
एसिटोबैक्टर एक लाभकारी नाइट्रोजन-स्थिरीकरण जैव उर्वरक Publish Date : 12/03/2026
एसिटोबैक्टर एक लाभकारी नाइट्रोजन-स्थिरीकरण जैव उर्वरक
प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ना फसल के लिए एसिटोबैक्टर एक अत्यंत लाभकारी नाइट्रोजन-स्थिरीकरण जैव उर्वरक है जो फसलों की पैदावार को 10%–35% तक बढ़ा देता है। यह जड़ों में पनपकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन (10–15 किलोग्राम/एकड़) को स्थिर करता है, पादप वृद्धि हार्मोन (आईएए, जिबरेलिक एसिड) उत्पन्न करता है, मिट्टी की सेहत में सुधार करता है और पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है, विशेष रूप से गन्ने और अन्य शर्करा युक्त फसलों में।
फसलों के लिए एसिटोबैक्टर के प्रमुख लाभ:

नाइट्रोजन स्थिरीकरण: यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन की महत्वपूर्ण मात्रा को स्थिर करता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता 25% तक कम हो जाती है।
वृद्धि को बढ़ावा देना: यह इंडोल एसिटिक एसिड (आईएए) और जिबरेलिक एसिड (जीए) जैसे पादप वृद्धि पदार्थों का संश्लेषण करता है, जिससे बेहतर अंकुरण और जड़ विकास को बढ़ावा मिलता है।
पैदावार और गुणवत्ता में वृद्धि: यह फसलों की पैदावार को 10-12% तक बढ़ाता है (कुछ अध्ययनों में 35% तक) और गन्ने और चुकंदर में चीनी की सांद्रता में सुधार करता है।
मृदा स्वास्थ्य में सुधार: यह मृदा को जैविक रूप से सक्रिय करता है, मृदा की उर्वरता बढ़ाता है और अन्य लाभकारी सूक्ष्मजीवों के अस्तित्व में सहायता करता है।
पर्यावरण सहनशीलता: यह कम पीएच और उच्च नमक/चीनी सांद्रता को सहन कर सकता है, जिससे यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी की स्थितियों में लचीला बन जाता है।
सामान्यतः प्रयुक्त फसलें:
एसीटोबैक्टर विशेष रूप से गन्ना, शकरकंद और चुकंदर सहित चीनी उत्पादक फसलों के लिए अनुशंसित है, लेकिन इसका उपयोग अनाज, कॉफी, चाय और कई सब्जी फसलों पर भी किया जाता है।
प्रयोग करने के तरीके

बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कल्चर से लेपित करना।
मिट्टी में प्रयोग: खाद में मिलाकर मिट्टी में डालें।
जड़ों को डुबोना: रोपण से पहले पौधों की जड़ों को एक मिश्रण में डुबोना।
ड्रिप सिंचाई: सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सीधे पानी देना।
गन्ने और चुकंदर (beet root) में एसिटोबैक्टर (Acetobacter) का उपयोग मुख्य रूप से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह एक नाइट्रोजन- फिक्सिंग बैक्टीरिया है जो विशेष रूप से चीनी से भरपूर पौधों के अंदर रहने के लिए अनुकूलित है।
गन्ने और चुकंदर के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नाइट्रोजन की आपूर्ति: यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सोखकर उसे पौधों के लिए उपलब्ध कराता है। गन्ने जैसी फसलों में यह नाइट्रोजन की कुल आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 25% से 50% तक) पूरा कर सकता है।
चीनी के परते के प्रति अनुकूलता:
अधिकांश बैक्टीरिया उच्च शर्करा (High Sugar) वाले वातावरण में नहीं रह पाते, लेकिन एसिटोबैक्टर डियाज़ोट्रोफिकस गन्ने और चुकंदर की मीठी कोशिकाओं के अंदर आसानी से पनपता है।
वृद्धि हार्मोन्स: यह बैक्टीरिया इंडोल एसिटिक एसिड (IAA) और गिबेरेलिक एसिड (GA) जैसे हार्मोन पैदा करता है, जिससे जड़ें तेजी से फैलती हैं और पौधे की लंबाई बढ़ती है।
चीनी की मात्रा में वृद्धि: इसके उपयोग से न केवल पैदावार बढ़ती है, बल्कि गन्ने के रस की गुणवत्ता और उसमें चीनी (Sucrose) की मात्रा में भी सुधार होता है।
उर्वरक की बचत: इसका उपयोग करने से किसान यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहता है।
उपयोग करने के तरीके
टुकड़ों का उपचार (Sett Treatment): गन्ने की बुवाई से पहले उसके टुकड़ों को एसिटोबैक्टर के घोल में 15-20 मिनट के लिए डुबोकर रखा जाता है।
मिट्टी में प्रयोग: इसे जैविक खाद या वर्मीकम्पोस्ट के साथ मिलाकर खेत में छिड़का जा सकता है।
ड्रिप सिंचाई: इसे पानी के साथ मिलाकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
