पर्यावरण अनुकूल खेती      Publish Date : 19/04/2026

               पर्यावरण अनुकूल खेती

                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 निधि सिंह

पर्यावरण अनुकूल खेती की शुरुआत यहाँ से होती है: वनस्पति आधारित कीटनाशकों (Botanical Pesticides) की बढ़ती मांग

जैसे-जैसे कृषि सततता (Sustainability) की ओर बढ़ रही है, वनस्पति आधारित कीटनाशक रासायनिक दवाओं के मुकाबले एक शक्तिशाली और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

वनस्पति आधारित कीटनाशकों का उपयोग क्यों करें?

  • मधुमक्खियों और परागण करने वाले उपयोगी कीटों (Pollinators) के लिए सुरक्षित होते हैं।
  • मनुष्यों और पशुओं के लिए गैर-विषैले होते हैं।
  • पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ होते हैं।
  • कम से कम अवशेषों के साथ प्राकृतिक रूप से विघटित (Biodegradable) हो जाते हैं।
  • रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।

सामान्य रूप से उपयोग होने वाले वनस्पति पदार्थ

                                   

नीम का तेल (Neem Oil): प्राकृतिक रूप से कीटों की एक विस्तृत श्रेणी को नियंत्रित करता है।

लहसुन का अर्क (Garlic Extract): कीटों को दूर भगाने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प के रूप में कार्य करता है।

लाल मिर्च का अर्क (Chili Pepper Extract): अपनी तीव्रता और तेज प्रभाव के कारण कीटों को रोकता है।

पाइरेथ्रम (गुलदाउदी): प्राकृतिक रूप से तेजी से प्रभाव करने वाला एक कीटनाशक पदार्थ।

आवश्यक तेल (Essential Oils): पौधों से प्राप्त तेल, जिनमें कीटों को भगाने के गुण होते हैं।

साबुन का घोल (Soap Solution): नरम शरीर वाले कीटों के खिलाफ अत्यंत प्रभावी होता है।

वनस्पति आधारित कीटनाशकों का उपयोग कैसे करें

  • वनस्पति सामग्री या घोल को अच्छी तरह मिलाएँ।
  • आवश्यकता अनुसार पानी मिलाकर इसे पतला (Dilute) करें।
  • पौधों की सतह पर समान रूप से स्प्रे करें।
  • निर्धारित अंतराल पर या आवश्यकता पड़ने पर इस प्रक्रिया को दोहराएँ।

वनस्पति आधारित कीटनाशकों के लाभ:

                               

  • हानिकारक रसायनों के बिना प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण करता है।
  • कीटों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) बनने के जोखिम को कम करता है।
  • समय के साथ कीटों में प्रतिरोध विकसित होने की संभावना घटाता है।
  • लाभकारी कीटों और जैव विविधता (Biodiversity) को सुरक्षित रखता है।
  • मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और जल स्रोतों की रक्षा करता है।

जैव विविधता का संरक्षण:

  • परागण करने वाले जीवों, विशेषकर मधुमक्खियों की सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
  • लाभकारी जीवों के लिए कम हानिकारक होता है।
  • पर्यावरणीय संतुलन और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) पद्धतियों को समर्थन देता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।