फसलों की सुरक्षा में नीम के उपयोग      Publish Date : 21/10/2026

      फसलों की सुरक्षा में नीम के उपयोग

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

  • नीम की खली और पत्तियों से करें फसल की सुरक्षा, प्राकृतिक तरीके से कीटों एवं रोगों से छुटकारा।

नीम की खली और पत्तियां दोनों ही फसलों को कीटों से बचाने का गैर रासायनिक और एक प्राकृतिक विकल्प हैं। नीम की खली मिट्टी में मौजूद दीमक, कटुआ और सफेद गिंडार जैसे कीटों के नियंत्रण में सहायक हो सकती है। वहीं, नीम की पत्तियों से तैयार घोल का छिड़काव धान, बैंगन और टमाटर में कीटों के प्रबंधन में भी उपयोगी सिद्व होता है।

नीम का उर्वरक, कीटनाशी एवं रोगनाशी के रूप में उपयोग

उर्वरक के रूप में नीम की खली का प्रयोग करने से भूमि के अंदर पाए जाने वाले लगभग सभी प्रकार के कीट जैसे दीमक, कटुआ, सफेद गिंडार, आम की गुजिया, टिडे आदि पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इससे फसल स्वस्थ रहती है और साथ ही कीटों से फसलों की सुरक्षा भी होती है। इसी प्रकार से नीम की खली का प्रयोग फसलों में लगने वाले अनेक के रोग में नियंत्रण में भी प्रभावी पाया गया है।

नीम की पत्ती 5 किलोग्राम 10 लीटर पानी में तब तक उबालें कि जब तक यह पानी अधा यानी 2.5 लीटर न रह जाए। अब इस 2.5 लीटर नीमयुक्त पानी में 100 लीटर सादा पानी मिलाकर प्रति एकड़ धान की फसल पर छिड़काव करें। इस छिड़काव से धान का गन्धी  कीट, हरा फुदका, भूरा फुदका, रस चूसने वाले कीटों से धान की फसल को बचाया जा सकता है। नीम के इस घोल से बैगन के तना छेदक एवं फल छेदक कीट के प्रकोप से बचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त टमाटर में फली छेदक कीट का भी नियंत्रण बेहतर तरीके से किया जा सकता है। नीम की पत्तियों के अर्क से कपास, सब्जी तथा दलहनी बीजों का उपचार करने से बीज जनित रोगों का प्रभावी नियंत्रण होता है।

नीम की खली के विभिन्न प्रयोग एवं उससे प्राप्त लाभ

  • सिंचाई को कम करने में सहायक।
  • मिट्टी में रहने वाले कीटों के नियंत्रण में सहायक।
  • बीजों का रंग बदलने में सहायक।
  • फसल की कटाई में भी सहायक।

नीम का तेल दुर्गन्ध युक्त एवं उसमें कड़वापन होने के कारण सभी फसलों एवं पौधों की पत्ती, फूल, अथवा फल पर कीड़ों के विकास को प्रतिबन्धित करता है। नीम का तेल 1 से 2 लीटर की मात्रा में प्रति एकड़ छिड़काव करने से काटने, चबाने एवं रस चूसने वाले कीड़े नष्ट हो जाते हैं तथा कीटों के अंडे से बच्चे भी बाहर नहीं निकाल पाते।

नीम तेल के दो प्रतिशत घोल का प्रयोग कर चूर्णित आसिता रोग का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। नीम के 0.5 प्रतिशत घोल का प्रयोग कद्दू वर्गीय फसलों में 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। इसका उपयोग करने से कद्दू वर्गीय फसलों में रोग नियंत्रण के साथ ही साथ 50 से 70% तक फसल की वृद्धि भी होती है।

2.5 किलोग्राम नीम का बुरादा 2.5 से 3.0 किलोग्राम लहसुन तथा 250 से 300 ग्राम खाने वाला तंबाकू को मिलाकर इसका पेस्ट बना ले। इस पेस्ट में 2 लीटर गोमूत्र या मिट्टी का तेल मिलाकर धन या गेहूं की फसल पर छिड़काव करें। इस छिड़काव से सभी हानिकारक व रोगों का प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया जा सकता है।

                                 

5 किलोग्राम निम्बोली यानी नीम का फल रात भर के लिए शाम को पानी में भिगोकर रख दे। इस नीम का फल को सुबह उबालकर और गाढ़ा पेस्ट बना लेते हैं। इस पेस्ट में 100 लीटर पानी मिलाकर एक घोल तैयार कर ले और प्रति एकड़ की दर से इस घोल फसलों पर छिड़काव करें। यह सभी प्रकार की फसलों, सब्जी तथा बागों में कीट नियंत्रण के लिए एक उपयुक्त एवं प्रभावी कीटनाशी घोल है।

5 किग्रा नीम के सुखे बीजों को साफ करके उसके छिलकों को हटाकर नीम की गिरी निकाल लेते हैं। इस नीम की गिरी को पीसकर बारीक पाउडर बना लिया जाता हैं। इस पाउडर को 10 लीटर पानी में डालकर रात भर के लिए रख देते हैं। इस गोल को सुबह किसी लकड़ी के डंडे से हिला कर अच्छी तरह से मिलाएं तथा किसी महीन कपड़े से छान लेते हैं। इस घोल में 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिला लें फिर इसके बाद 150 से लेकर 200 लीटर पानी में इसे मिला लें। यह एक उपयुक्त कीटनाशी है जो की एक एकड़ की फसल के छिड़काव हेतु पर्याप्त रहता है।

                               

25 से 30 किग्रा नीम की ताजी पत्तियां ले लें। इन पत्तियों को रात भर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इन्हें पीसकर पत्तियों का सत्व बना लें। अब इस सत्व में 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिलाकर 150 लीटर पानी मिलाकर प्रति एकड़ की दर से फसल पर छिड़काव करें। यह भी एक उपयुक्त कीटनाशी का काम करता है।

10 किलोग्राम नीम की खली लें। इस रात भर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस घोल में 100 लीटर पानी और 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें। 1 एकड़ क्षेत्रफल की फसल के लिए यह एक उपयुक्त कीटनाशी है।

1 लीटर नीम का तेल ले लें। इसमें 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिला लें तथा 100 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें। 1 एकड़ क्षेत्रफल की फसल के लिए यह पर्याप्त कीटनाशी के रूप में प्रभावी काम करता है।

अन्न भंडारण के लिए प्रयोग किए जाने वाले जूट के बोरे को 10ः नीम के बीज के घोल में 15 मिनट तक बोरों को डुबोकर और इसके बाद इन बोरों को छाया में अच्छी तरह सुखाकर अन्न भंडारण करें तथा बचे घोल को अन्न भंडारण वाले स्थान पर छिड़काव कर दें। इससे भंडारित अनाज कीटों से सुरक्षित बना रहेगा।

नीम के प्रयोग से पादप विषाणु, सूत्रकृमि एवं कवक के दुष्प्रभाव से फसल को बचाया जा सकता है। नीम के प्रयोग से गन्धी कीट, तना छेदक कीट, जैसिडस, फुदका, हेलियोथिस, सफेद मक्खी, माहू, फल्ली बेधक, तंबाकू की सूंड़ी आदि कीटों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।