गन्ने की अधिकतम उपज प्राप्त करने हेतु बायो-प्रोडक्ट आधारित उर्वरक विधि      Publish Date : 15/07/2026

गन्ने की अधिकतम उपज प्राप्त करने हेतु बायो-प्रोडक्ट आधारित उर्वरक विधि

                                                                                             प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

उर्वरकों का जैविक समाधान - अधिकतम उत्पादन - स्वस्थ्य मृदा - अधिकतम लाभ

स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ गन्ना, तो समृद्व किसान-

                               

गन्ने की बुवाई करने से पूर्व-

  • एजेटोबैक्टर का प्रयोग 2 किग्रा/एकड़ की दर से करना चाहिए।
  • पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्यूब्लाइजिंग बैक्टीरिया) 2 किग्रा./एकड़ की दर से किया जाना चाहिए।
  • ट्राइकोडर्मा विरिडी का उपयोग 2 से 3 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से करना उत्तम है।
  • नीम की खली का उपयोग 100 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से करना चाहिए।
  • अच्छी तरह से सड़ी गोबर की 50 किग्रा. खाद को मिट्टी में मिलाकर खेत में छिड़काव करने से लाभ प्राप्त होता है।

उपरोक्त तरीके से खाद का प्रयोग करने से लाभ

ऐसा करने से मृदा की उर्वरता बढ़ती है, फसलों की रोगों से सुरक्षा होती है और पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है।

सेट उपचार (सीड ट्रीटमेंट)

  • ट्राइकोडर्मा विरिड 10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से बीजोपचार करना चाहिए।
  • पीएसबी कल्चर + ऐजेटोबैक्टर 10 + 10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से बीजोपचार करने से फसल अच्छी होती है।

विधिः गन्ना सेट को 15-20 मिनट तक घोल में डुबोकर रखें तथा इसके बाद बीज को छाया में सुखाने के बाद बीज की बुवाई कर देनी चाहिए।

बीजोपचार से प्राप्त लाभः फसल का रोगों से बचाव होता है, अंकुरण प्रतिशत में वांछित वृद्वि होती है और जड़ प्रणाली मजबूत होती है।

अंकुरण एवं टिलरिंग अवस्था (0-45 दिन तक)

  • ह्यूमिक एसिड का प्रयोग 500 मिली. प्रति एकड़ की दर से करें।
  • स्वेद एक्सट्रेक्ट का प्रयोग 500 मिली. प्रति एकड़ की दर से करें।

प्रयोग करने की विधिः

150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 से 20 दिन के अंतर पर खड़ी फसल पर स्प्रे करें।

प्राप्त लाभः जड़ों की लम्बाई बढ़ती है, टिलरिंग अधिक संख्या में होती है और पौधे मजबूत होते हैं।

ग्रैंड ग्रोथ पीरियड (45 से 120 दिन):

  • पीएसबी + एजेटोबैटर 2 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • पोटाश मोलिाइजिंग बैक्टीरिया (केएमबी) का प्रयोग 2 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से खड़ी फसल में करने से लाभ होता है।
  • पौध सुरक्षा के लिए नीम का तेल (1500 पीपीएम) दो से तीन मिली. प्रति लीटर पानी की दर से करने पर पौध सुरक्षा में वृद्वि होती है।

प्रयोग करने की विधिः 50 किग्रा गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद को खेत में प्रयोग करें। साथ ही कीट नियंत्रण के लिए नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए।

प्राप्त होने वाले लाभः गन्ने की मोटाई में वृद्वि होती है, गन्ने की लम्बाई और उसके वजन में वृद्वि होती है और कीटों के नियंत्रण में भी सहायता प्राप्त होती है।

गन्ने के पकने के चरण के दौरान (120 दिनों के बाद)

  • स्वेद एक्सट्रैक्ट का प्रयोग 500 मिली. प्रति एकड़ की दर से करें।
  • ह्यूमिक एसिड 500 मिली. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

प्रयोग करने की विधिः 150-200 लीटर पानी के साथ घोलकर 20-25 दिनों के अंतर पर स्प्रे करें।

प्राप्त होने वाले लाभः शर्करा का प्रतिशत (Brix) बढ़ता है तथा गन्ने के वजन एवं उसकी गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार आता है।

स्प्रे रोटेशन सिस्टम

प्रत्येक 15 से 20 दिनों में अदल-बदल कर स्प्रे करते रहना चाहिए, जिसमें

पहला स्प्रेः ह्यूमिक एसिड का करें।

दूसरा स्प्रेः स्वेद एक्सट्रैक्ट का करना चाहिए। और

तीसरा स्प्रेः (Bio Mix अर्थात PSB + Azotobacter)

अपेक्षित लाभः

  • 15 से 30 प्रतिशत तक की अधिक उपज प्राप्त होती है।
  • मृदा की उर्वरा शक्ति में सुधार आता है।

जैविक कीट नियंत्रणः

  • नीम का तेल (1500 पीपीएम), नीमास्त्र/ब्रह्मास्त्र (जैविक विधि से कीट नियंत्रण)
  • आवश्यकता के अनुसार 7 से 10 दिन के अन्तराल पर स्प्रे करना चाहिए।

प्राप्त लाभः

  • गन्ने की मोटाई और उसकी लम्बाई में वृद्वि होती है।
  • रैटून फसल से अधिक लाभ प्राप्त होता है।

अन्य महत्वपूर्ण सावधानियाँ

  • जैविक आदानों को रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के साथ कभी भी मिक्स नहीं करना चाहिए।
  • जैविक खाद एवं कीटनाशकों का प्रयोग और रासायनिक दवाओं के प्रयोग में कम से कम 5 से 7 दिन का अंतर आवश्यक रूप से रखना चाहिए।
  • फसल पर स्प्रे सुबह अथवा शाम के समय ही करना चाहिए।
  • Bio-Products को ठंड़े और छायादार स्थान पर ही रखें।
  • सदैव प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद का प्रयोग करने को ही प्राथमिकता प्रदान करें।
  • जैविक + वैज्ञानिक खेती को अपनाएं, अधिक उत्पादन प्राप्त करें और भरपूर लाभ कमाएं।

DA P आधारित गन्ने का उच्च उत्पादन और उर्वरक प्रबन्धन कार्यक्रम

भूमि की तैयारी (बुवाई से पूर्व)

जैविक सुधार

  • FYM - 10 टन प्रति एकड़ की दर से।
  • प्रेसमड - 2 टन प्रति एकड़ की दर से।
  • वर्मी-कम्पोस्ट 800 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से।

बेसल उर्वरक (ZN को अलग रखें)

  • DAP - 88 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से।
  • MOP - 40 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से।
  • माइक्रोन्युट्रिएंटस (Zn को छोड़कर) फेरम सल्फेट - 20 कि.ग्रा प्रति एकड़ की दर से।
  • मैंगनीज सल्फेट - 10 किग्रा प्रति एकड़ की दर से।
  • बोरेक्स - 04 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से।

फसल के 20-25 दिन होने के बाद

  • जिंक सल्फेट - 10 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से।
  • फसल के 30-35 की होने के बाद
  • यूरिया - 60 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
  • एजेटोबैक्टर - 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
  • PSB - 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
  • ह्नयूमिक एसिड - 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए।
  • फसल 60 दिन की हो जाने के बाद
  • यूरिया - 80 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से दें।
  • MOP - 40 किग्रा. की दर से दें।

स्प्रे

  • 19:19:19 - 2 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
  • Zn + Fe + Mn - 0.5 प्रतिशत का स्प्रे करें।

फसल बुवाई के 75-90 दिन होने पर

  • यूरिया - 60 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • कैल्शियम नाइट्रेट - 30 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • बेंटोनाइट सल्फर - 10 से 12 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • KSB - 2 किग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
  • सीबीड - 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।

फसल 120 दिन की होने पर

  • 1 प्रतिशत KNO3 का स्प्रे करें।
  • 1 प्रतिशत MgSO4 का स्प्रे करें।
  • Micronuterint Mix – 0-5 का स्प्रे करें।

मुख्य पोषक तत्व (प्रति एकड़ प्रयोगार्थ):

  • N (नाइट्रोजन) - 120 किग्रा.
  • P (फॉस्फोरस) - 40 किग्रा.
  • K (पोटाश) -   80 किग्रा.
  • Ca (कैल्शियम) - 50-60 किग्रा.
  • S (सल्फर) -   15 से 16 किग्रा.

अपेक्षित सवधानियाँ:

  • जिंक और डीएपी का प्रयोग एक साथ न करें।
  • यूरिया और कैल्शियम नाइट्रेट को एक साथ न मिलाएं।
  • स्प्रे शाम के समय ही करें।
  • संतुलित उर्वरकों का सही समय पर ही प्रयोग करें।
  • खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था को बनाए रखें।

अपेक्षित लाभः

  • अधिक टिलरिंग।
  • मोटा गन्ना।
  • गन्ने के गिरने की समस्या कम होती है।
  • शर्करा की रिकवरी अधिक होती है।
  • 600-650 क्विंटल प्रति एकड़ तक गन्ने का उत्पादन प्राप्त हो जाता है। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।