गन्ने की फसल की बंधाई के बाद करने योग्य कृषि क्रियाएं      Publish Date : 13/08/2026

गन्ने की फसल की बंधाई के बाद करने योग्य कृषि क्रियाएं

                                                                                            प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गन्ने की फसल की बंधाई के बाद किसानों को कौन-सी खाद अपनी फसल को देनी चाहिए, जिससे कि गन्ना मोटा, वजनदार और अच्छी रिकवरी वाला बन सके। किसान भाईयों, अगस्त का महीना गन्ने की फसल के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय गन्ने की बंधाई करने के बाद यदि सही मात्रा में खाद और पोषण गन्ने की फसल को प्रदान किया जाए, तो गन्ने की मोटाई, वजन और गन्ने से चीनी की रिकवरी में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। इसके लिए आप निम्नलिखित तरीके से गन्ने की फसल को खाद एवं पोषण प्रदाल कर सकते हैं-

1. CO-0238 (नई फसल - अप्रैल के महीने में बुवाई की गई फसल में)

प्रति एकड़ की दर सेः

i. यूरिया - 55-60 किग्रा।

ii. डव्च् (पोटाश 0:0:60) - 25 किग्रा।

iii. बेंटोनाइट सल्फर - 8-10 किग्रा (यदि पहले प्रयो नहीं किया गया हो तो), खाद देने के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें, ताकि पोषक तत्व फसल जड़ों तक आसानी से पहुँच सकें।

2. CO-0118 (पेड़ी फसल)

प्रति एकड की दर सेः

i. यूरिया - 60-65 किग्रा।

ii. MOP (पोटाश) - 25-30 किग्रा।

चूँकि, पेड़ी की फसल में जड़ें पहले से विकसित हो चुकी होती हैं, इसलिए इस अवस्था में पोटाश देने से गन्ने की मोटाई और वजन बढ़ाने में अच्छी मदद मिलती है।

3. CO-0238 (पेड़ी फसल)

प्रति एकड़ की दर सेः

i. यूरिया - 60 किग्रा।

ii. MOP (पोटाश) - 25-30 किग्रा।

4. पत्तियों पर स्प्रे कब करें?

बंधाई के लगभग 20-25 दिन बाद इनमें से किसी एक का छिड़काव गन्ने की फसल पर किया जा सकता है-

1. 13:00:45 (पोटैशियम नाइट्रेट) - 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत का घोल बनाकर)

अथवा

2. 00:00:50 (SOP) - 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत घोल बनाकर)

यदि पत्तियों में किसी सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी दिखाई दे रही हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार माइक्रोन्यूट्रिएंट मिश्रण का भी छिड़काव किया जा सकता है।

अधिक उपज के लिए केवल खाद का उपयोग करना ही काफी नहीं

यदि आपका लक्ष्य 500-600 क्विंटल प्रति एकड़ या उससे अधिक उत्पादन लेना है, तो इन बातों का भी विशेष रूप से रखें ध्यान-

i. खेत में पर्याप्त नमी के स्तर को बनाए रखें।

ii. खरपतवार की समस्या को भी सही समय पर नियंत्रित करें।

iii. कीट एवं रोग का नियमित निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत नियंत्रण के उपाय करें।

iv. वर्षा न होने की स्थिति में 8-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें (खेत की मिट्टी की स्थिति के अनुसार)।

v. यदि मिट्टी में सिलिकॉन की कमी हो, तो सिलिकॉन आधारित उत्पादों का उपयोग गन्ने को मजबूत बनाने और गिरने की संभावना कम करने में सहायक हो सकता है।

महत्वपूर्ण सलाहः

गन्ने की अच्छी पैदावार केवल अधिक खाद डालने से नहीं मिलती, बल्कि संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई और सही फसल प्रबंधन से मिलती है। यदि बंधाई के बाद उपरोक्त तथ्यों का ध्यान रखा जाए, तो गन्ना मोटा, वजनदार और बेहतर रिकवरी वाला बनने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

कृषि सलाहः किसी भी उर्वरक का प्रयोग करने से पहले अपनी मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें, ताकि फसल की आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा का उपयोग किया जा सके।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।