
गन्ने की फसल पर चोटी बेधक कीट का आक्रमण Publish Date : 08/07/2026
गन्ने की फसल पर चोटी बेधक कीट का आक्रमण
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
- मेरठ परिक्षेत्र में कीट से फसल को बचाने के लिए की गई रधनीति तैयार।
- गन्ना विभाग एवं शुगर इंडस्ट्रीज हुए सक्रिय।
- कीट के प्रकोप के चलते किसानों की उडी नींद।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में गन्ने की फसल पर चोटी बेधक (टॉप बोरर) का प्रकोप हो चुका है। यह कीट गन्ने के पौधों के शीर्ष भाग को अंदर से खाकर उन्हें सुखा देता है, जिससे प्रभावित पौधों की बढवार रूक जाती है और गन्ने के उत्पादन में भारी गिरावट आने का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए अब गन्ने की पैदावार को लेकर गन्ना किसानों की चिंता बढ़ना भी स्वाभाविक है। कीट के प्रकोप के चलते विशेष रूप से मेरठ परिक्षेत्र और जिले के किसानों की नींद अब उड़ने लगी है।

गन्ने की फसल में कीट के प्रकोप को देखते हुए जिले का गन्ना विकास विभाग और शुगर इंडस्ट्री भी सक्रिय हो उठे हैं। उप आयुक्त, गन्ना राजीव राय ने चीनी मिलों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर टॉप बोरर से फसल के बचाव के लिए तत्काल रणनीति बनाकर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसी के परिप्रेक्ष्य में नंगलामल चीनी मिल के द्वारा अपने क्षेत्र में 250 लोगों की एक टीम को उतार दिया गया है, जो गाँव-गाँव जाकर न केवल किसनों को जागरूक कर रही है बल्कि खेतों में चोटी बेधक से प्रभावित पौधों को जमीन की सतह से काटकर उन्हें नष्ट भी करा रही है।
गन्ने की फसल प0 उ0 प्र0 के किसानों की एक कैश क्रॉप है और यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था इसी फसल पर निर्भर करती है। इस प्रकार से देखा जाए तो अकेले जिला मेरठ में ही एक साल में ही 600 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को किया जाता है और मेरठ परिक्षेत्र में तो यह आंकड़ा चार हजार करोड़ रूपये से भी अधिक है। ऐसे में क्षेत्र में फसल पर मंडरा रहे इस खतरे को देखकर किसानों की नींद का उड़ना स्वाभाविक ही है।
इसके सम्बन्ध में कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि टॉप बोरर कीट प्रकोप विशेष रूप से गर्म और आर्द मौसम में बहुत तेजी के साथ बढ़ता है और आजकल का यह समय कीट की वृद्वि के एकदम अनुकूल है। यह कीट गन्ने की पत्तियों के ऊपर अंडे देता है और जकीट का लार्वा पौधें के अंदर प्रवेश कर उसे हानि पहुँचाता है। इस बारे में किसानों का कहना है कि खेतों के अंदर पौधे बहुत तेजी से सूख रहे हैं और कई स्थानों पर तो दवाओं का प्रभाव भी सीमित ही नजर आ रहा है। यदि कीट का नियंत्रण समय रहते नहीं किया गया तो गन्ने की उपज पर गम्भीर प्रभाव भी पड़ सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वह अपनी फसल की निगरानी नियमित रूप से करते रहें कीट के प्रकोप के आरम्भिक दौर में ही कीट नियंत्रण के उपाय करें, जिससे कीट के प्रभाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
कीट के प्रकोप के मुख्य लक्षण
- कीट से प्रभवित पौधे का ऊपरी भाग सूखकर मर जाता है।
- पत्तियों पर समानांतर छिद्र या सुरंग दिखाई देने लगती है।
- पौधों की नई कोपलें भी मुरढाकर सूख जाती हैं।
- कीट से प्रभावित पौधे की वृद्वि थम जाती है और एकझाड़ी का रूप धारण कर लेता है।
बचाव एवं नियंत्रण के उपाय
- कीट से ग्रसित पौधों को काटकर नष्ट करना बहुत आवश्यक कार्य है, इससे कीट का प्रसार सीमित हो जाता है।
- किसान खेत में फैरोमोन ट्रैप लगाकर कीट की निगरानी कर सकते हैं।
- उर्वरकों का प्रयोग संतुलित रूप से करें और साथ ही अधिक मात्रा में यूरिया का प्रयोग करने से बचें।
- आवश्यकता के अनुसार अनुशंसित कीटनाशी रसायनों का छिड़काव किया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
