गन्ने की फसल में मकड़ी का प्रकोप एवं उसका नियंत्रण      Publish Date : 01/07/2026

गन्ने की फसल में मकड़ी का प्रकोप एवं उसका नियंत्रण

                                                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर

गन्ने की फसल में मकड़ी (रेड स्पाइडर माइट) एक सूक्ष्म कीट है जो कि गन्ने की पत्तियों का रस चूसकर गन्ने की फसल को व्यापक हानि पहुँचाता है।

मकड़ी के प्रकोप के लक्षण

                                

  • गन्ने के पौधों की पत्तियों पर लाल, पीले अथवा भूरे रंग के छोटे-छोटे से धब्बे दिखाई देते हैं।
  • पत्तियों की निचली सतह पर मकड़ी के महीन जाले भी दिखाई दे सकते हैं।
  • मकड़ी का अधिक प्रकोप होने पर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के कम हो जाने के कारण फसल की बढ़वार एवं उत्पादन कम हो जाता है।

अनुकूल परिस्थितियाँ

  • गर्म एवं शुष्क मौसम इसके लिए अनुकूल माना जाता है।
  • खेत में पर्याप्त नमी का न होना।
  • लम्बे समय तक वर्षा का नहीं होना।

नियंत्रण के उपाय:

1. बचाव के लिए सबसे अधिक आवश्यक है कि खेत में नमी का उचित स्तर बनाकर रखा जाना चाहिए और आवश्यकता के अनुसार समय समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

2. खेत में मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए, विशेष रूप से पोटाश उर्वरक का पर्याप्त मात्रा में उपयोग किया जाना चाहिए।

3. अत्याधिक प्रभावित गन्ने की पत्तियों को शीघ्र हटकर नष्ट कर देना चाहिए।

4. इसका रासायनिक नियंत्रण करने के लिए ओमाईट (Propargite 57 EC) का 1.5-2.0 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर इसका छिड़काव करना चाहिए।

5. आवश्यकता के अनुसार 10 से 15 दिन के बाद पुनः एक छिड़काव और कर देना चाहिए।

6. यह छिड़काव करते समय पत्तियों की निचली सतह दवा का अच्छी तरह से छिड़काव करना चाहिए।

किसान भाईयों के लिए विशेष सलाहः

गन्ने की फसल में मकड़ी का प्रकोप दिखाई देते ही अविलम्ब इसके नियंत्रण के उपाय शुरू कर देने चाहिए, क्योंकि विलम्ब होने से गन्ने की वृद्वि एवं उपज दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।