
गन्ने में न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट करने का वैज्ञानिक तरीका Publish Date : 19/08/2026
गन्ने में न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट करने का वैज्ञानिक तरीका
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
वैज्ञानिक तरीकों से अधिक पैदावार और अधिक मिठास पाना है सम्भव-
सही पोषण - मोटा गन्ना + अधिक शुगर की रिकवरी + अधिक मुनाफा
1. बुवाई के समय (Base Dose)
- गोबर की खाद - 8-10 टन प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
फॉसफोरस - (P2O5)
- 50-60 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
पोटाश - (K2O)
- 40-50 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
लाभः पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी शुरूआती ग्रोथ तीव्र गति से होती है।
2. नाइट्रजन (N) को तीन बराबर भागों में बांटकर देना चाहिए।
नाइट्रोजन की प्रथम डोज - बुवाई के 30 दिन बाद देना चाहिए।
नाइट्रोजन की द्वितीय डोज - गन्ने की बुवाई के 60 दिनों के बाद देना चाहिए।
नाइट्रोजन की तृतीय डोज - गन्ने की बुवाई के 90 दिनों के बाद देना चाहिए।
इस प्रकार से नाइट्रोजन की कुल मात्रा 100-120 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना सुनिश्चित् करना चाहिए।
लाभः अधिक टिलरिंग, गन्ने की मोटाई अधिक और उसकी ग्रोथ भी अच्छी होती है।
3. सेकेंडरी न्यूट्रिएंट्स
सल्फर (Sulphur): सल्फर का उपयोग 20-25 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से करने पर शुगर कंटेंट में वृद्वि होती है।
कैल्शियम (Calcium): गन्ने की फसल पर कैल्शियम नाइट्रेट का स्प्रे करने से सेल वॉल एवं जड़ें मजबूत बनती हैं।
4. माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स मैनेमेंट
गन्ने की फसल में जिंक (Zink): 10 किग्रा. जिंक सल्फेट का प्रयोग करने से गन्ने की पत्तियाँ हरी और उनकी ग्रोथ भी बेहतर होती है।
गन्ने में क्लोरोसिस अर्थात फसल की पत्तियों के पीली पड़ जाने पर आयरन (Iron/Fe) का स्प्रे करना चाहिए।
5. फोलिया स्प्रे (Spray Management):
19:19:19 (एनपीके का एक प्रतिशत घोल) + माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिक्स + ह्यूमिक एसिड/सीवीड एक्सट्रैक्ट का प्रयोग करने से प्राप्त
लाभः गन्ने की तेज ग्रोथ होती है, गन्ने का पौधा मजबूत होता है और पौधों की सूखा सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
6. ड्रिप इरिगेशन + फर्टिगेशन का तरीका
प्रति 7-10 दिन के अंतराल पर थोड़ी थोड़ी मात्रा में खाद का प्रयोग करने से खादों की एफिशिएंसी 25 से 30 प्रतिशत तक अधिक हो जाती है।
7. जैविक विकल्प (Organic Support)
Azotobacter/Azospirillium नाइट्रोजन को फिक्स करने का काम करते हैं।
PSB पौधों के लिए फॉस्फोरस को उपलब्ध कराने का काम करता है।
पोषण प्रबन्धन टाइमिंग चार्ट
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बुवाई के समय |
30 दिन |
60 दिन |
90 दिन |
120 दिन |
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FYM + P + K |
1st नाइट्रोजन |
2nd नाइट्रोजन + स्प्रे |
3rd नाइट्रोजन |
माइक्रोन्यूट्रिएंट स्प्रे |
हमेशा ध्यान रखें:-
- नाइट्रोजन का अधिक प्रयोग करने से पौधों पर पत्तियाँ अधिक बनती है और गन्ने की मिठास कम हो जाती है।
- फसल में पानी का भराव होने से पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
- संतुलित रूप से पोषण प्रदान करने से ही फसल का उचित विकास होता है, जिससे गन्ने का वजन, गन्ने की संख्या, शुगर रिकवरी तथा किसाना का लाभांश बढ़ता है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
