइ्र दे तो अविलम्ब पशु चिकित्सालय से सम्पर्क करना चाहिए।
संक्रमित पशु को अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। पशु के घावों पर जीवाणुनाशक दवाईयों के साथ ही मक्खियों को भगाने वाला स्प्रे करें। इसके साथ ही यदि पशु को बुखार है तो उसके प्रबन्धन के लिए पशु को ज्वरनाशक दवाई भी दी जा सकती है। संक्रमित क्षे? में पशुओं की आवाजाही प्रतिबन्धित करें। 4 माह से अधिक आयु वाले पशुओं को ‘गोट पॉक्स’ वैक्सीन का टीका लगवाना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखें कि किसी भी बीमार पशु को यह टीका नहीं लगावाया जाना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
