
मल्टीप्लायर तकनीक और इसके लाभ Publish Date : 17/05/2026
मल्टीप्लायर तकनीक और इसके लाभ
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 निधि सिंह
मल्टीप्लायर तकनीक के कुछ प्रमुख लाभः
1. उत्पादन में वृद्धिः यह तकनीक फसल की उत्पादकता को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है।
2. कम खर्चः मल्टीप्लायर तकनीक में कम रसायनों और उर्वरकों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों के खर्च में कमी आती है।
3. कीट एवं रोग मुक्त प्रणालीः यह तकनीक फसलों को कीट और रोगों से मुक्त रखने में मदद करती है, जिससे फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
4. पर्यावरण अनुकूलः मल्टीप्लायर तकनीक पर्यावरण अनुकूल है, क्योंकि इसमें कम से कम रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी और जल संसाधनों का संरक्षण होता है।
5. किसानों की आय में वृद्धिः यह तकनीक किसानों की आय में वृद्धि करने में मदद करती है, क्योंकि इससे उन्हें अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल और उसके उत्पाद मिलते हैं।
मल्टीप्लायर तकनीक (Multiplier Technology) कृषि के क्षेत्र में उपयोग की जाने वाली एक उन्नत जैविक विधि है, जिसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाना और फसलों की पैदावार में भारी वृद्धि करना है।
मल्टीप्लायर तकनीक के मुख्य बिंदुः

- उत्पादन में वृद्धिः इस तकनीक का उपयोग करने से पहले ही सीजन से फसलों की पैदावार में 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जाती है।
- मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधारः यह तकनीक मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं की संख्या को बढ़ाती है, जिससे जमीन मुलायम (भुरभुरी) होती है और मिट्टी में ऑक्सीजन के स्तर में भी अपेक्षित सुधार होता है।
- रासायनिक खादों से मुक्तिः इस तकनीक का उपयोग करने से पहले साल से ही रासायनिक खादों की आवश्यकता 20 प्रतिशत तक कम होने लगती है। इस तकनीक की सहायता से धीरे-धीरे 5 से 7 वर्षों में रसायनों का उपयोग 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
- कैसे उपयोग करें: आम तौर पर 1 किलो मल्टीप्लायर को एक ट्रॉली (या लगभग एक एकड़) गोबर की खाद में अच्छी तरह मिलाकर फसलों में उपयोग किया जाता है।
- मल्टीप्लायर तकनीक का उपयोग करने से पौधों का विकास तेजी से होता है, पत्तियां चौड़ी और गहरी हरी होती हैं, तथा फूलों के झड़ने की समस्या भी कम या बन्द हो जाती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
