
गन्ने में उर्वरक प्रबंधन Publish Date : 20/08/2026
गन्ने में उर्वरक प्रबंधन
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
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शरदकालीन बुवाई के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रयोग।
उद्देश्य :
गन्ने में उर्वरक का उपयोग फसल की बढ़वार अवस्था के अनुसार करने से पौधे को समय पर पोषण मिलता है, तो टिलर अधिक बनते हैं, तना मजबूत होता है और शक्कर रिकवरी बेहतर रहती है।
1. 0-30 दिनः जमाव का समय
गन्ने में यह establishment phase होता है। इस समय कल्ले जमते हैं, प्रारंभिक जड़ें बनती हैं और पौधा खेत में स्थापित होता है।
प्रभावी उर्वरक: बेसल में 100% P, 25% N , और 25% K दें।
इससे जड़ विकास अच्छा होता है और पौधा मजबूत नींव बनाता है।
2. 30–45 दिन: प्रमोटिया / सेट रूट का विकास
यह root spread (जड़ वृद्धि) और stand stabilizing phase जड़ स्थितिकरण अवस्था होती है। इस समय पौधा तेजी से root zone (जड़ क्षेत्र) को फैलाता है।
उर्वरक: आवश्यकता अनुसार N (नाइट्रोजन)का अगला भाग और K (पोटास) का भाग दें। नमी होने पर यह खुराक और अधिक प्रभावी रहती है।
3. 45–120 दिन: टिलरिंग अवस्था
यह सबसे महत्वपूर्ण phase है, क्योंकि इसी समय मिल योग्य गन्ना तय होती है।
उर्वरक: N और K की मुख्य split doses इसी अवधि में दें।
मानक गन्ना वृद्धि तालिकाओं में भी tillering इसी अवधि में माना गया है।
4. 120–270 दिन: ग्रैंड ग्रोथ अवस्था
यह rapid stalk elongation phase है। इस समय तना लंबा, मोटा और भारी बनता है।
उर्वरक: अंतिम N+K split 120–150 दिन तक पूरा करें। इसके बाद N धीरे-धीरे कम या बंद कर दें।
5. 270 दिन के बाद: परिपक्वता अवस्था / राइपिंग फेज
यह sucrose accumulation phase (शर्करा संग्रहण) की अवस्था होता है।
उर्वरक: नाइट्रोजन बंद करें।
जरूरत हो तो केवल हल्का K दें ताकि शक्कर भराव अच्छा हो और रिकवरी बनी रहे।
उर्वरक की सामान्य अनुशंसित मात्रा
Plant crop (नोरपा) के लिए सामान्य मार्गदर्शक सीमा:
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N: 180 –225 kg/ha
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P2O5: 80–100 kg/ha
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K2O: 60–100 kg/ha
यह मात्रा बुवाई का समय, मिट्टी की दशा, सिंचाई, गन्ना किस्म और लक्ष्य उपज के अनुसार बदल सकती है। अधिक उपज वाले खेतों में N की मात्रा ऊपर की सीमा तक रखी जा सकती है।
स्प्लिट डोज का सही क्रम
- बोवाई पर: 25% N + 100% P + 25% K
- 30–45 दिन: 25% N + 25% K
- 60–90 दिन: 25% N + 25% K
- 105–120 दिन: 25% N + शेष K
- 120 दिन के बाद: N बंद, केवल जरूरत पर foliar पोटास का करे।
Split Dose क्यों जरूरी है?
- शुरुआती N से टिलर अधिक बनते हैं।
- P से जड़ स्थापना मजबूत होती है।
- K से तना मजबूत होता है और शक्कर का स्थानांतरण बेहतर होता है।
- समय पर N बंद करने से maturity (परिपक्वता) अच्छी होती है और sugar recovery बढ़ती है।
मुख्य संदेश:
शरदकालीन गन्ने में व्यावहारिक चरण हैं:
- 0–30 दिन जमाव अवस्था→
- 30–45 दिन प्रमोटिया/सेट रूट अवस्था→
- 45–120 दिन टिलरिंग अवस्था→
- 20–270 दिन ग्रैंड ग्रोथ अवस्था→
- 270 दिन के बाद परिपक्वता अवधि तक।
- उर्वरक को इसी चरण के अनुसार split dose में दें।
- N की अंतिम खुराक 120 दिन तक पूरी करें और राइपिंग चरण में N बंद रखें।
- इससे अधिकतम उर्वरक उपयोगिता, अधिक गन्ना उत्पादन और बेहतर शक्कर रिकवरी मिलती है।
अंतिम पंक्ति
“गन्ने में सही चरण, सही मात्रा और सही समय — यही वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन का मूल आधार है।”
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
