गन्ने की प्रमुख बीमारियां एवं प्रबंधन      Publish Date : 27/06/2026

     गन्ने की प्रमुख बीमारियां एवं प्रबंधन

                                                                                               प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

                       ‘चाबुक कानी रोग - 11

किसान भाइयों, इस समय गन्ने की फसल में ‘चाबुक कानी’ (Sugarcane Whip Smut) नामक फफूंद जनित रोग का प्रकोप बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है। यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो गन्ने के उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।

इस रोग की पहचान कैसे करें?

  • गन्ने के शीर्ष (शेंड) से काले रंग का, चाबुक जैसा लंबा और मुड़ा हुआ भाग बाहर निकलता है।
  • शुरुआत में यह चाबुक सफेद पतले आवरण से ढका होता है, जो बाद में फटकर काली धूल (फफूंद के बीजाणु) हवा में फैलाता है।
  • प्रभावित गन्ने की वृद्धि रुक जाती है और डंठल (कांडी) छोटा रह जाता है।

नियंत्रण के उपाय:

                                      

1. पत्तियाँ (पाचट) हटाना: जैसे ही रोगग्रस्त चाबुक दिखाई दे, उसे प्लास्टिक बैग में सावधानी से डालकर काटें और खेत के बाहर ले जाकर जलाकर नष्ट कर देना चाहिए।

(ध्यान रखें: चाबुक को खुले में झटका न दें, अन्यथा इसके कण पूरे खेत में फैल जाएंगे)।

2. बीज (सेट) का चयन: हमेशा रोगमुक्त खेत से ही बीज का चयन चाहिए।

3. बीज उपचार: बुवाई से पहले बीज को उचित फफूंदनाशक से उपचारित अवश्य ही करें।

4. फसल चक्र (Crop Rotation): एक ही खेत में बार-बार गन्ना लगाने से बचें और उचित फसल चक्र को अपनाएँ।

  • समय पर पहचान और सही प्रबंधन ही अच्छी पैदावार की कुंजी है!

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।