धान की फसल में करने योग्य कार्य      Publish Date : 25/08/2026

      धान की फसल में करने योग्य कार्य

                                                                                         प्रो0आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

धान में बाली निकलने से पहले कर लें ये काम, मजबूत बालियों के साथ बढ़ेगा दानों का वजन, एक्सपर्ट के द्वारा बताए टिप्स अपनाएं और अपना लाभ बढ़ाएं किसान-

धान की फसल अब तेजी से बढ़ने लगी है और जल्द ही इसमें बाली निकलने की अवस्था शुरू होगी। ऐसे में धान के किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान फसल को पर्याप्त पोषक तत्व और सही देखभाल मिलने से बालियां मजबूत बनने के साथ दानों का विकास भी बेहतर हो सकता है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं पा्रैद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रो0 शालिनी गुप्ता के अनुसार, रोपाई के 25 से 30 दिन बाद यूरिया और इसके बाद जरूरत के अनुसार माइक्रोन्यूट्रिएंट का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं 40 से 50 दिन की फसल में पोषक तत्वों का छिड़काव और बाली बनने की अवस्था में उचित एनपीके प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, किसी भी उर्वरक या कीटनाशक का इस्तेमाल स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और फसल की स्थिति के अनुसार करना बेहतर रहता है।

धान की फसल अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी है और आने वाले समय में इसमें बाली निकलने की अवस्था शुरू होगी। यही वह समय होता है जो कि किसानों के लिए सबसे ज्यादा ध्यान देने वाला होता है, क्योंकि इसी दौरान की गई सही देखभाल से धान की बालियां मजबूत बनती हैं और दानों का वजन भी बढ़ता है। अगर इस समय फसल में पोषक तत्वों की कमी रह जाए या बीमारी लग जाए तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

धान की फसल में शुरुआत से ही कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। कई बार पौधे कमजोर रह जाते हैं, जिससे आगे चलकर बालियां भी कमजोर निकलती हैं और उनमें बनने वाले दाने भी अच्छे से विकसित नहीं हो पाते हैं। इसलिए किसानों को रोपाई के बाद से ही फसल की सही देखभाल तरीके से करनी चाहिए। कृषि विशेषज्ञ बता रहे हैं कि 25 से 30 दिन, 40 से 50 दिन और बाली निकलने के समय किसानों को किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे धान की फसल मजबूत हो सके और अच्छा उत्पादन मिल सके।

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं पा्रैद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रो0 शालिनी गुप्ता ने बातचीत में बताया कि अगर किसान धान से अच्छा उत्पादन लेना चाहते हैं तो रोपाई के बाद सही समय पर पोषक तत्व देना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि रोपाई के करीब 25 से 30 दिन बाद खेत में यूरिया का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

इसके बाद पौधे को मजबूती देने के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 250 ग्राम नीला थोथा, 250 ग्राम बोरान, 250 ग्राम फेरस सल्फेट और 2 किलोग्राम जिंक सल्फेट को मिलाकर धान के खेत में बिखेर सकते हैं। इससे पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे फसल का रंग बेहतर होता है और बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।

डॉ0 शालिनी गुप्ता ने बताया कि जब धान की फसल रोपाई के 40 से 50 दिन की हो जाए तो उस समय माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव जरूर करना चाहिए। इससे पौधे मजबूत होते हैं और आगे निकलने वाली बालियां अच्छी गुणवत्ता वाली बनती हैं। उन्होंने बताया कि धान की फसल में हॉपर जैसे कीटों का प्रकोप भी देखा जाता है। इससे बचाव के लिए किसान खेत में जरूरी दवाओं का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जा सकता हैं।

हमारे कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल में बाली बनने की अवस्था के समय एनपीके 19-19-19 का छिड़काव किया जा सकता है। इसके बाद जब बाली दूधिया अवस्था में आती है तो नैनो डीएपी का प्रयोग किया जाता है। वहीं जब दूधिया अवस्था खत्म होकर दाना बनने लगता है तो 00:50 का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सही समय पर पोषक तत्व देने से धान की बालियां मजबूत बनती हैं, दानों का विकास अच्छा होता है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए किसान शुरुआत से ही फसल की निगरानी करते रहें और जरूरत के अनुसार उचित प्रबंधन करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।