
गन्ने की प्रमुख बीमारियाँ एवं उनका प्रबन्धन Publish Date : 25/06/2026
गन्ने की प्रमुख बीमारियाँ एवं उनका प्रबन्धन
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
गन्ने का पोका बोइंग यानी ‘अगोला सड़न रोग’-10
- जून का महीना शुरू होते ही लौट आता है यह खतरनाक रोग!
किसान भाइयों, जैसे ही मानसून की दस्तक होती है और हवा में उमस बढ़ती है, गन्ने की फसल पर पोका बोइंग यानी ‘अगोला सड़न रोग’ का हमला भी तेज हो जाता है। अगर सही समय पर इस रोग पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी गन्ने की बढ़वार को पूरी तरह से अवरूद्व भी कर सकती है।
रोग की पहचान और तुरंत किए जाने वाले उपायः
- यह रोग मुख्य रूप से जून से सितंबर के महीनों में सबसे अधिक सक्रिय होता है।
- जब हवा में नमी बहुत ज्यादा (80-90 प्रतिशत) हो और लगातार बारिश के बाद तेज धूप निकलती है, तो उमस भरे वातावरण में यह फंगस हवा के माध्यम से तेजी से एक खेत से दूसरे खेत में फैलता है।
रोग के शुरुआती लक्षणः रोग से प्रभावित सबसे पहले गन्ने की सबसे ऊपर की नई पत्तियां नीचे (आधार) से पीली या सफेद पड़ने लगती हैं और वह आपस में उलझ जाती हैं।

गंभीर अवस्था (टॉप रॉट): गन्ने की गोफ (ऊपरी हिस्सा) सड़कर काली पड़ जाती है और यह आसानी से ही टूट जाती है।
नाइफ कटः गन्ने के तने पर ऐसा निशान बन जाता है जैसे इस पर किसी ने चाकू से चीरा लगाया हो।
बचाव और अचूक इलाजः
यूरिया का अधिक प्रयोग न करें: इस मौसम में खेत में आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन (यूरिया) न दें। क्योंकि अधिक यूरिया देने से पत्तियां कोमल होती हैं और बीमारी जल्दी पकड़ती है।
लक्षण दिखते उचित दवाई का छिड़काव

कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP — 500 ग्राम 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
स्प्रे करते समय नोजल का रुख गन्ने के अगोले (ऊपरी हिस्से) की तरफ रखें ताकि दवा सीधे गोफ के अंदर तक जाए। यदि बीमारी अधिक है, तो 10-12 दिन बाद दोबारा स्प्रे किया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
