
गन्ने की खेती में 5 बड़ी गलतियों से बचें, नहीं तो नुकसान होगा Publish Date : 11/06/2026
गन्ने की खेती में 5 बड़ी गलतियों से बचें, नहीं तो नुकसान होगा
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
कई किसान भाई अपनी गन्ने की खेती में मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन इस दौरान होने वाली कुछ छोटी-छोटी गलतियाँ बड़ा नुकसान करती हैं, अतः गन्ना किसानों को इन गलतियों से बचना चाहिए, ताकि वह गन्ने की अच्छी फसल प्राप्त कर सकें।
तो चलिए अपने कृषि विशेषज्ञ ये जानते कि कौन कौन हैं वे 5 बड़ी गलतियाँ-
1. गन्ने की गलत किस्म का चयन करना
प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक अलग किस्म उपयुक्त रहती है और तथ्य यह है कि अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म के चयन का अर्थ है अधिक उत्पादन प्राप्त करना।
2. खाद का अधिकतम उपयोग करना
अक्सर हमारी सोच होती है कि “अधिक खाद उत्पादन भी अधिक देती है” यह पूरी तरह से एक गलत सोच है, क्योंकि संतुलित खाद ही अधिक लाभ प्रदान करती है।
3. आवश्यकता से अधिक पानी देना या आवश्यकता से कम पानी देना
पानी के परिप्रेक्ष्य में अधिक पानी देने से पौधों की जड़ें सड़ जाती हैं, जबकि आवश्यकता से कम पानी देने से फसल की बढ़वार रुक जाती है।
4. समय पर उपयुक्त दवा का छिड़काव न करना

रोग और कीट नियंत्रण के उपाय करने में देरी होने पर फसल का नुकसान बढ़ जाता है अतः किसानों को चाहिए कि वह समय के रहते ही फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के उपाय करें, ताकि फसल को रोग एवं कीटों से होने वाली हानि को कम किया जा सके।
5. मिट्टी परीक्षण न कराना
यदि किसान अपने खेत की मृदा का परीक्षण नहीं कराते हैं तो वह अनुमान के आधार पर ही खाद खाद देते हैं जिससे उनकी फसल का खर्च तो बढ़ जाता है, परन्तु उन्हें फसल का उत्पादन कम प्राप्त होता है। अतः सभी किसान भाईयों से अपील है कि वह खाद का प्रयोग करने से पहले अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण अवश्य कराएं और परक्षण के आधार पर ही खाद का प्रयोग करें। इससे उना खर्च कम होता है और उत्पादन तथा लाभांश बढ़ता है।
फसल की उचित देखभाल
गन्ने की फसल की उचित देखभाल करने के प्रमुख तरीके इस प्रकार से हैं-
गन्ने की फसल की अच्छी पैदावार और बेहतर विकास के लिए समय पर सिंचाई, मिट्टी चढ़ाना, उर्वरकों का सही इस्तेमाल करना और खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है। फसल की विभिन्न अवस्थाओं में कुछ प्रमुख बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है
निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाना खरपतवार नियंत्रणः गन्ने की फसल की शुरुआती अवस्था में खरपतवार गनने फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अतः गन्ने की बुवाई के शुरुआती महीनों में खेत की निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए।
मिट्टी चढ़ाना (Arthing Up): जब गन्ने की फसल लगभग 2.5 फीट लंबी हो जाए और कल्ले (Tillers) निकलने का समय हो, तो पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा देना चाहिए। इससे पौधों को सहारा मिलता है और जड़ें मजबूत होती हैं।
पानी और सिंचाई का उचित प्रबंधनः जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गन्ने की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए गर्मियों के मौसम में 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए।
खेत में नमी का स्तर बनाकर रखें: भारी बारिश के मौसम में खेत में जल-भराव न होने दें और जल निकासी का उचित व्यवस्था बनाकर रखें।
खाद और उर्वरक का प्रयोगः
नाइट्रोजन की डोजः अच्छी बढ़वार के लिए यूरिया (नाइट्रोजन) को एक साथ देने के बजाय 3 से 4 समान भागों में बांटकर देना प्रभावकारी होता है जैसे बुवाई के 45, 90 और 120 दिन बाद) यूरिया का प्रयोग करना उत्तम है।
अन्य पोषक तत्वः मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही पोटाश, फास्फोरस, और जिंक का उपयोग करना चाहिए। उर्वरकों को हमेशा पौधों की जड़ों के पास दें और उसे मिट्टी से ढक देना चाहिए।
कीट और रोग नियंत्रणः गन्ने में चोटी बेधक (टॉप बोरर) या दीमक जैसे कीटों से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उचित कीटनाशकों का प्रयोग करना लाभदायक रहता है। पत्तों पर पीले धब्बे या लाल सड़न (त्मक त्वज) जैसे रोग दिखने पर तुरंत प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए।
पत्तियों की सफाई और गन्ने की बंधाईः
पत्ती उतारना (Detrashing): जब गन्ने की फसल लगभग 5-6 महीने की हो जाए, तो पुरानी और सूखी पत्तियों को नीचे से साफ कर देना चाहिए। इससे खेत में हवा और धूप अच्छी तरह पहुंचती है।
गन्ने की बंधाईः बारिश और तेज हवा में गन्ने को गिरने से बचाने के लिए, 2-3 पंक्तियों के गन्ने को आपस में उनकी ही पत्तियों से बांध देना चाहिए।
याद रखें-
एक सही फसल योजना + सही समय पर प्रयोग का अर्थ अधिक लाभ। इस प्रकार किसान भाई इन विधियों को ध्यान में रखकर अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते है और इसके साथ ही दूसरे किसान भाईयों को भी जागरूक करते हुए उन्हें भी इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
