
पौधों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व Publish Date : 11/03/2026
पौधों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व
प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 निधि सिंह
फसल के लिए मुख्य पोषक तत्वों के नाम इस प्रकार से हैं-
मुख्य पोषक तत्वः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटेशियम।
द्वितीयक पोषक तत्वः कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं सल्फर।
सूक्ष्म पोषक तत्वः लोहा, जस्ता, ताम्बा, मैंगनीज, बोरॉन, मॉलिब्डेनम, क्लोरीन एवं निकिल।
पौधों के बेहतर विकास के लिए 17 आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
मुख्य पोषक तत्व (Primary Macronutrients)
इनकी पौधों को सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, जिन्हें किसान अक्सर उर्वरकों के माध्यम से देते हैं। 4. नाइट्रोजन (N) – वानस्पतिक वृद्धि और हरे रंग के लिए। 5. फास्फोरस (P) – जड़ों के विकास और ऊर्जा हस्तांतरण (ATP) के लिए। 6. पोटेशियम (K) – रोग प्रतिरोधक क्षमता और फलों की गुणवत्ता के लिए।
द्वितीयक पोषक तत्व (Secondary Macronutrients)
इनकी आवश्यकता मुख्य तत्वों से कम लेकिन सूक्ष्म तत्वों से अधिक होती है। 7. कैल्शियम (Ca) – कोशिका भित्ति की मजबूती के लिए। 8. मैग्नीशियम (Mg) – क्लोरोफिल के निर्माण के लिए। 9. सल्फर (S) – तेल और प्रोटीन के निर्माण के लिए।
सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)
पौधों को इनकी बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है, लेकिन इनकी कमी से विकास रुक सकता है। 10. लोहा (Iron - Fe) 11. जिंक (Zinc - Zn) 12. मैंगनीज (Manganese - Mn) 13. तांबा (Copper - Cu) 14. बोरॉन (Boron - B) 15. मोलिब्डेनम (Molybdenum - Mo) 16. क्लोरीन (Chlorine - Cl) 17. निकिल (Nickel - Ni)।
Contact और Systemic फफूंदीनाशक में क्या अंतर है? एक सही जानकारी:-
खेती में Fungicides मुख्य रूप से दो तरीके से काम करते हैं: Contact (संपर्क) और Systemic (सिस्टमैटिक )।
इनका अंतर समझना सही उपचार के लिए बहुत जरूरी है।
यहाँ दोनों के बीच मुख्य अंतर दिए गए हैं:
1. कार्य करने का तरीका (Mode of Action)

Contact (संपर्क): यह केवल पौधे के उन्हीं हिस्सों पर काम करता है जहाँ दवा गिरती है। यह पौधे के ऊपर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और फंगस को अंदर घुसने से रोकता है।
Systemic (सिस्टमैटिक): यह दवा पौधे द्वारा सोख ली जाती है और जाइलम के जरिए पूरे पौधे (जड़ से पत्तियों तक) में फैल जाती है। अगर दवा केवल नीचे की पत्तियों पर गिरी है, तो भी यह ऊपर की नई पत्तियों तक पहुँच जाती है।
2. उपयोग का समय (Purpose)
Contact: इसका उपयोग मुख्य रूप से बचाव के लिए किया जाता है। बीमारी आने से पहले इसे छिड़का जाता है ताकि कवक पौधे पर हमला न कर सके।
Systemic: इसका उपयोग इलाज के लिए किया जाता है। अगर बीमारी लग चुकी है, तो यह अंदर जाकर कवक को मारता है।
3. मौसम का प्रभाव
Contact: बारिश होने पर यह जल्दी धुल जाता है। अगर छिड़काव के तुरंत बाद बारिश हो जाए, तो दोबारा स्प्रे करना पड़ता है।
Systemic: एक बार पौधे द्वारा सोख लिए जाने के बाद (आमतौर पर 1-2 घंटे में), इस पर बारिश का असर कम होता है।
4. असर की अवधि (Residual Activity)
Contact: इसका असर कम समय (लगभग 7-10 दिन) तक रहता है क्योंकि यह बाहरी वातावरण के संपर्क में रहता है।
Systemic: इसका असर लंबे समय (15-21 दिन या उससे ज्यादा) तक रहता है क्योंकि यह पौधे के रस के अंदर मौजूद होता है।
आजकल बाजार में ऐसे फफूंदीनाशक भी आते हैं जिनमें ये दोनों (Contact + Systemic) मिक्स होते हैं (जैसे Carbendazim + Mancozeb)।
ये सबसे बेहतर परिणाम देते हैं क्योंकि ये ऊपर से सुरक्षा भी देते हैं और अंदर से इलाज भी करते हैं।
सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले उत्पाद:-
अक्सर हम भारी मात्रा में खाद तो डालते हैं, लेकिन छोटे पोषक तत्वों (Micronutrients) को भूल जाते हैं। जैसे हमारे शरीर को विटामिन चाहिए, वैसे ही पौधों को सूक्ष्म तत्व। आज हम आपको बाजार के 3 सबसे भरोसेमंद उत्पादों की सटीक जानकारी दे रहे हैं:
1. Multiplex Multi-Micronutrient (मल्टीप्लेक्स)
यह उत्पाद पाउडर और लिक्विड दोनों रूपों में आता है, लेकिन पाउडर फॉर्म (Soil Application) में तत्वों की मात्रा इस प्रकार होती है। यह मिट्टी की थकान दूर करने और संतुलित बढ़वार के लिए मशहूर है।
तत्वों की मात्रा:
जिंक (Zn): 5.0%
लोहा (Fe): 2.0%
मैंगनीज (Mn): 2.0%
बोरॉन (B): 0.5%
तांबा (Cu): 0.5%
मोलिब्डेनम (Mo): 0.01%
2. Aries Agromin (एरीज एग्रीमिन - स्प्रे वाला)
एग्रीमिन का स्प्रे वाला ग्रेड (Foliar) काफी लोकप्रिय है क्योंकि यह पानी में 100% घुलनशील होता है। इसकी संरचना कुछ इस प्रकार है। अगर फसल में तुरंत हरियाली और चमक चाहिए, तो यह सबसे बेस्ट है।
तत्वों की मात्रा:
मैग्नीशियम (Mg): 3.0% (एक्स्ट्रा पावर)
जिंक (Zn): 3.0%
लोहा (Fe): 2.5%
मैंगनीज (Mn): 1.0%
तांबा व बोरॉन: 1.0% और 0.5%
3. Mahadhan Combi M.S. (महाधन कॉम्बी - ग्रेड 1)
यह विशेष रूप से महाराष्ट्र ग्रेड-1 (M.S. Grade 1) के मानकों पर आधारित है, जो मिट्टी के लिए सबसे संतुलित माना जाता है। यह मिट्टी में जान फूंकने और जड़ों को फौलादी बनाने के लिए जाना जाता है।
तत्वों की मात्रा:
जिंक (Zn): 5.0%
लोहा (Fe): 2.0%
बोरॉन (B): 1.0%
मैंगनीज (Mn): 1.0%
तांबा (Cu): 0.5%
इन तत्वों के इस्तेमाल से न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि अनाज की चमक और वजन भी बढ़ेगा! इन उत्पादों में से किसी भी उत्पाद को चुन सकते है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
